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बिहार सरकार की खास पहल: उर्दू भाषा को बल!

दरभंगा में उर्दू भाषा प्रोत्साहन के तहत वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित, जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कृति को सशक्त बनाने की प्रेरणा दी।

उर्दू भाषा को बढ़ावा देने हेतु दरभंगा में वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित, जिलाधिकारी ने कहा- “यह विरासत पर गर्व की बात”

दरभंगा, 22 मई 2025
उर्दू भाषा को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए बिहार सरकार के उर्दू निदेशालय के तत्वावधान में उर्दू भाषी विद्यार्थी प्रोत्साहन राज्य योजना के अंतर्गत आज दरभंगा समाहरणालय परिसर स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उर्दू भाषा के प्रति विद्यार्थियों की रुचि को बढ़ाना और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करना रहा।

इस आयोजन का उद्घाटन दरभंगा के जिलाधिकारी श्री राजीव रौशन, सहायक समाहर्ता परीक्षित, उप निदेशक जन संपर्क सत्येंद्र प्रसाद तथा कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. मो. जमाल मुस्तफा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी श्री रौशन ने कहा, “उर्दू भाषा को प्रेम करने वालों की दरभंगा में कोई कमी नहीं है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं भाषा और संस्कृति को मजबूती देती हैं और आने वाली पीढ़ियों में तहजीब की समझ विकसित करती हैं।”

प्रतियोगिता को विभिन्न स्तरों पर आयोजित किया गया जिसमें मैट्रिक समकक्ष विद्यार्थियों के लिए नज़्म और रुबाई, इंटरमीडिएट के लिए अफसाना निगारी और स्नातक समकक्ष के लिए नावेल निगारी जैसे विषयों को रखा गया। जिलाधिकारी ने स्वयं प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रहे विद्यार्थियों की प्रस्तुतियाँ सुनी और उनकी तैयारी की सराहना की।

उन्होंने कहा, “दरभंगा का शैक्षणिक प्रदर्शन राज्य भर में मिसाल के रूप में देखा जाता है। यहाँ के छात्र जिस आत्मविश्वास से अपनी बात रखते हैं, वह उल्लेखनीय है।”

इसके साथ ही उन्होंने बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे शैक्षणिक सुधार कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रथम से आठवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को किताब, कॉपी और पोशाक निःशुल्क दी जा रही है, वहीं मुख्यमंत्री साइकिल योजना और बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाया गया है।

इस आयोजन के माध्यम से न केवल उर्दू भाषा को नई ऊर्जा मिली है, बल्कि प्रतिभागियों में भाषायी अभिव्यक्ति की क्षमता भी निखर कर सामने आई है। दरभंगा एक बार फिर शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत करता नजर आया।

“भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, संस्कृति की आत्मा होती है।” — जिलाधिकारी राजीव रौशन

Sitesh Choudhary

चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता, लेकिन, गिरती हुई दीवारों का हमदर्द हूँ।
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