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बड़गांव में भक्तिभाव से मनाई गई संत तारण तरण की 577वीं जन्म जयंती

झंडा वंदन कर निकाली गई प्रभातफेरी

कटनी,रीठी।। GANESH UPADHYAY VANDE BHARAT LIVE TV NEWS KATNI MP.

सोलहवीं शताब्दी के दौरान कटनी जिले में जन्मे महान आध्यात्मिक संत एवं विश्व रत्न आचार्य श्री तारण तरण मंडलाचार्य जी महाराज की 577वीं जन्म जयंती बड़गांव, बिलहरी, बाकल तथा आसपास के क्षेत्रों में बड़े ही धूम धाम से मनाई गई। इस अवसर पर तारण तरण दिगम्बर जैन मंदिर बड़गांव में सुबह विशेष रूप से बृहद मंदिर विधि का आयोजन किया गया। गुरुभक्तों ने मंदिर में ध्वज फहराकर ध्वज वंदन किया।आचार्य तारण तरण द्वारा रचित ग्रथों को पालना में रखकर झूला झुलाया गया। इसके बाद ग्राम में प्रभातफेरी निकाली गई जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। बैंड बाजों की धुन पर लोगों ने जमकर नृत्य किया और गुरु महाराज के जयकारे लगाए।

कटनी जिले में हुआ था संत तारण तरण का जन्म

तारण तरण जी का जन्म कटनी जिले की पुष्पवती नगरी जिसे वर्तमान में बिलहरी के नाम से जाना जाता है में अगहन माह की सप्तमी को विक्रम संवत 1505 ईस्वी में हुआ था।आचार्य श्री तारण तरण 151 मंडलों के आचार्य थे इसलिए उन्हें मंडलाचार्य कहा जाता है। आध्यात्मिक और क्रांतिकारी संत तारण तरण ने क्रिया कांड और आडम्बर रहित शुद्ध पंथ की स्थापना की थी जिसे तारण पंथ के नाम से जाना जाता है।उन्होंने धर्म के नाम पर हो रहे क्रिया कांड और मिथ्या मान्यताओं का जमकर विरोध किया था। संत तारण स्वामी ने लोगों को दिए संदेश में भगवान को मंदिरों में नहीं बल्कि स्वयं के अंदर खोजने पर जोर दिया।तारण स्वामी ने मुख्य रूप से अपने संदेश में प्राणी मात्र को भगवान बताया। धर्म को जाति-पाति के बंधन से मुक्त बताकर प्राणी मात्र के प्रति समान भाव रखते हुए उन्होंने सबको एक सूत्र में पिरोये रखा।

इस प्रकार धर्म के सत्य मार्ग से विचलित हुए प्राणियों को सन्मार्ग में स्थित करना उनकी आध्यात्मिक क्रान्ति का प्रमुख उद्देश्य था।

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