
छत्तीसगढ़/कोरबा ब्यूरो:- गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की मूर्ति को अपने घर लाते हैं. जिसके 10 दिन बाद यानी अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन कर उनकी विदाई की जाती है. मान्यता है कि गजानन की मूर्ति का विसर्जन शुभ मुहूर्त और पूरे विधि-विधान से करना बहुत ही अच्छा माना जाता है.
अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की मूर्ति का विसर्जन बहुत ही प्रचलित व लोकप्रिय है. इस दिन लोग बड़ी धूमधाम और गाजे-बाजे के साथ बप्पा की मूर्ति का विसर्जन करते हैं और फिर से बप्पा के घर आने की प्रार्थना करते हैं. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव की शुरुआत होती है. यह उत्सव भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि तक चलता है. इस दौरान बप्पा 10 दिनों के लिए सभी के घरों में विराजते हैं
अनंत चतुर्दशी पूजा तिथि और मुहूर्त :-
वैदिक पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 16 सितंबर 2024 को 03 बजकर 10 मिनट पर होगी और चतुर्दशी तिथि का समापन 17 सितम्बर 2024 को 11 बजकर 44 बजे होगा. अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लेकर 11 बजकर 44 मिनट तक रहेगा.
गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त :-
हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, बप्पा की मूर्ति विसर्जन का शुभ मुहूर्त सुबह 9. बजकर 23 मिनट से लेकर शाम 9 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. मान्यता है कि इस शुभ मुहूर्त में गजानन की मूर्ति विसर्जन करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है.
विसर्जन की विधि :-
गणपति जी का विसर्जन करने के लिए सबसे पहले एक लकड़ी का आसन तैयार कर लें. उसके ऊपर स्वास्तिक बनाकर गंगाजल डालें. पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उसपर बप्पा की मूर्ति को नए वस्त्र पहनाकर और कुमकुम का तिलक लगाकर रख दें. आसन पर अक्षत डालें और गणेश जी की मूर्ति पर फूल, फल और मोदक आदि का भोग लगाएं. बप्पा की मूर्ति का विसर्जन करने से पहले उनकी पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करें साथ ही गणपति जी के फिर से आने की प्रार्थना करें. उसके बाद परिवार सहित आरती करें. उसके बाद गणेश जी की मूर्ति का विधिपूर्वक विसर्जन करें साथ ही बप्पा से अपनी गलतियों माफी मांगे और अगले साल दोबारा आने की प्रार्थना करें.



