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राजस्व निरीक्षक खुद के आदेश का पालन करने में नाकाम, 8 माह से टिकुलिया जांच लंबित — पखवाड़े में भी बढ़ी लापरवाही


बलौदाबाजार।
जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा राजस्व पखवाड़ा के नाम पर शिविर लगाकर त्वरित निराकरण का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। भाटापारा तहसील के अंतर्गत सामने आए एक मामले ने विभागीय लापरवाही और अव्यवस्था की पोल खोल दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम टिकुलिया (पटवारी हल्का नंबर 12, राजस्व निरीक्षक मंडल खोखली) में लंबित जांच का मामला पिछले लगभग 8 महीनों से अटका हुआ है। इसी क्रम में राजस्व निरीक्षक पवन कुमार पालेश्वर द्वारा दिनांक 25 मार्च 2026 को एक सूचना जारी कर 2 अप्रैल 2026 को मौके पर नाप-जोख के लिए आवेदकों एवं आसपास के ग्रामीणों को उपस्थित रहने को कहा गया था।
ग्रामीणों और आवेदकों के अनुसार, उन्होंने 1 अप्रैल की शाम को संबंधित पटवारी और राजस्व निरीक्षक से संपर्क किया, जिस पर दोनों ने अगले दिन सुबह 10 बजे तक मौके पर पहुंचने की सहमति दी। लेकिन 2 अप्रैल को निर्धारित समय बीतने के बाद भी राजस्व निरीक्षक मौके पर नहीं पहुंचे। जब 11 बजे के बाद संपर्क किया गया, तो उन्होंने आने में असमर्थता जताते हुए आवेदकों को एसडीएम से बात करने की सलाह दे दी।
इस घटनाक्रम से नाराज ग्रामीणों ने बताया कि वे अपने दैनिक कार्य छोड़कर, छुट्टी लेकर सुबह से मौके पर उपस्थित रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी के नहीं पहुंचने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। पटवारी मौके पर पहुंचे जरूर, लेकिन राजस्व निरीक्षक के अनुपस्थित रहने के कारण वे भी बिना कार्यवाही के लौट गए।
अब सवाल यह उठता है कि यदि पहले से निर्धारित तिथि पर अधिकारी ही उपस्थित नहीं हो सकते, तो जारी किए गए आदेशों और सूचनाओं का क्या महत्व रह जाता है? क्या राजस्व पखवाड़ा की व्यस्तता के कारण पुराने मामलों को नजरअंदाज किया जा रहा है, या फिर टिकुलिया की जांच जानबूझकर टाली जा रही है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब एसडीएम भाटापारा श्याम पटेल और तहसीलदार यशवंत राज से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो दोनों अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया। वहीं राजस्व निरीक्षक ने सीधे तौर पर एसडीएम से बात करने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एक तरफ राजस्व पखवाड़ा के माध्यम से त्वरित समाधान का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पहले से लंबित मामलों में लापरवाही और टालमटोल का रवैया जारी है।
अब देखना होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद प्रशासन इस मामले में क्या संज्ञान लेता है और टिकुलिया की लंबित जांच को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, ग्रामीणों की परेशानी जस की तस बनी हुई है और न्याय की उम्मीद अधूरी।

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