

सतना जिले के चित्रकूट में गधों का मेला हर दिवाली
के दूसरे दिन से लगता है, और यह तीन दिनों
तक चलता है । यह मेला मुगलकाल में औरंगज़ेब के
ज़माने से लग रहा है । मान्यता है कि जब औरंगज़ेब
चित्रकूट पहुंचे थे, तब रसद और असलहे ढोने वाले गधे
और खच्चर बीमार पड़ने लगे थे । इस पर किसी ने
औरंगज़ेब को सलाह दी कि यहां गधों का मेला लगाया
जाए । इस मेले में देश के अलग-अलग प्रदेशों और
विदेश से भी व्यापारी और खरीदार आते हैं । इस मेले
में अच्छी नस्ल के गधों और खच्चरों की कीमत हज़ारों
से लाखों में होती है।










