
वंदेभारतलाइवटीव न्युज/ समृद्धभारत ई समाचार पत्र
सोमवार 08 दिसंबर 2025 ================> छग सरकार ने जमीन गाइडलाइन दरों में अचानक से हुए वृद्धि के बाद बड़ा बदलाव किया है। छग जमीन पंजीयन विभाग ने शहरों में लागू नई दरों और मूल्यांकन का पुनरीक्षण किए जाने का भी फैसला लिया है। प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार, महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक छग शासन रायपुर की ओर से केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक के बाद नई संशोधित गाइडलाइन जारी की है। संशोधित गाइडलाइन में छह प्रमुख परिवर्तन किए गए हैं। जिला मूल्यांकन समितियों से 31 दिसंबर 2025 तक नए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। नई गाइडलाइन इस प्रकार से है-: इंक्रीमेंटल आधार पर मूल्यांकन खत्म किया गया। नगरीय क्षेत्रों में पहले भूखंड का 1400 वर्गमीटर तक इंक्रीमेंटल आधार पर तय किया जाता है, अब इसे खत्म करके फिर से पुराने स्लैब पर रेट लागू किए गए। नगर निगम-: 50 डिसमिल तक, नगरपालिका-: 37•5 डिसमिल तक, नगरपंचायत-: 25डिसमिल तक। फ्लैट/ दूकान आदि का मूल्यांकन सुपर बिल्ट अप नहीं बिल्ट अप एरिया से होगा। अब केवल बिल्ट अप क्षेत्र की गणना। मध्यप्रदेश के समय से चल रही पुरानी व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। इससे अब वर्टिकल डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। मल्टी स्टोर बिल्डिंग में तल के आधार पर दरें कम होंगी। बेसमेंट/पहली मंजिल-: 10%, तक की कमी, दूसरी मंजिल और उससे ऊपर-: 20% तक की कमी, इससे आम और मध्यम वर्ग के लिए फ्लैट सस्ते होने की आशा की जा रही है । कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में 20मीटर के बाद 25% की कमी, मुख्य मार्ग से दूर की दूकानों पर राहत दी गई। 20 मीटर दूरी की गणना कॉम्प्लेक्स के मुख्य मार्ग की ओर से निर्मित भाग से खी जायेगी। जिला प्रस्तावों पर केंद्रीय बोर्ड लेगा अंतिम निर्णय। फहले प्रस्ताव भेजे जाते थे, लेकिन अब उन पर विस्तार से विश्लेषण होगा, जिससे वास्तविक बाजार भाव तय हो सकेगा। जिला मूल्यांकन समिति को यह निर्देशित करने का निर्णय लिया गया कि , हाल ही में हुई जमीन दरों में बढ़ोतरी के बाद प्राप्त ज्ञापनों, आपत्तियों, सुझावों का परिशीलन कर 31 दिसंबर 2025 तक गाइडलाइन दरों में पुनरीक्षण के प्रस्ताव
भेंजे। मालूम हो कि छग सरकार ने 09 दिसंबर 2025 को जमीन दर एवं रजिस्ट्री दर में बढ़ोतरी का निर्देश जारी किया था। सरकार के इस फैसले का छग प्रदेश के कारोबारियों, विपक्ष और स्वयं भाजपा के नेताओं ने भी विरोध किया था। सरकार के फैसले की आलोचना होते हुए देखकर अब सरकार ने अपने निर्णय मे बड़ा परिवर्तन किया है।










