
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: भ्रष्टाचार की ‘फाइल’ दबाए बैठे रामनगर BDO, क्या प्रधान के ‘खजांची’ बन गए हैं अधिकारी?
विशेष ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल
- प्रधान-अधिकारी की जुगलबंदी ने निगला ग्रामीणों का हक, क्या तेनुआ असनहरा का ‘विकास’ सिर्फ कागजों में है?
- BDO साहब! आखिर किसका डर है? 60 दिन बीते, पर नहीं खुली तेनुआ असनहरा के विकास कार्यों की फाइल।
- भ्रष्टाचार की ढाल बने BDO रामनगर! RTI कानून की धज्जियां उड़ाकर क्या ‘दागी’ प्रधान को बचा रहा है प्रशासन?
- रामनगर ब्लॉक में RTI का दम घुटा: स्मरण पत्र को भी ठेंगा, भ्रष्टाचार की चादर ओढ़कर सो रहे जिम्मेदार।
- जीरो टॉलरेंस पर तमाचा: रामनगर ब्लॉक में लूट की छूट, सूचना मांगने पर आवेदक को मिल रही सिर्फ तारीखें।
- अब जनपद की चौखट पर न्याय की गुहार: क्या प्रथम अपीलीय अधिकारी तोड़ पाएंगे रामनगर ब्लॉक का भ्रष्टाचार सिंडिकेट?
- “कागजी विकास… असली लूट!” बस्ती के तेनुआ असनहरा गाँव में 5 साल के बजट का ‘अदृश्य’ खेल, सूचना देने में कांप रहे हाथ।
बस्ती। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करती है, लेकिन बस्ती जनपद का रामनगर विकास खंड इस दावे को खुली चुनौती दे रहा है। यहाँ RTI (सूचना का अधिकार) जैसे पारदर्शी कानून को ब्लॉक अधिकारियों ने अपनी फाइलों के नीचे दफन कर दिया है। मामला ग्राम पंचायत तेनुआ असनहरा का है, जहाँ विकास के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का ऐसा खेल रचा गया है, जिसकी गूंज अब जनपद मुख्यालय तक पहुँच चुकी है।प्रदेश सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन बस्ती जनपद के रामनगर विकास खंड में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि यहाँ ‘जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005’ का खुला मजाक बनाया जा रहा है। विकास खंड रामनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत तेनुआ असनहरा में पांच वर्षों के विकास कार्यों के नाम पर हुए “कागजी खेल” को छिपाने के लिए ब्लॉक प्रशासन और ग्राम प्रधान की जुगलबंदी अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।
पाँच साल का ‘विकास’ या सरकारी धन का ‘विनाश’?
ग्राम पंचायत तेनुआ असनहरा के ग्राम प्रधान वीरेंद्र पुत्र कालीदीन के कार्यकाल (2020-2025) पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि गाँव में विकास कार्य केवल कागजों पर चमकाए गए हैं, जबकि धरातल पर स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान ने ब्लॉक के अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसा अभेद्य किला बना लिया है, जिसे भेद पाना किसी आम नागरिक के लिए नामुमकिन साबित हो रहा है।
RTI का गला घोंट रहा ब्लॉक प्रशासन
गाँव के ही एक जागरूक और निडर नागरिक सक्कू चौधरी पुत्र स्व. बुद्धू चौधरी ने जब इस ‘कागजी विकास’ की हकीकत जाननी चाही, तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।मामला ग्राम पंचायत तेनुआ असनहरा का है, जहाँ ग्राम प्रधान वीरेंद्र पुत्र कालीदीन पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2020 से 2025 के बीच बिना धरातल पर कार्य कराए सरकारी धन की जमकर लूट खसोट की है। इस महाघोटाले का पर्दाफाश करने के लिए गाँव के ही जागरूक नागरिक सक्कू चौधरी पुत्र स्व. बुद्धू चौधरी ने कमर कसी। उन्होंने 25 फरवरी 2026 को जनसूचना अधिकार के तहत BDO रामनगर को आवेदन देकर 7 बिंदुओं पर विकास कार्यों की प्रमाणित प्रतिलिपियां मांगी थीं।
- 25 फरवरी 2026: आवेदक ने RTI के तहत 7 प्रमुख बिंदुओं पर प्रमाणित दस्तावेजों की मांग की।
- नतीजा: एक महीना बीत जाने के बाद भी BDO कार्यालय से कोई जवाब नहीं मिला।
जानकारों का कहना है कि सूचना न देना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि विकास कार्यों में भारी हेराफेरी की गई है। यदि कार्य ईमानदारी से हुए होते, तो प्रशासन को दस्तावेज सार्वजनिक करने में डर कैसा?

स्मरण-पत्र को भी दिखाया ठेंगा
प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर आवेदक ने 25 मार्च 2026 को पंजीकृत डाक के माध्यम से BDO रामनगर को ‘स्मरण-पत्र’ भेजा। लेकिन सत्ता और रसूख के नशे में चूर अधिकारियों ने इसे भी कूड़ेदान के हवाले कर दिया। सवाल यह उठता है कि क्या BDO रामनगर, ग्राम प्रधान के ‘निजी सचिव’ के रूप में कार्य कर रहे हैं या जनता के सेवक के रूप में? आखिर किसकी शह पर जनसूचना अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं?
साहब को नहीं कानून का खौफ, ‘ढाक के तीन पात’ साबित हुई व्यवस्था
हैरानी की बात यह है कि नियमतः 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन राजनीतिक संरक्षण में फले-फूले ग्राम प्रधान के प्रभाव में आकर BDO रामनगर ने सूचना दबा ली। आवेदक ने हार नहीं मानी और 25 मार्च 2026 को रजिस्टर्ड डाक के जरिए स्मरण-पत्र भी भेजा, लेकिन ब्लॉक प्रशासन की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। “ढाक के तीन पात” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए अधिकारियों ने RTI कानून को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
अब ‘प्रथम अपीलीय अधिकारी’ की अदालत में मामला
ब्लॉक स्तर पर न्याय न मिलता देख, आवेदक सक्कू चौधरी ने हार नहीं मानी है। उन्होंने 25 अप्रैल 2026 को जनपद के प्रथम अपीलीय अधिकारी को अपील भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सूचना दिलाने की मांग की है।ब्लॉक स्तर पर भ्रष्टाचार के गठजोड़ से निराश होकर आवेदक सक्कू चौधरी ने अब 25 अप्रैल 2026 को जनपद के प्रथम अपीलीय अधिकारी को डाक के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजकर गुहार लगाई है। ग्रामीण अब एक ही सवाल पूछ रहे हैं— क्या जनपद के आला अधिकारी भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाले BDO पर लगाम कस पाएंगे? क्या तेनुआ असनहरा के पांच वर्षों के विकास की फाइलें सार्वजनिक होंगी या फिर फाइलें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएंगी?
बड़ा सवाल: > क्या बस्ती जनपद के उच्चाधिकारी इस भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को तोड़ पाएंगे? क्या रामनगर BDO पर कार्यवाही होगी जो सूचना छिपाकर भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं?
ग्रामीणों की चेतावनी: “आर-पार की होगी लड़ाई”
गाँव के बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि विकास कार्य ईमानदारी से हुए हैं, तो सूचना देने में कतराना कैसा? प्रमाणित प्रतिलिपियां न देना इस बात का पुख्ता सबूत है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। अब देखना यह है कि जनपदीय अधिकारी इस मामले में पारदर्शिता बरतते हैं या फिर भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में ब्लॉक प्रशासन के साथ मिलकर डुबकी लगाते हैं।तेनुआ असनहरा गाँव के बुद्धिजीवियों और युवाओं में इस टालमटोल को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक गाँव की सूचना का मामला नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और पारदर्शिता की हत्या है। यदि जल्द ही पांच वर्षों के विकास कार्यों का हिसाब (प्रमाणित प्रतिलिपि) नहीं मिला, तो ग्रामीण जिला मुख्यालय पर विशाल प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
अब पूरे जनपद की नजरें प्रथम अपीलीय अधिकारी के फैसले पर टिकी हैं। क्या भ्रष्टाचार की यह फाइल खुलेगी या रसूखदार इसे फिर से दबाने में कामयाब होंगे?












