
अजीत मिश्रा (खोजी)
स्थानांतरण नीति को ठेंगा दिखा रहे CEO संदीप कुमार वर्मा; आठ वर्षों से एक ही कुर्सी पर ‘मलाई’ काटने का खेल जारी
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस को चुनौती: आखिर संदीप कुमार वर्मा पर क्यों मेहरबान है तंत्र?
- मत्स्य पालन विभाग बना ‘लूट का अड्डा’? 8 वर्षों की लंबी तैनाती के पीछे आखिर क्या है काला खेल?
- बस्ती: नियम ताक पर, 08 साल से एक ही पद पर डटे CEO संदीप वर्मा; उठ रहे गंभीर सवाल
बस्ती। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और पारदर्शी स्थानांतरण नीति का दम भरती है, लेकिन बस्ती जिले में मत्स्य पालन विकास अभिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) संदीप कुमार वर्मा ने इन दावों की हवा निकाल दी है। सरकारी आदेशों और स्थानांतरण नीति को खुलेआम चुनौती देते हुए संदीप कुमार वर्मा पिछले लगभग 08 वर्षों से एक ही पद पर कुंडली मारकर बैठे हैं। आखिर क्या वजह है कि शासन के नियम इस अधिकारी के सामने बौने साबित हो रहे हैं?
नियम ताक पर, आखिर किसके संरक्षण में जमी है कुर्सी?
सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को एक ही कार्यालय या स्थान पर अधिकतम 03 वर्ष तक ही तैनात रखा जा सकता है। इसके बाद उनका स्थानांतरण अनिवार्य है ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार की जड़ें न जम सकें।
- सवाल: संदीप कुमार वर्मा के मामले में यह 3 साल की समय सीमा 8 साल में कैसे बदल गई?
- चर्चा: जिले के गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि आखिर वो कौन सा ‘ऊंचा रसूख’ है जो संदीप कुमार वर्मा को स्थानांतरण नीति से सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है।
मत्स्य पालन विभाग में ‘लूट-खसोट’ की बू?
सूत्रों की मानें तो लंबे समय से एक ही पद पर जमे रहने के कारण विभाग में तानाशाही और मनमानी का माहौल है। चर्चा है कि यदि संदीप कुमार वर्मा के कार्यकाल और उनके द्वारा किए गए कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो मत्स्य पालन विभाग में हुए बड़े स्तर के खेल और ‘लूट-खसोट’ की परतें खुल सकती हैं।
“जब पहरेदार ही सालों तक एक ही जगह जम जाए, तो सुरक्षा और भ्रष्टाचार के बीच की लकीर मिटने लगती है।”
जांच का विषय: नीति सबके लिए या सिर्फ फाइलों के लिए?
एक तरफ आम कर्मचारियों का स्थानांतरण नीति के तहत समय पर तबादला कर दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ संदीप कुमार वर्मा जैसे अधिकारियों के लिए नियम शिथिल पड़ जाते हैं। क्या मत्स्य पालन विकास अभिकरण बस्ती पर शासन की नजर नहीं है? या फिर जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंद ली गई हैं?
बड़ा सवाल: कब होगा तबादला?
बस्ती की जनता और विभाग के भीतर अब यह सवाल कौंध रहा है कि क्या शासन इस मामले का संज्ञान लेगा? क्या संदीप कुमार वर्मा का भी स्थानांतरण होगा या वे इसी तरह नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ‘मलाई’ काटते रहेंगे?
अब देखना यह है कि मत्स्य पालन विकास अभिकरण बस्ती के इस मामले में शासन की नींद कब टूटती है और संदीप कुमार वर्मा के ‘साम्राज्य’ पर कब विराम लगता है।
बस्ती से ब्यूरो रिपोर्ट।












