
अजीत मिश्रा (खोजी)
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा सरकारी धन: रिटायरमेंट से पहले बीडीओ का ‘खेल’, बिना काम पूरा हुए डकारने की तैयारी!
- कमीशन के आगे घुटने टेकते नियम: कप्तानगंज में ₹5.92 लाख का ‘फर्जीवाड़ा’ वायरल, सीडीओ को खुली चुनौती!
- साहब के रिटायरमेंट का ‘रिटर्न गिफ्ट’: नयकापार ग्राम पंचायत में बिना ईंट लगे ही फीड हो गए लाखों के वाउचर!
- जादुई विकास! कप्तानगंज में काम होने से पहले ही हो गया भुगतान की तैयारी, बीडीओ साहब का ‘कमीशन मॉडल’ हिट!
- धन्य हो बीडीओ साहब! जाते-जाते सरकारी धन को बना दिया ‘निजी संपत्ति’, ग्राम प्रधान के साथ मिलकर रचा फर्जीवाड़े का चक्रव्यूह!
- योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ को बीडीओ की चुनौती: नयकापार में फर्जी बिलों का अंबार, क्या गिर पाएगी गाज?
- भ्रष्टाचार की ‘इंटरलाकिंग’: कप्तानगंज विकास खंड में मची खुली लूट, सीडीओ सार्थक अग्रवाल की साख दांव पर!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
कप्तानगंज, बस्ती। सरकारी धन की लूट और नियम-कानूनों को ताक पर रखकर जेबें भरने का खेल कप्तानगंज विकासखंड में चरम पर है। ताज़ा मामला ग्राम पंचायत नयकापार का है, जहाँ विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार की ऐसी इबारत लिखी गई है कि शासन के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं। यहाँ बिना कार्य पूर्ण हुए ही लाखों रुपये के फर्जी बिल-वाउचर फीड कर दिए गए हैं।
कमीशन का ‘सिंडिकेट’ और रिटायरमेंट का ‘मोह’
सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) चन्द्रभान उपाध्याय और उनके कंप्यूटर ऑपरेटर हैं। चर्चा है कि बीडीओ साहब जून माह में सेवानिवृत्त (रिटायर) होने वाले हैं। ऐसे में सेवामुक्त होने से पहले “जितना लूट सको, लूट लो” की नीति पर काम करते हुए, ग्राम प्रधान उर्मिला सिंह के साथ मिलकर सरकारी खजाने पर डाका डालने की पूरी तैयारी कर ली गई है। आरोप है कि मोटी कमीशन के बदले नियमों को ठेंगा दिखाकर अधूरे कार्यों के पूर्ण भुगतान का डाटा ऑनलाइन फीड करा दिया गया है।
नियमों की धज्जियां: न ईंट बिछी, न मजदूर को मिला पैसा
शासनादेश स्पष्ट है कि पहले कार्य धरातल पर पूर्ण होना चाहिए, उसके बाद ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी। मनरेगा के तहत पहले मिस्त्री और मजदूरों का भुगतान होता है, फिर सामग्री का। लेकिन नयकापार में गंगा उल्टी बह रही है:
- अधूरा काम: पिच रोड से राम निहाल धोबी के घर तक इंटरलॉकिंग का कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है।
- लाखों की लूट: काम पूरा होने के बजाय ₹5,92,000 का फर्जी बिल-वाउचर भुगतान हेतु फीड कर दिया गया।
- वायरल साक्ष्य: सोशल मीडिया पर ये फर्जीवाड़े के साक्ष्य जमकर वायरल हो रहे हैं, जिससे विभाग की किरकिरी हो रही है।
“विकास से कोई सरोकार नहीं, बस कमीशन की भूख है। एक जिम्मेदार अधिकारी का रिटायरमेंट के मुहाने पर इस तरह भ्रष्टाचार में लिप्त होना प्रदेश सरकार की छवि पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।”
CDO सार्थक अग्रवाल के लिए बड़ी चुनौती
जनपद के तेज-तर्रार मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल के लिए यह मामला एक खुली चुनौती बना हुआ है। क्या वह इन भ्रष्ट अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर की साठगांठ को तोड़ पाएंगे? क्या नयकापार में फीड किए गए इन फर्जी बिलों को डिलीट करवाकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी? जनता की नजरें अब जिले के आलाधिकारियों पर टिकी हैं कि वे सरकारी धन की इस खुली लूट को कैसे रोकते हैं।






















