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“छत्तीसगढ़ की धरती, पर रोजगार बाहरी लोगों का!” — सीमेंट प्लांटों में स्थानीय युवाओं की अनदेखी पर उठे तीखे सवाल

बड़े उद्योगों में बाहरी कर्मचारियों को स्थान? व छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों की कोई इज्जत नहीं , स्थानीयों में बढ़ता आक्रोश… हादसों और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठने लगे सवाल


बलौदाबाजार/छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख सीमेंट उत्पादन राज्यों में गिना जाता है। राज्य की समृद्ध खनिज संपदा और औद्योगिक संभावनाओं के कारण यहां कई बड़े सीमेंट उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनमें Ambuja Cements, UltraTech Cement, और Shree Cement जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन उद्योगों ने प्रदेश में निवेश तो किया, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच एक बड़ा सवाल लगातार उठ रहा है—क्या इन उद्योगों में छत्तीसगढ़ के लोगों को उचित सम्मान और रोजगार मिल पा रहा है?
स्थानीयों में बढ़ती नाराजगी
प्रदेश के कई जिलों में संचालित सीमेंट प्लांटों के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इन उद्योगों में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों—उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों—के कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाती है। जबकि जिन गांवों और क्षेत्रों की जमीन, संसाधन और पर्यावरण इन उद्योगों से प्रभावित होते हैं, वहां के स्थानीय युवाओं को रोजगार के सीमित अवसर ही मिल पाते हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं का आरोप है कि जब भी प्लांटों में भर्ती होती है तो बाहर से आए लोगों को अधिक महत्व दिया जाता है। इससे स्थानीय लोगों में यह भावना घर कर रही है कि उनकी अपनी धरती पर ही उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
“हमारी जमीन, हमारा संसाधन… पर नौकरी किसी और को”
स्थानीय युवाओं का कहना है कि उद्योग लगने के समय उन्हें उम्मीद थी कि रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, लेकिन वास्तविकता कुछ अलग ही दिखाई देती है। कई युवाओं का कहना है कि प्लांटों में तकनीकी और प्रबंधकीय पदों पर बाहरी राज्यों के कर्मचारियों की संख्या अधिक है, जबकि स्थानीय लोगों को अक्सर सीमित या अस्थायी काम ही मिलता है।
इस स्थिति को लेकर कई सामाजिक संगठनों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भी समय-समय पर आवाज उठाई है। उनका मानना है कि उद्योगों को स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
हादसों पर भी उठते सवाल
हाल ही में UltraTech Cement के रवान क्षेत्र स्थित प्लांट से जुड़ी एक दुखद घटना ने भी लोगों का ध्यान खींचा। जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले वहां दो बच्चों की मौत की घटना सामने आई थी। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा और आक्रोश देखने को मिला।
ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसी घटनाओं की सच्चाई अक्सर पूरी तरह सामने नहीं आ पाती और मामले धीरे-धीरे दब जाते हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर क्या कार्रवाई हुई, यह स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से बहुत कम सामने आती है।
उद्योग और जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े उद्योग केवल उत्पादन और मुनाफे तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। जिस क्षेत्र में उद्योग स्थापित होते हैं, वहां के लोगों को रोजगार, सुरक्षा और विकास के अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी है।
यदि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार दिया जाए तो इससे न केवल उद्योगों को कुशल श्रमिक मिलेंगे बल्कि क्षेत्र में सामाजिक संतुलन भी बना रहेगा।
बढ़ती मांग – “स्थानीयों को मिले प्राथमिकता”
छत्तीसगढ़ के कई सामाजिक और युवा संगठनों का कहना है कि अब समय आ गया है कि उद्योगों में स्थानीय लोगों के लिए स्पष्ट रोजगार नीति बने। उनका कहना है कि राज्य के संसाधनों से चलने वाले उद्योगों में छत्तीसगढ़ के युवाओं को उचित अवसर मिलना चाहिए।
स्थानीय लोगों की भावनाएं आज केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह उनके सम्मान और अधिकार से भी जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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