
एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह के अधिगम क्लब के अंतर्गत पुस्तकों का महत्व विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह आयोजन एकलव्य विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया, प्रति कुलाधिपति श्रीमती पूजा मलैया एवं श्रीमती रति मलैया के कुशल नेतृत्व, कुलगुरू प्रोफ़ेसर पवन कुमार जैन, कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा के कुशल निर्देशन में किया गया।
पुस्तकें शिक्षा का आधार स्तंभ हैं। पुस्तकें ना केवल ज्ञान देती हैं, वरन सोचने समझने और व्यक्त करने में सहायक होती हैं। इसी संदर्भ में एकलव्य विश्वविद्यालय के अधिगम क्लब के छात्रों द्वारा पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पुस्तकों का महत्व विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से किया गया। शिक्षा एवं पुस्तकालय संकाय की अधिष्ठाता डॉ. स्वर्ण कौर ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु महोदय ने कहा की शिक्षा में पुस्तकों का केंद्रीय स्थान है और इससे सेल्फ लर्निंग को बढ़ावा मिलता है।
इसी तारतम्य में कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा जी ने अपने उद्बोधन में कहा की ई लर्निंग को बढ़ावा देने के साथ पुस्तकों की महत्ता को नकारा नहीं जा सकता है। मुख्य परीक्षा नियंत्रक डॉ. प्रकाश खम्परिया, अधिष्ठाता अकादमिक डॉ.शमा खानम, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. शैलेंद्र जैन, डॉ. आशीष जैन एवं डॉ. हृदय नारायण तिवारी ने भी पुस्तकों के महत्व विषय पर वक्तव्य प्रदान किये। इस परिचर्चा में विक्रम प्रताप सिंह ,यादवेंद्र सिंह, सीमा साहू, राजीव सिंह, मिहिलाल पटेल, प्रीति जैन, पायल गांधी आदि विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर का हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन हर्ष राज द्वारा किया गया और आभार छात्रा दिशा चौबे के द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्राध्यापकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।









