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धमतरी /नगरी :- बस्तर का स्वागत द्वार बने सप्तऋषि और महानदी उद्गम की धरती पर विकसित हो प्राकृतिक पर्यटन उद्यान

बस्तर का स्वागत द्वार बने नगरी: सप्तऋषि और महानदी उद्गम की धरती पर विकसित हो प्राकृतिक पर्यटन उद्यान

नगरी- आदिवासी विकासखंड नगरी, जो बस्तर अंचल का प्रवेश द्वार मानी जाती है, प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक महत्व से परिपूर्ण है। नगरी मुख्यालय के आसपास का क्षेत्र विशेष रूप से सिहावा आंचल के रूप में प्रसिद्ध है, जहां सप्तर्षि पर्वत की पावन श्रृंखलाएं और महानदी का उद्गम स्थल स्थित है। इसके बावजूद नगरी मुख्यालय में ऐसा कोई सुव्यवस्थित स्थल नहीं है, जहां परिवार के साथ दो घंटे सुकून से बिताए जा सकें या पर्यटक ठहरकर इस क्षेत्र की सुंदरता को आत्मसात कर सकें।

ऐसे में समय की मांग है कि धमतरी-नगरी रोड में हरदीभाटा चौक के समीप स्थित कक्ष क्रमांक 298 में 8 हेक्टेयर का एक टुकड़ा है जिसे पूर्व में वन विभाग के द्वारा इसमें लाखों रुपए खर्च कर आक्सीजोन बनाया गया था लेकिन यह कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, वनभूमि के इस हिस्से को पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए एक आकर्षक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन उद्यान के रूप में विकसित किया जाए। यह उद्यान केवल मनोरंजन का केंद्र न होकर, नगरी-सिहावा की पहचान और गौरव का प्रतीक बने।

प्रकृति के साथ संतुलन, विकास के साथ संरक्षण

प्रस्तावित गार्डन का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि प्रकृति से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो। मौजूदा वृक्षों और जैव विविधता को सुरक्षित रखते हुए वॉकिंग ट्रैक, बैठने की व्यवस्था, बच्चों के लिए प्राकृतिक खेल क्षेत्र और ओपन एयर मंच विकसित किए जाएं। स्थानीय पत्थरों, मिट्टी और हरित सामग्री का उपयोग कर इसे पूर्णतः इको-फ्रेंडली स्वरूप दिया जा सकता है।

सप्तर्षियों की प्रतिमा और पर्यटन मानचित्र

उद्यान के मुख्य आकर्षण के रूप में सप्तर्षियों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएं, जो इस क्षेत्र की आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाएं। साथ ही सिहावा अंचल के प्रमुख पर्यटन स्थलों—सप्तर्षि पर्वत, महानदी उद्गम, आसपास के जलप्रपात और प्राकृतिक स्थलों—का एक सुस्पष्ट एवं आकर्षक मानचित्र भी प्रदर्शित किया जाए, ताकि आने वाले पर्यटकों को क्षेत्र की संपूर्ण जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके।

मॉर्निंग वॉक और स्वस्थ वातावरण

सुबह और शाम टहलने वालों के लिए सुव्यवस्थित मॉर्निंग वॉक ट्रैक, योग स्थल और हरित लॉन विकसित किए जाएं। इससे स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्यवर्धक वातावरण मिलेगा और सामाजिक मेलजोल भी बढ़ेगा। स्वच्छ, शांत और हरित परिसर नगरी के नागरिक जीवन को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

इस परियोजना के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। स्वयं सहायता समूहों, विशेषकर महिला समूहों को फूड स्टॉल, हस्तशिल्प केंद्र और स्मृति चिन्ह विक्रय की जिम्मेदारी देकर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे नगरी केवल एक प्रशासनिक मुख्यालय न रहकर, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों का जीवंत केंद्र बन सकेगा।

नगरी नगर की नई पहचान

यदि इस प्रकार का प्राकृतिक-सांस्कृतिक उद्यान विकसित होता है, तो नगरी वास्तव में बस्तर का स्वागत द्वार बन सकेगा। यह स्थल परिवारों के लिए विश्राम का केंद्र, पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र और स्थानीय समाज के लिए गर्व का प्रतीक सिद्ध होगा।
अब आवश्यकता है दूरदर्शी योजना, जनसहभागिता और प्रशासनिक पहल की, ताकि सप्तऋषियों की इस तपोभूमि पर विकास और प्रकृति संरक्षण का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके।

कलेक्टर से उम्मीद

जागरूक नगरवासियों को पूर्ण विश्वास है कि जिले के संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ कलेक्टर अविनाश मिश्रा इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लेकर सकारात्मक पहल करेंगे। उनकी दूरदर्शी सोच और प्रभावी नेतृत्व से निश्चित ही ऐसा समाधान निकलेगा, जो नगरी नगर के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इससे नगरी को एक सुव्यवस्थित, विकसित नगर के रूप में नई पहचान मिलेगी और साथ ही यह बस्तर के मुख्य द्वार के रूप में अपनी विशिष्ट छवि को और अधिक सशक्त कर सकेगा।

CHANDRABHAN YADAW

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