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गुरु के वचनों में वह शक्ति है जो मनुष्य के तन मन और हृदय को शुद्ध कर देती है

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रुचि डोलिया जिला संवाददाता हरिद्वार

गुरु के वचनों में वह शक्ति है जो मनुष्य के तन मन और हृदय को शुद्ध कर देती है

महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज  ऋषि रोड स्थित प्रसिद्ध श्री हनुमान गुफा में भक्तजनों के बीच ज्ञान की गंगा बहाते हुए प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान अनंत विभूषित महामंडलेश्वर 1008 श्री श्याम दास जी महाराज ने कहाइस पृथ्वी लोक में गुरु देव सत्य का पथ दिखाने वाले, अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले हमारे सच्चे पथदर्शक होते हैं। गुरु केवल उपदेश देने वाले नहीं, बल्कि अपने आचरण, तप, त्याग और करुणा से जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाली दिव्य चेतना होते हैं। जिनके सानिध्य में मानव जीवन सार्थक बनता है और आत्मा अपने वास्तविक लक्ष्य की ओर अग्रसर होती है। महामंडलेश्वर श्याम दास जी महाराज ने कहा

 

गुरु देव वह दिव्य मूर्ति हैं जो हमें भगवान श्रीराम की अनंत भक्ति का मार्ग प्रदान करती हैं। श्रीराम भक्ति के माध्यम से गुरु हमें मर्यादा, सत्य, धर्म और कर्तव्य का बोध कराते हैं। गुरु के वचनों में वह शक्ति होती है जो हृदय को शुद्ध करती है, विचारों को पवित्र बनाती है और कर्मों को धर्ममय स्वरूप प्रदान करती है। गुरु कृपा से ही भक्ति में स्थिरता आती है और मन प्रभु चरणों में रमने लगता है।

 

कहा गया है कि गुरु के मार्गदर्शन के बिना ईश्वर तक पहुँचना संभव नहीं है। गुरु ही वह सेतु हैं जो शिष्य को संसार से ब्रह्म की ओर ले जाते हैं। वे शिष्य के भीतर छिपी हुई दिव्यता को जाग्रत करते हैं और उसे आत्मज्ञान की अनुभूति कराते हैं। गुरु जीवन की कठिनाइयों में दीपक की भाँति प्रकाश देते हैं और भ्रम के मार्ग से निकालकर सत्य के मार्ग पर स्थापित करते हैं।

 

गुरु का स्थान माता-पिता से भी ऊँचा माना गया है, क्योंकि माता-पिता जन्म देते हैं, पर गुरु जीवन जीने की कला सिखाते हैं। गुरु की कृपा से ही विवेक जाग्रत होता है, अहंकार का नाश होता है और सेवा, समर्पण व प्रेम की भावना का विकास होता है। गुरु शिष्य को यह सिखाते हैं कि सच्चा सुख बाहरी भोगों में नहीं, बल्कि आत्मशांति और प्रभु भक्ति में निहित है।

 

इस कलियुग में गुरु ही वह आधार हैं जो डगमगाते मानव को स्थिरता प्रदान करते हैं। उनके बिना जीवन दिशाहीन नाव के समान हो जाता है। गुरु के चरणों में श्रद्धा, विश्वास और समर्पण ही मानव जीवन का परम आभूषण है। गुरु कृपा से ही मनुष्य सत्य, धर्म और भक्ति के पथ पर चलकर अपने जीवन को धन्य बनाता है और अंततः ईश्वर की अनंत कृपा का पात्र बनता है।

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