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राष्ट्रीय सनसनी: 707.35 करोड की चर्च-संपत्ति और धार्मिक न्यास के नाम पर 329 बीघा भूमि और ₹215 करोड़ के अनुबंध में कथित फर्जी संस्था, कूटरचित दस्तावेज़ और भू-माफिया नेटवर्क का पर्दाफाश

अशोक बोड़वाल, रजनीश मैथ्यू और आजम की निर्णायक भूमिका, न्यासी बहुमत निर्णय प्रक्रिया और चरणबद्ध भुगतान प्रणाली का खुलासा

🔴🚨 *राष्ट्रीय सनसनी: 707.35 करोड की चर्च-संपत्ति और धार्मिक न्यास के नाम पर 329 बीघा भूमि और ₹215 करोड़ के अनुबंध में कथित फर्जी संस्था, कूटरचित दस्तावेज़ और भू-माफिया नेटवर्क का पर्दाफाश – अशोक बोड़वाल, रजनीश मैथ्यू और आजम की निर्णायक भूमिका, न्यासी बहुमत निर्णय प्रक्रिया और चरणबद्ध भुगतान प्रणाली का खुलासा*

*रिपोर्ट: अलिक सिंह | सम्पादक – वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़ समृद्ध भारत समाचार पत्र *|
संपर्क: 8217554083

सहारनपुर/न्यू दिल्ली –
उत्तर भारत के प्रशासनिक-न्यायिक केंद्र नई दिल्ली और लखनऊ में सार्वजनिक अभिलेख, नोटरी सत्यापन दस्तावेज़, 2014-15 के शपथ-पत्र और न्यायिक रिकॉर्ड्स की गहन पड़ताल से सामने आया है कि चर्च-संबद्ध धार्मिक न्यासीय ढांचे के अंतर्गत 329 बीघा भूमि और ₹215 करोड़ के उच्च मूल्य वाले विक्रय-क्रय अनुबंध में कई विवादास्पद बिंदु हैं, जिनमें फर्जी संस्था और कूटरचित दस्तावेज़ के उपयोग की संभावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इस मामले में सबसे प्रमुख और राष्ट्रीय चर्चा योग्य नाम सामने आए हैं – अशोक बोड़वाल, विक्रेता पक्ष का निर्णायक हक़धारी और अनुबंध का मुख्य सूत्रधार; रजनीश मैथ्यू, जिनके शपथीय प्रावधान और विदेशी प्राधिकरण असंबद्धता ने अनुबंध की तकनीकी जटिलता बढ़ाई; और आजम, जो कथित रूप से फर्जी संस्था और कूटरचित दस्तावेज़ के पीछे का प्रमुख कनेक्शन और साजिशकर्ता बताया जा रहा है। अनुबंध की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि संपत्ति के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण, क्रय-विक्रय या निपटान के लिए न्यासी मंडल का दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है, जिससे संभावित भू-माफिया नेटवर्क और प्रशासनिक गठजोड़ के लिए नियंत्रण तंत्र मजबूत और कानूनी रूप से सुरक्षित रहता है।

329 बीघा भूमि उत्तरी दिल्ली के धीरपुर-बुराड़ी क्षेत्र में स्थित है, और अनुबंध में कुल राशि ₹215 करोड़ अंकित है, जिसे तीन चरणों में भुगतान किया जाना था: पहला बयाना ₹2.15 करोड़, दूसरा ₹100 करोड़ 20 फरवरी 2025 तक, और तीसरा ₹100 करोड़ भूमि-शीर्षक भारमुक्त होने पर। इस विशाल राशि और भूमि का नियंत्रण केवल न्यासी बहुमत निर्णय, चरणबद्ध भुगतान और शपथीय प्रावधानों के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जा सकता है। भू-माफिया नेटवर्क के संकेत अनुबंध की तकनीकी जटिलताओं में स्पष्ट हैं – फर्जी संस्था और कूटरचित दस्तावेज़ का उपयोग, चरणबद्ध भुगतान संरचना, शीर्षक सत्यापन प्रक्रिया, न्यासी मंडल का दो-तिहाई बहुमत अनिवार्यता और न्यायिक आदेश पर शपथीय उपस्थिति।

विशेष रूप से 2014 में विचाराधीन प्रकरण (मु०अ०सं० 272/2014, थाना हजरतगंज, लखनऊ) में रजनीश मैथ्यू ने 27 नवंबर 2015 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रस्तुत शपथ-पत्र में स्पष्ट किया कि वह चर्च ऑफ़ इंडिया न्यास संरचना के सदस्य या पदाधिकारी नहीं हैं और उन्हें किसी भी विदेशी या क्षेत्रीय दस्तावेज़ निर्गमन का अधिकार नहीं है। यह तथ्य विदेशी प्राधिकरण असंबद्धता का प्रमाण है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्च-संपत्ति मामलों में संभावित फ्रॉड और न्यासी गड़बड़ी के सन्दर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस शपथ-पत्र ने अनुबंध में फर्जी संस्था और कूटरचित दस्तावेज़ की संभावना को और मजबूत किया। शपथ-पत्र की कुछ धारा कम पठनीय पाई गई, जिसे रिपोर्ट में केवल अभिलेखीय तथ्य के रूप में शामिल किया गया है।

अनुबंध और हलफनामे की विस्तृत समीक्षा से पता चलता है कि अशोक बोड़वाल और आजम ने मिलकर फर्जी संस्था और कूटरचित दस्तावेज़ के माध्यम से संपत्ति और धनराशि पर नियंत्रण का जटिल तंत्र बनाया। इसमें शामिल हैं: बयाना राशि का दोगुनी वापसी प्रावधान, चरणबद्ध भुगतान प्रणाली, शीर्षक सत्यापन और न्यासी बहुमत प्रक्रिया। भू-माफिया नेटवर्क के संकेत स्पष्ट हैं – फर्जी संस्था के दस्तावेज़, अनुबंध के तकनीकी प्रावधान, न्यासी बहुमत निर्णय, रजनीश मैथ्यू के शपथीय प्रावधान और विशाल धनराशि का राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा योग्य होना।

न्यासीय ढांचे में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि संपत्ति के किसी भी प्रकार के क्रय-विक्रय, हस्तांतरण या निपटान के लिए न्यासी मंडल का दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है। न्यासी मंडल की बैठकें क्रमबद्ध प्रक्रिया के अनुसार आयोजित होती हैं – प्रस्ताव पंजीकृत होते हैं, दस्तावेज़ों की समीक्षा होती है, बहुमत निर्णय लिया जाता है और शपथीय उपस्थिति के साथ न्यायिक आदेश की पुष्टि की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता का उदाहरण है, बल्कि संभावित भू-माफिया खेल और फ्रॉड की निगरानी का राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण संकेत देती है।

329 बीघा भूमि के स्थल विवरण, भुगतान संरचना और न्यासी बहुमत प्रक्रिया इतनी जटिल बनाई गई कि केवल प्रशासनिक और न्यायिक निगरानी के माध्यम से ही विवाद सुलझाया जा सकता है। पहला बयाना ₹2.15 करोड़, दूसरा ₹100 करोड़, तीसरा ₹100 करोड़ भूमि-शीर्षक मिलने पर। यदि विक्रेता अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करता, तो बयाना राशि दोगुनी लौटाई जाती है, और यदि क्रेता पीछे हटे तो अग्रिम धन राशि समायोजित की जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अनुबंध और शपथीय प्रावधानों की समीक्षा से यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में किसी भी विवाद या जांच के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रशासनिक निगरानी आवश्यक होगी। अनुबंध और हलफनामे में उल्लिखित प्रावधान उच्च मूल्य संपत्ति, न्यासीय निर्णय बहुमत और शपथीय उपस्थिति के माध्यम से संभावित भू-माफिया खेल और फर्जी संस्था के संकेत को उजागर करते हैं।

भू-माफिया संकेतों में शामिल हैं: फर्जी दस्तावेज़, चरणबद्ध भुगतान संरचना, न्यासी बहुमत निर्णय, शीर्षक सत्यापन की जटिलता, न्यायिक आदेश पर उपस्थिति और विशाल धनराशि का राष्ट्रीय चर्चा योग्य होना। अशोक बोड़वाल विक्रेता पक्ष का प्रमुख नाम है, जिसे भूमि हस्तांतरण और न्यासी बहुमत प्रक्रिया में निर्णायक प्रभाव माना जा रहा है। रजनीश मैथ्यू शपथीय प्रावधान और विदेशी प्राधिकरण असंबद्धता के माध्यम से अनुबंध में अप्रत्यक्ष भूमिका निभा रहे हैं। आजम कथित रूप से फर्जी संस्था और कूटरचित दस्तावेज़ के लिए जिम्मेदार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि और भूमि केवल तकनीकी शर्तों और न्यासी बहुमत नियमों से संचालित होती है, जिससे भू-माफिया तंत्र और बाहरी दबाव की संभावनाएँ हमेशा बनी रहती हैं। इस विस्तृत करार और शपथ-पत्र का विश्लेषण दर्शाता है कि धार्मिक न्यास, विशाल भूमि और आर्थिक अनुबंध राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण हैं।

कॉलआउट: मुख्य तथ्य – भूमि मापन: 329 बीघा, कुल राशि: ₹215 करोड़, तीन स्तरों में भुगतान; विक्रेता पक्ष: अशोक बोड़वाल, कागर सिंह; क्रेता पक्ष: मोहम्मद खालिद, अब्दुल लतीफ़; न्यासीय निर्णय: दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य; शपथीय प्रावधान: न्यायिक आदेश पर उपस्थिति; विचाराधीन प्रकरण: मु०अ०सं० 272/2014, थाना-हजरतगंज; कथित फ्रॉड और फर्जी संस्था: अशोक बोड़वाल, रजनीश मैथ्यू और आजम; भू-माफिया नेटवर्क के संकेत: फर्जी दस्तावेज़, चरणबद्ध भुगतान, बहुमत निर्णय, शीर्षक सत्यापन। *”खसरा संख्या 389, 390, 391, धीरपुर-बुराड़ी, निरंकारी सरोवर के निकट, कोरोनेशन पार्क, दिल्ली-110084, कुल माप लगभग 329 बीघा*

यह सुपर-एक्सक्लूसिव रिपोर्ट सभी तथ्य अभिलेखीय, तटस्थ और आरोप-रहित रूप में प्रस्तुत करती है। किसी भी व्यक्ति या संस्था को अवैध या फर्जी घोषित नहीं किया गया। यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्च-संपत्ति, भू-माफिया नेटवर्क और फर्जी संस्था के संभावित खेल के संदर्भ में पाठकों को सूचित और जागरूक करती है।

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