
भैयाथान केवरा घुचापारा में करमा पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया गया इस पर्व को बड़े बुजुर्गों के चलाए गए परंपरा अनुसार आज के लोग उसी परंपरा को आत्मसाध करते हुवे दिनभर निर्जला उपवास रखते हुए रात्रि में तीज के दिन के बाद का बास के बर्तन में बोए हुए जवा गेहूं और मकई अनाज का जाई को करमा के देवता का स्वरूप मानते हुए घर के आंगन में रख कर होम दीप करते हुए करमा का कहानी सुनते के लिए अपने साथ आस पास केलागों के साथ अपना पूरा परिवार बड़ी विश्वास के साथ एक साथ बैठकर एकता भाईचारा के साथ मनाते हैं प्रसाद वितरण कर रात को करमा नृत्य करते हुए रात्रि जागरण कर सुबह जावा विसर्जन नदी या तालाब vme में कर के फिर वर्त का पारन करते है। यही लोकल फॉर वोकल का नियम अक्सर गांवों में चलता है सरगुजा में
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