
अजीत मिश्रा (खोजी)
🎯भ्रष्टाचार की ‘इंटरलाकिंग’: नयकापार में प्रधान का ‘फर्जीवाड़ा’ बेनकाब, जांच के नाम पर बीडीओ की चुप्पी पर सवाल🎯
- “वाह री विकास की रफ्तार! सोशल मीडिया पर पोल खुली तो रातों-रात बन गई इंटरलॉकिंग, मानक गए तेल लेने।”
- “नयकापार की ‘कागजी’ सड़क अब जमीं पर, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए प्रधान ने अधिकारियों को बनाया ढाल!”
- “सीडीओ साहब ध्यान दें! कप्तानगंज में सरकारी धन की लूट, फर्जी बिलों को ढाल बना रही ग्राम प्रधान उर्मिला सिंह।”
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
बस्ती। जनपद के विकास खंड कप्तानगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत नयकापार में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की लूट का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की पारदर्शिता के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। ग्राम प्रधान उर्मिला सिंह पर भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए अधिकारियों और मीडिया को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगा है। मामला अब सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं।
🎯बिना काम कराए ही डकार गए बजट?
सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम प्रधान उर्मिला सिंह ने पहले तो बिना एक ईंट लगाए ही इंटरलॉकिंग कार्य के फर्जी बिल-वाउचर बीडीओ और कंप्यूटर ऑपरेटर की मिलीभगत से पोर्टल पर फीड करा दिए। सरकारी खजाने पर डाका डालने की यह तैयारी पूरी थी, लेकिन जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और ग्रामीणों में सुगबुगाहट शुरू हुई, प्रधान खेमे में हड़कंप मच गया।
🎯रातों-रात खड़ी कर दी ‘भ्रष्टाचार की दीवार’
अपनी गर्दन फंसती देख ग्राम प्रधान ने आनन-फानन में मानक को ताक पर रखकर रातों-रात गुणवत्ता विहीन इंटरलॉकिंग का कार्य करा दिया। सवाल यह उठता है कि:
- क्या रात के अंधेरे में किया गया यह कार्य केवल जांच से बचने का एक पैंतरा है?
- बिना तकनीकी स्वीकृति और मानक के, घटिया सामग्री से बनाई गई यह सड़क कितने दिन टिकेगी?
🎯बीडीओ और ब्लॉक प्रशासन की भूमिका संदिग्ध
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बीडीओ चंद्रभान उपाध्याय ने अब तक नयकापार के इस खुले भ्रष्टाचार पर कोई संज्ञान नहीं लिया है। न तो मौके की जांच की गई और न ही ऑनलाइन पोर्टल से उन फर्जी बिल-वाउचरों को डिलीट कराया गया है।
🔥बड़ा सवाल: क्या ब्लॉक प्रशासन खुद इस भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है? ऑनलाइन फीड फर्जी बिलों को डिलीट न करना अब सीडीओ और डीसी मनरेगा के लिए एक खुली चुनौती बन गया है।
🎯उच्च स्तरीय जांच की दरकार
ग्रामीणों का कहना है कि अगर उच्च अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच की जाए, तो न केवल इंटरलॉकिंग बल्कि अन्य विकास कार्यों में भी बड़े घोटाले की पोल खुलनी तय है। प्रधान द्वारा मीडिया और अधिकारियों को गुमराह करने का खेल अब ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है।
अब देखना यह होगा कि बस्ती प्रशासन इस ‘रातों-रात’ हुए निर्माण और ‘फर्जी फीडिंग’ के खेल पर क्या एक्शन लेता है, या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल भी फाइलों के नीचे दबा दी जाएगी?

















