
सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *सरसों उपार्जन में मंडी गेट से लेकर उपार्जन तक की संपूर्ण प्रक्रिया वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की जाए, पंजीयन की सत्यापन की कार्यवाही पूरी पारदर्शिता के साथ हो, मंडी के अधिकारी राजस्व अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें एवं उपार्जन केंद्रों पर सभी मूलभूत सुविधाओं उपलब्ध कराए। उक्त निर्देश अपर प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड अनुराग सक्सेना ने सागर में सरसों की भावांतर योजना की तैयारी के संबंध में आयोजित कार्यशाला एवं समीक्षा बैठक में दिए। इस अवसर पर श्री रोहिणी प्रसाद चक्रवर्ती संयुक्त संचालक मंडी बोर्ड श्री प्रभाकर राव मौर्य कार्यपालन यंत्री तकनीकी संभाग सहित संभाग की सभी मंडियों के सचिव कर्मचारी मौजूद थे।
अपर प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड अनुराग सक्सेना ने कहा कि भावांतर योजना अंतर्गत सागर संभाग की 36 उपज मंडियों में 23 मार्च से सरसों का उपार्जन शुरू होगा। योजना में लाभ प्राप्त करने हेतु मुख्य मंडी प्रांगण में ही सरसों विक्रय करना अनिवार्य होगा। पंजीयन के पते के आधार पर समान जिले की मंडी समिति के मुख्य मंडी प्रांगण में ही विक्रय करना अनिवार्य होगा। उप मंडी प्रांगण में विक्रय पर योजना का लाभ प्राप्त नहीं होगा। सक्सेना ने कहा कि एमपी फार्मगेट एप / सौदा पत्रक के माध्यम से विक्रय पर योजना का लाभ प्राप्त नहीं होगा। भावांतर योजना अंतर्गत रबी वर्ष 2025-26 में राज्य की सरसों फसल हेतु राज्य स्तरीय औसत उत्पाकदता को प्रदेश के समस्त जिलों की उत्पादकता 13.22 क्विंटल / हेक्टेयर के रूप में मान्य किया जाएगा। केवल नए सरसों पर ही भावांतर लाभ देय होगा। प्रवेश के समय गेट पर तैनात मंडी कर्मचारी, सरसों नया है? इसकी पुष्टि प्रवेश के समय कृषक से पूछताछ एवं भौतिक परीक्षण द्वारा की जाए। पुराना सरसों पाए जाने पर उसकी प्रवेश पर्ची भावांतर योजना में जारी न करते हुए गैर भावांतर श्रेणी में जारी की जाएगी।
नीलामी के समय मंडी कर्मचारियों एवं नीलामी में भाग लेने वाले व्यापारियों दवारा यह सुनिश्चित किया जाए कि पुराना सरसों किसी भी स्थिति में भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत नीलाम न हो। उन्होंने कहा कि दिनांक 01 मार्च 2026 से 22 मार्च 2026 के मध्य कृषक द्वारा, मंडी में सरसों का विक्रय किया गया है तो भावांतर भुगतान हेतु उस कृषक की कुल पात्रता सीमा में से विक्रय की गई मात्रा घटाकर शेष मात्रा ही भावांतर भुगतान हेतु पात्र होगी। कृषक / निकटतम रक्त-संबंधी / पंजीकृत नॉमिनी द्वारा ही विक्रय किया जाय कृषक का आधार नंबर प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा निकटतम रक्त-संबंधी / पंजीकृत नॉमिनी को वैध सरकारी पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। ई-उपार्जन पोर्टल एवं ई-मंडी पोर्टल के integration से कृषक पंजीयन की जानकारी ई-मंडी पोर्टल पर प्राप्त होगी। ई-मंडी पोर्टल से generated प्रवेश पर्ची, अनुबंध पत्रक, तौल पर्ची, भुगतान पत्रक पर कृषक पंजीयन क्रमांक अंकित होगा। किसी भी प्रकार की Manual पर्ची जारी नहीं की जाएगी। व्यापारी द्वारा कृषक को विक्रय मूल्य का अनिवार्यतः ई-भुगतान किया जाएगा। मंडी प्रांगण में संपन्न विक्रय संव्यवहार ई-मंडी पोर्टल पर Real Time में दर्ज होगा। योजना का लाभ केवल मंडी प्रांगण में विक्रय पर ही प्राप्त होगा, उप मंडी प्रांगण में विक्रय / एमपी फार्मगेट एप के माध्यम से विक्रय करने पर योजना का लाभ प्राप्त नहीं होगा। पंजीकृत कृषक का आधार नंबर प्राप्त किया जाएगा। आधार नंबर दर्ज करने पर संबंधित पंजीकृत कृषक का पूर्ण पंजीयन रिकॉर्ड Auto Fetch होगा। कृषक के एक से अधिक पंजीयन होने की स्थिति में सभी पंजीयन क्रमांक उपलंध होंगे जिसमें से कृषक के बताए अनुसार एक पंजीयन क्रमांक चयन किया जाएगा। प्रवेश पर्ची में वाहन क्रमांक अनिवार्यतः दर्ज किया जाएगा। प्रवेश गेट पर सरसों के प्रत्येक कृषक (भावांतर योजना में पंजीकृत एवं गैर-पंजीकृत दोनों प्रकार के कृषक), कृषि उपज के वाहन एवं कृषि उपज का फोटो अनिवार्यतः लिया जाएगा। इसके लिए प्रवेश गेट पर CCTV कैमरा एवं वीडियो कैमरा अनिवार्य स्थापित किया जाए। मंडी के प्रवेश द्वारा पर प्रवेश पत्र जारी करने हेतु मंडी समिति के स्थायी कर्मचारी (ASI, लिपिक) प्रशिक्षित कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रवेश पत्र केवल कंप्यूटर सिस्टम से ही जारी होगा अतः प्रवेश द्वार पर प्रिंटर/इंटरनेट सहित कम्प्यूटर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अनुराग सक्सेना ने कहा किपंजीकृत कृषक एवं गैर पंजीकृत कृषक में किसी प्रकार का भेद नहीं किया जाएगा। अर्थात, नीलामी शेड में पंजीकृत कृषक एवं गैर पंजीकृत कृषक एक ही साथ अपने प्रवेश क्रमांक के अनुसार प्रवेश करेंगे और अपना वाहन निश्चित स्थान पर लगाएंगे। नीलामी में पंजीकृत कृषक एवं गैर पंजीकृत कृषक में किसी प्रकार का विभेद नहीं किया जाएगा। नीलामी प्रक्रिया का वीडियो कैमरे एवं सीसीटीवी से यथानिर्देशित निगरानी सुनिश्चित करना होगा। नीलामी में भाव तय होने एवं तौल उपरांत संबंधित क्रेता व्यापारी से भुगतान पत्रक की समान दिवस में प्रविष्टि तथा पंजीकृत बैंक खाते में ऑनलाइन मोड (ऑनलाइन / डिजिटल / RTGS NEFT भुगतान) में संपूर्ण भुगतान; इन दोनों अनिवार्यताओं को सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने निर्देश दिए की मंडी प्रांगण में साफ-सफाई व्यवस्था एवं आवश्यक कृषक सुविधाएं दुरुस्त रखी जाना। प्रवेश गेट पर, नोटिस बोर्ड पर एवं डिजिटल बोर्ड के माध्यम से प्रतिदिन का मोडल रेट डिस्प्ले किया जाना। हेल्प डेस्क निरंतर संचालित रखी जाना और योजना के संबंध में कृषकों की हर संभव सहायता की जाना। योजना के प्रचार-प्रसार के संबंध में समय-समय पर जारी निर्देशों अनुसार कार्यवाही करना। कंट्रोल रूम संचालित रखना। शिकायतों का 24 घंटे की अवधि में निराकरण सुनिश्चित करना।मंडी में मॉइश्चर मीटर एवं अन्य ग्रेडिंग उपकरण चालू अवस्था में रखे जाए। नीलामी प्रक्रिया के दौरान नीलामीकर्ता कर्मचारी अनुभव के आधार पर कृषि उपज की गुणवत्ता के संबंध में निर्णय लेंगे और e-Mandi पोर्टल में नीलामी स्क्रीन पर कृषि उपज FAQ है अथवा Non-FAQ है, इसको स्पष्ट रूप से दर्ज करेंगे।
FAQ सैंपल रखने के संबंध में निर्देश अनुसार कार्यवाही संपादित करना होगा। कृषक द्वारा पंजीयन की कॉपी दिखाने/पूछने पर पंजीयन क्रमांक का प्रवेश पर्ची केवल कंप्यूटर सिस्टम से जारी जारी की जायेगी, POS मशीन से नहीं। सरसों भावांतर में किसान का English नाम प्रदर्शित होगा। तौल पत्रक पर सरसों के अनुबंध अनुसार दर एवं वास्तविक मात्रा 2 बार दर्ज की जाएगी इसके उपरांत पोर्टल पर कोई भी संशोधन मान्य नहीं होगा सरसों भावांतर योजना अंतर्गत सभी मंडियों के गेट पर आधुनिक कैमरे लगाये जा रहे है, जिनका Integration पोर्टल पर किया जाएगा एवं उसकी Real Time फोटो दर्ज कर पंजीयन कर रिकार्ड संधारण किया जाएगा। किसान द्वारा सरसों को भावांतर योजना में विक्रय करने पर वव्यापारी द्वारा ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा। सक्सेना ने बताया कि दिनांक 23 मार्च 2026 से 14 दिवस तक यह मोडल रेट समस्त प्रदेश में प्रभावशील होगा। उसके उपरांत सरसों विक्रय की दिनांक से पहले 14 दिनों की अवधि में, प्रदेश की समस्त मंडियों में सरसों के विक्रय मूल्य का Weighted Average मानकर प्रतिदिन मोडल रेट का निर्धारण किया जाएगा। सीमावर्ती जिलों में राजस्व विभाग / जिला प्रशासन के स्तर से प्रदेश में आवक की निगरानी सुनिश्चित कराई जाए। आंचलिक कार्यालय स्तर पर कंट्रोल रूम (प्रातः 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक) का संचालन किया जाए। संयुक्त संचालक मंडी बोर्ड सागर संभाग रोहिणी प्रसाद चक्रवर्ती ने बताया की सरसों का उत्पादन 23 मार्च से 30 मई तक किया जाएगा जिसमें संभाग के 19165 से अधिक किसान भाई अपनी सरसों का उपार्जन कर सकेंगे उन्होंने बताया कि सरसों का रखवा 92857 हेक्टेयर है जिसमें अनुमानित उत्पादन 5 लाख 48000 मी टन है जबकि उपार्जन अनुमानित 108000 मीट्रिक टन है।


