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*दर्राभांठा में गूंजा भक्ति का स्वर, तीन दिवसीय महोत्सव सम्पन्न*

*दर्राभांठा में गूंजा भक्ति का स्वर, तीन दिवसीय महोत्सव सम्पन्न*

*दर्राभांठा में गूंजा भक्ति का स्वर, तीन दिवसीय महोत्सव सम्पन्न*

तिलक राम पटेल महासमुंद वन्दे भारत लाइव टीवी न्युज चैनल

बाबा कुटी प्राण प्रतिष्ठा के साथ आस्था, एकता और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला

 

सरायपाली – ग्राम दर्राभांठा में आयोजित श्री अलेख महिला शरणम का तीन दिवसीय बाललीला एवं बाबा कुटी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामूहिक एकता का जीवंत उत्सव बनकर उभरा। पूरे ग्राम में भक्ति, उल्लास और श्रद्धा का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने हर हृदय को भावविभोर कर दिया। माताओं, बहनों, युवाओं और बुजुर्गों सहित समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

प्राण प्रतिष्ठा के पावन क्षणों ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया। बाबा कुटी की स्थापना के साथ ही मानो पूरे ग्राम में सकारात्मक ऊर्जा, प्रेम और सद्भावना का संचार हो गया। यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं थी, बल्कि समाज को जोड़ने, आपसी भाईचारे को सुदृढ़ करने और सह-अस्तित्व की भावना को जागृत करने का एक प्रेरक माध्यम बनी।

महोत्सव के अंतिम दिन आयोजित रात्रिकालीन कंस दरबार ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर अजा मोर्चा जिला अध्यक्ष प्रमोद सागर, मंडल महामंत्री सुरोती लाल लकड़ा, वरिष्ठ नेता मालिक राम पटेल, नीलमणि बरिहा, सरपंच रमुला बरिहा, उपसरपंच प्रशांत बघेला, सक्रिय युवा नेता सूरज नायक, कुबेर साहू, अजय चौहान सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को और बढ़ाया।

उड़ीसा के नाट्य कला मंच द्वारा प्रस्तुत जीवंत और प्रभावशाली कंस दरबार ने धर्म और अधर्म के शाश्वत संघर्ष को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। कलाकारों की अभिव्यक्ति, संवाद और अभिनय ने उपस्थित जनसमूह को एक अलग ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभूति से भर दिया।

ग्रामवासियों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे बाबा कुटी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे और समाज में शांति, प्रेम तथा समृद्धि का संदेश निरंतर फैलाते रहेंगे।

यह महोत्सव केवल तीन दिनों का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक ऐसी प्रेरणा बन गया, जो आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति, आस्था और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेगा। दर्राभांठा की यह पावन धरा एक बार फिर यह संदेश दे गई कि जब समाज एकजुट होता है, तो हर आयोजन एक उत्सव नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक इतिहास बन जाता है।

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