
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। स्वच्छ भारत मिशन को ‘सल्टौआ ब्लॉक’ का करारा तमाचा: जहाँ साहब बैठते हैं, वहीं सड़ रहा शौचालय।।
शनिवार,24 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश
बस्ती।। सरकार एक तरफ स्वच्छ भारत मिशन के विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती जिले का सल्टौआ विकास खंड इस मिशन की धज्जियां उड़ाने का ‘मॉडल’ बन गया है। ब्लॉक मुख्यालय परिसर में स्थित शौचालय अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। गंदगी का अंबार और सड़ांध मारती दीवारें न केवल कर्मचारियों और ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम की पोल भी खोल रही हैं।
💫लाखों का बजट आखिर गया कहाँ?
स्वच्छता मद में हर साल लाखों रुपये खर्च करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सल्टौआ ब्लॉक की हकीकत इन दावों के चेहरे पर कालिख पोत रही है। खंड विकास अधिकारी (BDO) अनिल कुमार यादव, जो खुद विकास कार्यों की कमान संभालते हैं, वे अपने ही नाक के नीचे फैली इस गंदगी से अनजान बने हुए हैं। यह स्थिति एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि आखिर स्वच्छता के नाम पर आने वाला सरकारी धन किसकी जेबों की शोभा बढ़ा रहा है?
💫सोशल मीडिया पर ‘विकास’, जमीन पर ‘विनाश’
अक्सर देखा जाता है कि अधिकारी सोशल मीडिया पर विकास कार्यों की चमचमाती तस्वीरें साझा कर वाहवाही लूटने में व्यस्त रहते हैं। लेकिन सल्टौआ ब्लॉक का यह शौचालय उस डिजिटल चमक के पीछे का असली और बदसूरत चेहरा है। शौचालय की यह दुर्दशा यह साबित करने के लिए काफी है कि स्वच्छता के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
💫बीमारियों का खुला न्योता
ब्लॉक परिसर में रोजाना सैकड़ों लोग अपने कार्यों के लिए आते हैं। गंदगी से भरे इस शौचालय से उठती दुर्गंध संक्रामक बीमारियों को खुला आमंत्रण दे रही है। ताज्जुब की बात यह है कि दूसरों को सफाई का पाठ पढ़ाने वाला विभाग खुद गंदगी के साये में काम कर रहा है।
बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इस घोर लापरवाही पर संज्ञान लेंगे? या फिर स्वच्छता के नाम पर “कागजी घोड़े” दौड़ाने का यह खेल यूं ही अनवरत जारी रहेगा?















