
बाड़मेर जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में सहायक व्यवस्थापक पद पर हुई भर्ती गंभीर संदेहों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कर 50 से अधिक फर्जी नियुक्तियां की गईं। लगातार मिल रही शिकायतों और बढ़ते जनदबाव को देखते हुए इस पूरे मामले की जांच अब SOG को सौंपे जाने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, बाड़मेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के EO हिराराम पुनिया का नाम इस घोटाले में प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। आरोप है कि उन्होंने भर्ती बोर्ड को दरकिनार कर भारी रकम लेकर मनचाहे व्यक्तियों की नियुक्तियां करवाईं। भर्ती सूची में योग्यता, मेरिट और नियमों की जानबूझकर अनदेखी की गई, जबकि वास्तविक योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया।
घोटाले के उजागर होने के बाद सहकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। जानकारी मिल रही है कि नियुक्ति से जुड़े कई दस्तावेज और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने तथा किसी भी छेड़छाड़ की संभावना को रोकने के लिए इन्हें SOG द्वारा कब्जे में लिए जाने की तैयारी है।
पीड़ित अभ्यर्थियों का आरोप है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया ‘बिकाऊ’ हो चुकी थी और योग्य उम्मीदवारों के साथ खुली धोखाधड़ी की गई। उनका कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष हुई तो इस पूरे घोटाले से जुड़ा बड़ा नेटवर्क सामने आ सकता है। अभ्यर्थियों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। कई संगठनों तथा नेताओं ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। माना जा रहा है कि जैसे ही जांच आगे बढ़ेगी, कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। SOG द्वारा दस्तावेज जब्त करने, संबंधित अधिकारियों और नियुक्त व्यक्तियों से पूछताछ करने, तथा संभवतः गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की भी उम्मीद जताई जा रही है।
बाड़मेर जिले में यह मामला लोगों की चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है और लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर भर्ती बेची गई थी या योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिलेगा।




