“वंदे भारत लाईव्ह टीव्ही न्यूज “। जिल्हा प्रतिनिधी :-डॉ.पंजाबराव खाडे. ” क्या हमारी न्यायव्यवस्था बांझ हो गयी है। 2001 से नही मिल रहा मृतक के परिवार को न्याय। …..! अकोला,शिवणी यहा पर रोड निर्माण के लिये महसुल विभाग, वन विभाग ,मंत्रालय द्वारा अकोला जिल्हाधिकारी को जमिन अधिग्रहित करणे के आदेश दिये गये। तत्कालीन जिल्हाधिकारी, द्वारा एस.डी.एम.को भुसंदन अधिकारी नियुक्त किया गया। ईस कार्यातर्गत जिल्हाधिकारी कार्यालय द्वारा जनता को अपने जगह की किमत अदा की गयी। नागरिक अपनी जगह शासन के ताबे मे देकर दुसरी और चलै गये। स्थानिक जनता का अनेक वर्षोसे आणे-जाणे का रास्ता था। उसी रास्ते लगकर कूवां,गड्ड थे। वह गड्डे के बारेमे तत्कालीन ग्रामपंचायत तथा जिल्हाधिकारी कार्यालय को अर्जी कर पुर्व देकर कुवां तथा गड्डे बुजानेकी अपील की थी। पर जिल्हाधिकारी द्वारा कोई संज्ञान नही लीया गया। उसी दिन रस्तेसे स्कूल जाते समय 25/06/2001 के दिन कुंवेमे पाव फिलकर गिरकर तडफ,तडफकर मौत हो गयी। शव निकालकर पोस्टमार्टम के लिये पुलिस द्वारा ले जाया गया। पोस्टमार्टम से लाने के बाद मयत के घरवालोने जबतक कार्यवाही नही होती तब तक अंतिम संस्कार नही करेंगे। लेकीन पुलिस उपनिरीक्षक बकल नं.734 द्वारा मयत परिवार को दबाव डालकर जबरदस्ती अंतिम संस्कार कराया गया। मयत के परिवार की और से अनेक अर्जी दी गयी,रास्ता रोको,आमरण उपोषण, राष्ट्रपती को ईच्छा मरण की परमिशन मांगी,आत्मदाह, अनेक उपाययोजना के उपरात मा.मानवाधिकार आयोग को केस दाखल कर गुहार लगाई पर कोई न्याय नही मिला। क्या हमारे देश मे गरीब की कोई कीमत नही। ? क्या गरिब को कोई भावना नही होती। ?क्या जिल्हाधिकारी अपनी जुम्मेदारी निभाकर न्याय नही दे सकते थे। ?यहा अनेक अधिकारी है।आमदार, खासदार के सामने चाटूगीरी करते हैपर गरिबोंके प्रती कोई लेन देन नही। “तो जनता क्यो न कहे गरिबोंके प्रती न्याय व्यवस्था बांझ तो नही हो गयी है। “