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अनुसूचित जाति के व्यक्ति को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध झूठे मुकदमे लिखना पुलिस को मंहगा पड़ा

जांच में दोषी 33 पुलिस अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध हाई कोर्ट इलाहाबाद ने 22 जनवरी 2026 को पुनः

बिग ब्रेकिंग न्यूज़
27 जनवरी 2026
अनुसूचित जाति के व्यक्ति को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध झूठे मुकदमे लिखना पुलिस को मंहगा पड़ा , जांच में दोषी 33 पुलिस अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध हाई कोर्ट इलाहाबाद ने 22 जनवरी 2026 को पुनः दिया सीबीआई से जांच करने का बड़ा आदेश🙏🏾
33 पुलिस अधिकारियो को सीबीआई की जांच की आंच से बचाने की राज्य सरकार की SLP भी सुप्रीम कोर्ट में हो चुकी है खारिज🙏🏾
2022 में सीबीआई जांच का आदेश देने वाले न्यायमूर्तियों के सेवानिवृत्त होने के बाद राज्य सरकार द्वारा हाई कोर्ट में दाखिल की गई सीबीआई जांच की रिकॉल एप्लीकेशन, 22 जनवरी 2026 को सीबीआई जांच के आदेश की रीकॉल याचिका भी हो चुकी है खारिज🙏🏾
हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, एक सप्ताह के भीतर केस जांच हेतु सीबीआई को ना सौंपने पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को 30 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट में होना पड़ेगा व्यक्ति गत रूप से उपस्थित🙏🏾
15 अक्टूबर 2017 को जिला चिकित्सालय मथुरा से मोटर साइकिल चोरी के आरोप में दो अनुसूचित जाति के अभियुक्त दिखाकर दर्ज केस में उन के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल कर दिया , एक आरोपी का घटना वाले दिन किसी अन्य मामले में कारागार में निरुद्ध रहना बना पुलिस के गले की सबसे बड़ी फांस ,🙏🏾
पीड़ित के पैरोकार सिपाही भाई के विरुद्ध जांच मे दोषी एसओजी प्रभारी ने शादी शुदा औरत से पोक्सो का झूठा मुकदमा लिखवाकर पूरे परिवार का किया उत्पीड़न🙏🏾
सम्मानित साथियों 🙏🏾
आजकल भारत में संविधान ,आरक्षण और एससी एसटी एक्ट एवं यूजीसी के नए नियम के विरुद्ध कुछ लोगों ने अभियान छेड़ रखा है जबकि संवैधानिक रूप से मजबूत कानून होने के बावजूद अनुसूचित जाति के लोगों का उत्पीड़न कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।
मथुरा जनपद का यह जीता जागता उदाहरण है जिसमें रक्षक कहे जाने वाले पुलिस अधिकारी कर्मचारी अनुसूचित जाति के एक परिवार पर कहर बनकर टूट पड़े । मामला 17 अक्टूबर 2017 का है एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति को पुलिस की एसओजी टीम ने गिरफ्तार किया था और उससे छोड़ने के नाम पर रिश्वत मांगी ,वह दे ना सका तो उसके विरुद्ध पांच झूठे मुकदमे दर्ज कर उसे जेल में डाल दिया उसके भाई ने थाने पर अपहरण की तहरीर दी परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई एससी एसटी आयोग के हस्तक्षेप से प्रकरण की जांच अपर पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच लखनऊ को सौंप दी गई ,जांच में 33 पुलिस अधिकारी कर्मचारी दोषी पाए गए जिसमें एक आईपीएस ,3,पीपीएस, इंस्पेक्टर ,सब इंस्पेक्टर, एवं सिपाही रैंक के लोक सेवक जांच में दोषी पाए गए । पुलिस अधिकारियो एवं कर्मचारियों ने स्वयं को फंसता देख पीड़ित के पैरोकार सिपाही भाई दीपेंद्र कुमार के विरुद्ध तत्कालीन एसओजी प्रभारी हरेंद्र मिश्रा मथुरा ने फिरोजाबाद जनपद में एक शादीशुदा महिला से पॉक्सो एक्ट का केस रजिस्टर्ड करा दिया , मामला 2022 में हाईकोर्ट गया और माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में पोक्सो के केस पर नो कर्सिव एक्शन का आदेश पारित किया और पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने के आदेश पारित कर दिए परंतु राज्य सरकार ने मा उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किया । राज्य सरकार ने मा उच्च न्यायालय के सीबीआई से जांच करने के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की परंतु सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की सीबीआई से जांच कराने के आदेश के विरुद्ध दाखिल एसएलपी खारिज कर दी ।इसके बाद राज्य सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश देने वाले न्याय मूर्तियों के सेवानिवृत होने के बाद मां उच्च न्यायालय में सीबीआई जांच के आदेश को रिकॉल करने की एप्लीकेशन दाखिल की जिसे 22 जनवरी 2026 को माननीय उच्च न्यायालय ने खारिज करके प्रमुख सचिव गृह को आदेश दिए कि वह एक सप्ताह के अंदर इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंप कर 30 जनवरी से पूर्व हाई कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल करे यदि हाई कोर्ट का आदेश पालन करने में प्रमुख सचिव गृह विफल रहते हैं तो वह व्यक्तिगत रूप से माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में 30 जनवरी 2026 को सुनवाई के समय उपस्थित रहे ।यह घटना उत्तर प्रदेश में कानून एवं संविधान के राज की बानगी मात्र है ।एक तरफ राज्य सरकार की जांच में 33 पुलिस अधिकारी कर्मचारी दोषी पाए जाते है ।पीड़ित अपनी मां को गवां बैठे । दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय दोषी अधिकारी शादी शुदा औरत से अपहरण एवं पोक्सो एक्ट में झूठे मुकदमे लिखवा कर , परिवार का उत्पीड़न कर रहे है ,सरकार और उच्चाधिकारी चुप रहते है,और जब हाई कोर्ट सीबीआई जांच के आदेश देते है तो राज्य सरकार केस को सीबीआई को सौंपने के बजाय दोषियों को सीबीआई जांच की आंच से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ,हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाती है ।परंतु जांच में दोषी पाए गए पुलिस कर्मचारी अधिकारी कानून के राज से भय मुक्त होकर मजे से अपनी ड्यूटी कर नए शिकार की तलाश कर रहे है।जांच में दोषी पाए गए 33 पुलिस वालो में मथुरा आगरा और फिरोजाबाद में तैनात रहे लोकसेवक शामिल है , हालांकि मा उच्च न्यायालय इलाहाबाद के कड़े रुख के बाद न्याय की किरण दिखाई पड़ी है । यदि CBI जांच इस प्रकरण में निष्पक्ष होती है तो पुलिस के पांच राजपत्रित अधिकारियों सहित 33 लोक सेवकों के विरुद्ध कार्रवाई तय है ।
राजकुमार एडवोकेट संयोजक संविधान बचाओ ट्रस्ट 9152095833

 

✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह | संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ | ब्यूरो चीफ – हलचल इंडिया न्यूज़, सहारनपुर | 📞 खबर, विज्ञापन व सूचना हेतु संपर्क: 8217554083

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