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बस्ती स्वास्थ्य विभाग: जहाँ साहब के आदेश भी घुटने टेक देते हैं!

कुदरहा CHC बना भ्रष्टाचार का 'सेफ हाउस', रसूख के आगे CDO का हंटर फेल।

अजीत मिश्रा (खोजी)

💰भ्रष्टाचार की ‘बीमारी’ से ग्रस्त स्वास्थ्य विभाग, CDO के आदेश भी कूड़ेदान में!💰

  • शर्मनाक! सरकारी अस्पताल में कमीशन का खेल, जाँच के एक महीने बाद भी ‘दागी’ स्टाफ को अभयदान।
  • CMO साहब! कब तक फाइलों में दबे रहेंगे CDO के आदेश?
  • कुदरहा PHC: निजी प्रैक्टिस का ‘अड्डा’ और सेटिंग का ‘अखाड़ा’।
  • साहब ने पकड़ी चोरी, बाबू ने दी क्लीन चिट! आखिर कब होगी कार्रवाई?
  • गरीबों की जेब पर डाका डालने वालों को आखिर किसका संरक्षण?
  • दवा अस्पताल में, पर्ची बाहर की: कुदरहा के ‘कमीशनखोर’ सिस्टम की खुली पोल।
  • बस्ती | 13 अप्रैल, 2026

विशेष रिपोर्ट: ब्यूरो कार्यालय

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में जवाबदेही किस कदर दम तोड़ चुकी है, इसका जीता-जागता उदाहरण बस्ती जनपद का कुदरहा CHC बन गया है। यहाँ नियम-कायदे और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश केवल कागजों पर ‘शहीद’ होने के लिए बनाए जाते हैं। ताज़ा मामला प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे उस खेल का है, जहाँ रसूख और ‘सेटिंग’ के आगे मुख्य विकास अधिकारी (CDO) का हंटर भी बेअसर साबित हो रहा है।

💰CDO का आदेश, CMO की सुस्ती: आखिर रक्षक ही भक्षक क्यों?

बीते मार्च माह में CDO सार्थक अग्रवाल ने कुदरहा CHC का औचक निरीक्षण किया था। रंगे हाथों पकड़ा गया एक मेल स्टाफ नर्स, जो गरीब मरीजों को अस्पताल में मौजूद दवाइयां होने के बावजूद कमीशन के लालच में बाहर की दवाइयां लिख रहा था। CDO ने तत्काल प्रभाव से उसकी संविदा समाप्त करने का आदेश दिया। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी CMO डॉ. राजीव निगम की फाइलों में यह आदेश दफन है। सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के निचले कर्मचारी इतने ताकतवर हो गए हैं कि वे जिले के आला अधिकारी के आदेश को ठेंगे पर रख सकें? या फिर ‘ऊपर तक’ पहुंचने वाले कमीशन के हिस्से ने कार्रवाई की कलम की स्याही सुखा दी है?

💰निजी प्रैक्टिस का खुला खेल: डॉक्टर हैं या व्यापारी?

भ्रष्टाचार की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कुदरहा PHC में तैनात एक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ को डिप्टी CMO ने खुद देईसाड़ स्थित एक निजी क्लिनिक पर प्रैक्टिस करते पकड़ा था। 6 महीने बीत गए, रिपोर्ट सौंपी गई, लेकिन मजाल है कि डॉक्टर साहब पर कोई आंच आई हो। सूत्रों की मानें तो पटल सहायक और विभागीय बाबुओं की ‘सेटिंग’ से यह पूरा खेल खेला जा रहा है। सरकारी वेतन लेकर निजी तिजोरियां भरने वाले इन सफेदपोशों को किसका संरक्षण प्राप्त है?

💰जनता की सेहत से खिलवाड़, सिस्टम मौन

कुदरहा की जनता पूछ रही है कि जब अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध हैं, तो कमीशनखोरी के लिए बाहर की पर्ची लिखने वाले उस ‘जहरीले’ स्टाफ नर्स को अब तक सेवा में क्यों रखा गया है? क्या CMO साहब किसी बड़े हादसे या और गंभीर भ्रष्टाचार का इंतजार कर रहे हैं?

🔥बड़ा सवाल: क्या बस्ती का स्वास्थ्य प्रशासन केवल खानापूर्ति के लिए है? यदि एक माह में CDO के आदेश पर संविदा समाप्त नहीं हो सकती, तो आम जनता की शिकायतों का क्या हश्र होता होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

सावधान रहें! यदि यही आलम रहा तो कुदरहा CHC स्वास्थ्य केंद्र नहीं, बल्कि भ्रष्ट कर्मचारियों की सुरक्षित पनाहगाह बनकर रह जाएगा। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद प्रशासन की नींद टूटती है या ‘जांच और जल्द कार्रवाई’ का रटा-रटाया जुमला एक बार फिर जनता के मुंह पर दे मारा जाता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल

उत्तर प्रदेश

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