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आयुष विभाग में ‘फाइलों का खेल’ या भ्रष्टाचार की बेल? कल जो जमीन ‘सोना’ थी, आज ‘मिट्टी’ कैसे हो गई?

बस्ती आयुष विभाग में 'फाइलों का खेल': कल जो जमीन 'सोना' थी, आज 'मिट्टी' कैसे हो गई? साहब का 'यू-टर्न': खुद की ही रिपोर्ट पर थूका, क्या 'सुविधा शुल्क' के आगे नतमस्तक हुआ सिस्टम?

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता ‘आयुष ड्रीम प्रोजेक्ट’।।‌ कल तक जो जमीन कॉलेज के लिए ‘सोना’ थी, अधिकारियों ने उसे रातों-रात ‘मिट्टी’ कैसे बना दिया?

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

  • आयुष विभाग का ‘अजब खेल’: कमरे में बैठकर तय हो गई मेडिकल कॉलेज की किस्मत, आईजीआरएस बना खिलवाड़! योगी सरकार की साख पर बट्टा: जब रक्षक ही बन गए भक्षक, आयुष विभाग में ‘कमीशन’ का ग्रहण?
  • पूर्व विधायक की चिट्ठी से हड़कंप: मुख्यमंत्री की चौखट पर पहुँचा आयुष विभाग का ‘कथित जमीन घोटाला’। भ्रष्टाचार की ‘जड़ी-बूटी’: डॉ. जगदीश और कर्मचारी विकास सिंह पर गंभीर आरोप, डीएम से उच्च स्तरीय जांच की मांग।
  • कोल्ड वार: मनोज सिंह का सीधा वार—”न्यायालय में बेनकाब होंगे भ्रष्ट अधिकारी, फाइलों में दबने नहीं दूंगा सच।” भ्रष्टाचार का ‘इंटीग्रेटेड’ मॉडल: बस्ती आयुष विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
  • कागजी घोड़े और अंधा तंत्र: लोढ़वा-नथवापुर की जमीन पर क्यों बदली अधिकारियों की नीयत? ‘कमाई का जरिया’ बनी सरकारी योजनाएं, जनता और सरकार दोनों के साथ बड़ा धोखा।

बस्ती। प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ जहाँ सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने के लिए ‘इंटीग्रेटेड मेडिकल कॉलेज’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं बस्ती जिले के आयुष विभाग में बैठे कुछ “कलम के सौदागर” सरकार की मंशा को पलीता लगाने में जुटे हैं। भानपुर तहसील के ग्रामसभा लोढ़वा और नथवापुर में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज अब विभागीय भ्रष्टाचार और अधिकारियों के संदिग्ध ‘यू-टर्न’ की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।सरकारी सिस्टम में बैठे ‘कलम के सौदागरों’ ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं को ठेंगे पर रख दिया है। आयुष विभाग में चल रहा ताजा विवाद महज एक शिकायत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित “सरकारी यू-टर्न” का जीवंत उदाहरण है। भानपुर बाबू निवासी मनोज सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों ने विभाग की साख को तार-तार कर दिया है। सवाल सीधा है—क्या चंद रुपयों की खनक ने अधिकारियों की अपनी ही पुरानी रिपोर्ट को झूठा साबित कर दिया?

क्या है पूरा मामला? ‘सुविधा शुल्क’ या प्रशासनिक अक्षमता?

भानपुर बाबू निवासी मनोज सिंह ने क्षेत्रीय आयुष अधिकारी डॉ. जगदीश यादव और आईजीआरएस पटल के कर्मचारी विकास सिंह पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मनोज सिंह का दावा है कि इन दोनों की मिलीभगत से विभागीय कार्यप्रणाली को “कमाई का अड्डा” बना दिया गया है।

सबसे बड़ा सवाल उन अधिकारियों की विश्वसनीयता पर है, जिन्होंने कुछ समय पहले खुद मौके का स्थलीय निरीक्षण कर प्रस्तावित जमीन को मेडिकल कॉलेज के लिए ‘सर्वथा उपयुक्त’ बताया था। लेकिन अब अचानक, बिना किसी ठोस कारण के, वही अधिकारी अपनी ही पिछली रिपोर्ट को झुठलाते हुए जमीन को अनुपयुक्त बता रहे हैं।

तीखा सवाल: आखिर वह कौन सी “अदृश्य शक्ति” या “डील” थी, जिसने अधिकारियों के चश्मे का नंबर बदल दिया? जो जमीन कल तक कॉलेज के लिए बेहतर थी, वह आज अचानक गलत कैसे हो गई?

खुद की ही रिपोर्ट पर थूका: आखिर किसके दबाव में बदला ‘ईमान’?

मामला भानपुर तहसील के ग्रामसभा लोढ़वा और नथवापुर का है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिन अधिकारियों ने खुद मौके की जमीन का सर्वे कर उसे इंटीग्रेटेड मेडिकल कॉलेज के लिए ‘उपयुक्त’ बताते हुए संस्तुति की मुहर लगाई थी, वही अधिकारी अब अपनी ही रिपोर्ट से पलट गए हैं। क्षेत्रीय आयुष अधिकारी डॉ. जगदीश यादव और आईजीआरएस पटल पर तैनात कर्मचारी विकास सिंह पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर ‘सुविधा शुल्क’ लेकर अपनी कलम का रुख ही बदल दिया।

आईजीआरएस बना ‘कागजी खानापूर्ति’ का जरिया

आरोप है कि जैसे ही इस जमीन के संबंध में आईजीआरएस (IGRS) पर कोई शिकायत आती है, जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी बिना मौके पर जाए, बंद कमरों में बैठकर मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार कर देते हैं। मनोज सिंह के अनुसार, आईजीआरएस पटल पर तैनात विकास सिंह फाइलों को इस तरह घुमाते हैं कि जमीनी सच्चाई शासन तक पहुँच ही न पाए। यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की जनसुनवाई प्रणाली को धोखा देने जैसा है।आरोप है कि भूमि आवंटन और विभागीय मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी, आईजीआरएस पर एक शिकायत मिलते ही बिना किसी स्थलीय निरीक्षण के फाइल को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। बिना मौके पर गए रिपोर्ट लगा देना यह दर्शाता है कि विभाग में एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो सरकारी योजनाओं को जनकल्याण के बजाय “कमाई का जरिया” बना चुका है।

सियासी गलियारों में उबाल: पूर्व विधायक ने की CM से शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए रुधौली के पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने इस प्रकरण में मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जिलाधिकारी बस्ती और मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर इस पूरे खेल की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पूर्व विधायक ने पत्र में स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन और जनहित की योजनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।मामले की गंभीरता को देखते हुए रुधौली के पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने सीधे मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस पूरे ‘कथित घोटाले’ की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पूर्व विधायक के इस कदम से विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी

शिकायतकर्ता मनोज सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि इस मामले में लिप्त अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ अफसर जनता की सेवा करने के बजाय सरकार की योजनाओं को अपनी व्यक्तिगत ‘तिजोरी’ भरने का माध्यम समझ बैठे हैं।

शिकायतकर्ता मनोज सिंह का कहना है कि वह इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतिम दम तक लड़ेंगे। उन्होंने साफ चेतावनी दी है:

  • दोषियों पर सख्त कार्रवाई न होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
  • सरकार की मंशा को पलीता लगाने वाले अधिकारियों को बेनकाब किया जाएगा।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

अब देखना यह होगा कि बस्ती जिला प्रशासन इस “सुनियोजित खेल” पर पर्दा डालता है या इन ‘सफेदपोश’ भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाकर जनता का विश्वास बहाल करता है।

मुख्य बिंदु जो जांच के दायरे में हैं:

  • अधिकारियों ने अपनी ही पुरानी ‘सकारात्मक रिपोर्ट’ को किस आधार पर बदला?
  • क्या आईजीआरएस शिकायतों का निस्तारण बिना स्थलीय निरीक्षण के किया गया?
  • क्या इस पूरे प्रकरण के पीछे कोई बड़ा भू-माफिया या विभागीय सिंडिकेट काम कर रहा है?

अब गेंद शासन और जिला प्रशासन के पाले में है। क्या जिलाधिकारी इस ‘यू-टर्न’ वाली रिपोर्ट की बारीकी से जांच कराएंगे? या फिर भ्रष्टाचार के इस दलदल में फंसी फाइलें हमेशा के लिए दफन हो जाएंगी? जनता की नजरें अब कार्रवाई पर टिकी हैं।

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