इतवाउत्तर प्रदेशकौशाम्बीगोंडागोरखपुरबस्तीबहराइचलखनऊसिद्धार्थनगर 

शिक्षा का मंदिर या ‘वसूली’ का केंद्र? सेंट बेसिल स्कूल पर लगे गंभीर आरोप।

बस्ती: सेंट बेसिल स्कूल की मनमानी के खिलाफ अधिवक्ता का 'हल्ला बोल', DM से शिकायत।

।। सेंट बेसिल स्कूल की ‘मनमानी’ पर उठे सवाल, डीएम से शिकायत ।।

💫अभिभावकों का मानसिक उत्पीड़न और अवैध वसूली का आरोप; अधिवक्ता ने की सख्त कार्रवाई की मांग।

💫स्कूल की तानाशाही पर DM की चौखट पर न्याय की गुहार; बच्चों के अधिकार दांव पर।

💫सेंट बेसिल स्कूल में ‘मानसिक उत्पीड़न’ का खेल? अधिवक्ता ने खोला मोर्चा।

उत्तर प्रदेश।

बस्ती, 17 मार्च। शहर के प्रतिष्ठित कहे जाने वाले सेंट बेसिल स्कूल (खीरीघाट, भटोलवा) में शिक्षा के नाम पर ‘व्यापार’ और बच्चों के मानसिक उत्पीड़न का गंभीर मामला गरमाता जा रहा है। विद्यालय प्रबंधन की कथित तानाशाही और नियमों को ताक पर रखकर की जा रही गतिविधियों के खिलाफ अब कानूनी आवाज बुलंद हुई है। अधिवक्ता धर्मेन्द्र कुमार कन्नौजिया ने मंगलवार को जिलाधिकारी (डीएम) को पत्र सौंपकर स्कूल प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है।

⭐शिक्षा नहीं, ‘शोषण’ का अड्डा!

जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन बच्चों और अभिभावकों के साथ अनुचित व्यवहार कर रहा है। स्कूल में न केवल अनियमित और मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है, बल्कि मूलभूत शैक्षणिक सुविधाओं का भी भारी अभाव है। शिक्षा के अधिकार (RTE) की धज्जियां उड़ाते हुए बच्चों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है, जिससे उनके भविष्य और व्यक्तित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

“यह केवल फीस का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके मौलिक अधिकारों के हनन का विषय है। एक शिक्षण संस्थान में बच्चों का मानसिक उत्पीड़न कतई स्वीकार्य नहीं है।” > — धर्मेन्द्र कुमार कन्नौजिया, अधिवक्ता

⭐प्रमुख आरोप जिन पर टिकी है जांच की सुई:

👉अवैध वसूली: तय मानकों से हटकर विद्यालय द्वारा अनुचित तरीके से फीस की मांग।

👉मानसिक उत्पीड़न: एडमिशन और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर छात्रों व अभिभावकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव।

👉सुविधाओं का अभाव: भारी-भरकम फीस लेने के बावजूद बुनियादी शैक्षणिक ढांचे की कमी।

👉अधिकारों का हनन: बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बाधित करने वाला व्यवहार।

💫कार्रवाई की मांग

अधिवक्ता ने डीएम से मांग की है कि इस गंभीर प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सुरक्षित करते हुए विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि छात्रों का उत्पीड़न तत्काल रोका जाना चाहिए, अन्यथा यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

Back to top button
error: Content is protected !!