
।। खाकी और खाकी की ‘जुगलबंदी’ में उजड़ गए बस्ती के जंगल: परमिट 75 का, कट गए 200 सागौन।।
अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती सदर
बस्ती।। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ ‘वृक्षारोपण महाकुंभ’ चलाकर प्रदेश को हरा-भरा बनाने में जुटे हैं, वहीं बस्ती सदर के वन विभाग के कारिंदों ने माफियाओं के साथ मिलकर सरकार की मंशा पर ही आरा चला दिया है। ताजा मामला बस्ती सदर रेंज के दुभरा का है, जहां होली की खुमारी के बीच वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और लकड़ी माफियाओं ने मिलकर सागौन के हरे-भरे बाग को ‘कत्लगाह’ में तब्दील कर दिया।
⭐ परमिट का ‘खेल’ और करोड़ों की ‘सांठगांठ’
सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल कागजी परमिट की आड़ में खेला गया। दुभरा में महज 75 सागौन के पेड़ों का परमिट जारी किया गया था, लेकिन वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) अजय प्रताप सिंह और हल्का वन दरोगा राम अभिलाष की कथित मेहरबानी से माफियाओं ने 200 से अधिक कीमती सागौन और शीशम के पेड़ों को जमींदोज कर दिया।
बड़ा सवाल: जब परमिट 75 पेड़ों का था, तो बाकी के 125 से ज्यादा पेड़ किसकी शह पर काटे गए? क्या वन दरोगा की आंखों पर नोटों की पट्टी बंधी थी या फिर वे खुद इस महालूट के हिस्सेदार थे?
🚨 5 ट्रक लकड़ी जिले के बाहर, खजाना हुआ खाली
चर्चा है कि शीशम और सागौन के इस पूरे बाग का सौदा लगभग 24 लाख रुपये में हुआ था। वन विभाग के नाकों और पुलिस की गश्ती को धता बताते हुए 05 ट्रक से अधिक कीमती लकड़ी जिले की सीमा पार कर गई। यह न केवल पर्यावरण की क्षति है, बल्कि राजस्व की भी बड़ी चोरी है। परमिट का हवाला देकर अब अधिकारी अपनी खाल बचाने और मामले पर लीपापोती करने में जुटे हैं।
🔥 डीएफओ के लिए अग्निपरीक्षा
बस्ती की तेज-तर्रार डीएफओ डॉ. शिरीन अपनी ईमानदारी और कड़े अनुशासन के लिए जानी जाती हैं। लेकिन उनके मातहतों (रेंजर और वन दरोगा) ने जिस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं, वह डीएफओ की कार्यशैली को सीधी चुनौती है। क्या डॉ. शिरीन अपने ही विभाग के इन ‘दीमकों’ पर कार्रवाई करेंगी जो अंदर ही अंदर विभाग को खोखला कर रहे हैं?
📢 जनता पूछ रही सवाल:
⭐क्या रेंजर अजय प्रताप सिंह और वन दरोगा राम अभिलाष पर मुकदमा दर्ज होगा?
⭐सरकारी धन को लाखों का चूना लगाने वाले ठेकेदार पर कब चलेगा हंटर?
⭐क्या कटे हुए पेड़ों की रिकवरी माफियाओं की जेब से होगी?
लकड़ी ठेकेदारों के बुलंद हौसले यह बताने के लिए काफी हैं कि बस्ती सदर में ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘कमीशन का राज’ चल रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन भ्रष्ट चेहरों को बेनकाब करता है या यह मामला भी पुरानी फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा।





















