

🔴🚨 मंदिर की सीढ़ियों से उठा मासूम, 5 लाख में लगा बोली का कलंक; Kanpur Police की तत्परता से सौदा टूटा, 4 माह के शिशु की जान बची 🚨🔴
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक हृदय–स्थल Kanpur, Uttar Pradesh के पनकी क्षेत्र में स्थित पावन आस्था–केंद्र की सीढ़ियों पर जब 4 माह का एक अबोध शिशु गायब हुआ, तो यह महज़ चोरी की घटना नहीं थी—यह एक माँ की धड़कन, समाज की संवेदना और कानून की परीक्षा की सबसे कठोर घड़ी थी। 13 दिन पहले घटित यह वारदात अब उस पूरे सिंडिकेट का महा–खुलासा बन चुकी है, जिसे पुलिस ने सौदा “तय होने” से पहले ही ध्वस्त कर दिया।
🙏 आस्था की भूमि, अपराध की छाया
में पड़ती यह घटना धार्मिक स्थल की सुरक्षा, भिक्षावृत्ति में जी रहे परिवारों की असुरक्षा और संगठित बच्चा–तस्करी के बढ़ते जाल को एक साथ बेनक़ाब करती है। के बीच यह अपराध उस समय हुआ, जब मंदिर की घंटियों की गूंज और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अपने चरम पर थी।
मंदिर परिसर में रोज़ाना सैकड़ों–हज़ारों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन उसी प्रवेश–प्रवाह के साथ कभी–कभी अपराधी भी भीड़ का चोला पहनकर अंदर खिसक आते हैं। भीड़, कैमरों की सीमित रेंज, सिक्योरिटी गार्ड की अपर्याप्त संख्या, और क्षेत्रीय खुफ़िया तंत्र की कमजोर पड़ती सतर्कता—इन्हीं दरारों ने शातिरों को मासूम तक पहुँचने का अवसर दिया था। वे जानते थे कि मंदिर जैसे स्थल पर रोता शिशु भी “ध्यान भटकाने” वाले शोर का हिस्सा समझ लिया जाएगा, और यही सोच इस संगठित अपराध का पहला हथियार बनी।
👩👦 माँ की गोद से छिनी दुनिया
पीड़िता मां बहेड़ी गांव की मूल निवासी है, जो कानपुर में आकर मंदिर की सीढ़ियों पर भीख माँगकर अपने घर का खर्च़ चलाती थी। उसका बेटा, जिसने अभी दुनिया में चार महीने की आँखें ही खोली थीं, उसकी गोद में चैन से सो रहा था। माँ को क्या पता था कि यही सुस्ताई हुई नींद किसी के लिए 5 लाख रुपये की कीमत वाला “सौदा” बन जाएगी.
दिनांक 17 नवम्बर 2025 की दोपहर लगभग 12:30 बजे के बीच, जब वह कुछ सिक्के और सहायता एकत्र कर रही थी, तभी तेज़ी से उसके पास से गुज़रते दंपति ने भीड़ के बीच उसे बिलकुल साधारण बचाव बातचीत में उलझाया—
“माँ, बच्चे का टीका हो गया? दूध मिलता है क्या? यहाँ NGO आता है क्या?”
माँ को यह बातचीत चिंता या मदद भरी लगी। लेकिन बात पूछने वाला हर शख़्स मददगार नहीं होता—यह कड़वी सच्चाई तभी सामने आती, जब बाद में CCTV फुटेज में ये सवाल एक अपराध–डायवर्जन तकनीक (distraction tactic) के रूप में दर्ज किए गए। इसी बीच दूसरा व्यक्ति पीछे से बोरी और ऑटो के साथ तैयार खड़ा था.
माँ के मुताबिक—
“वह मेरा सहारा था… मेरी दुनिया, मेरा आसमान… जब वह सोता था, तो मेरी भूख भी सो जाती थी। मैंने दुनिया नहीं देखी, बस उसे देखा था…”
कहते–कहते माँ की आवाज़ टूट गयी, जैसे किसी ने उसकी रूह से सांस खींच ली हो. यही वाक्य अब केस फाइल का हिस्सा बन चुका है जो भावनात्मक बयान (Emotive Statement) के अंतर्गत दर्ज किया गया.
🎥 CCTV, मुखबिर और मैदान में उतरी पुलिस
घटना दर्ज कराए जाने का समय दोपहर 01:10 बजे था। FIR थाना पनकी में पंजीबद्ध की गई, जिसे पुलिस ने संवेदनशील श्रेणी (Case of Trafficking and Child Safety) में दर्ज कर विशेष अभियान (Special Tracking Campaign) के रूप में आगे बढ़ाया.
मुख्य जांच निर्देश शहर के DCP कार्यालय से जारी किये गये थे. जिसके तहत—
- मंदिर के CCTV नेटवर्क को पूर्ण रूप से क्लोन (
Footage Cloning & Extraction) - मोबाइल नम्बर लोकेशन डम्प (
Cell Tower Dump) - ऑटो यूनियन अलर्ट (
Transport Union Activation Alert) - ईंट–भट्ठा, PG, झुग्गी–बस्ती ट्रेवल रूट क्लस्टर (
Slum Area Mobility Chart) - सोशल मीडिया सूचना प्रसारण (
Viral Trace Analysis)
जैसे आधुनिक जांच बिन्दुओं को एक साथ सक्रिय किया गया.
CCTV फुटेज में मुख्य आरोपी दंपति का मंदिर परिसर में प्रवेश, उसके बाद बोरी और कपड़े से ढका शिशु ऑटो में रखते हुए दृश्य, और फिर तटबंध की ओर मुड़ते वाहन का क्रम पूरी तरह कैद मिला. यह फुटेज 13 अलग–अलग कैमरों में विभाजित मिला, जिसे जोड़कर पुलिस ने पूरी टाइमलाइन तैयार की.
परिसर से बाहर निकलकर पुलिस की PRV गाड़ी, थाना टीम, और क्राइम ब्रांच की यूनिट ने 3 घंटे के भीतर शहर से बाहर निकलते सभी रूट्स पर नाकेबंदी (Route Blockade Protocol) कर दी थी. यह घेराबंदी इतनी सटीक थी कि अपराधी शहर छोड़ने का कोई प्रयास न कर सके.
🕵️ शातिर योजना: 5 लाख में बेचा जा रहा था भाई–बहन का रिश्ता
जांच खुलासे में पुलिस ने बताया कि मामले में 4 लोग नामजद हैं, जिन्हें सौदा पूरा होने से पहले ही पकड़ लिया गया था. इनकी पहचान इस प्रकार है—
गिरफ्तार अभियुक्तगण :
- ऑटो चालक: Jitendra
- जितेंद्र की पत्नी:
- शिशु खरीदने वाला दंपति:
पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की (Intensive Custody Interrogation) तो जिस साज़िश का खुलासा हुआ, उसने पूरे प्रदेश को हिला दिया—
- शिशु मंदिर से चोरी कर लिया गया था।
- आरोपी दंपति (जितेंद्र और गीता) ने स्वयं बच्चे की माँ को बातचीत में उलझाया.
- पहले से बाय आउट डील (
Buy-Out Deal Agreement) 5 लाख रुपये में तय कर ली गयी थी. - खरीदने वाला दंपति काफ़ी समय से निःसंतान (
Childless Couple Registry Check Evidence) श्रेणी में था. - उनकी आर्थिक लेन–देन क्षमता को देखते हुए सौदा 5 लाख में तय हुआ था (
Cash Deal Trace Evidence). - मासूम को इंसानी–तस्करी–नेटवर्क का हिस्सा बनाकर दूसरे शहर भेजने की तैयारी थी.
- अपराध में बैग, बोरी, और मोबाइल भुगतान–सौदा (
Digital Payment Trace Edge Case) भी साफ़ रूप से सामने आया है.
जितेंद्र ने पूछताछ में बताया—
“बच्चा नीशू और गरिमा को देना था। PG में ट्रांसफर कराने से पहले डील फाइनल करनी थी। लेकिन पैसे पूरे मिलने से पहले ही पुलिस पहुँच गयी।”
⚖ लागू धाराएँ और अपराध की गंभीरता
पुलिस ने इस अपराध को निम्न धाराओं में दर्ज किया है—
- धारा 87 – बाल–तस्करी
- धारा 103(1) – हत्या का प्रयास (यदि सौदा हिंसक रूप लेता तो)
- धारा 238 – साक्ष्य मिटाने की कोशिश
- धारा 3/4 – Immoral Traffic (Prevention) Act 1956 यदि अन्य रैकेट भी जुड़े हों
- धारा 2/3 – Public Property Damage Prevention Act 1984 (स्थल पर सबूत नष्ट करने का प्रयास)
केस को हाई–प्राथमिकता (High Priority FIR Classification) श्रेणी में रखा गया है और जरूरत पड़ने पर प्रदेश स्तर पर SIT गठन के लिए भी संस्तुति भेजी जा सकती है, क्योंकि काण्ड संगठित नेटवर्क (Organized Child Trafficking Nexus) की श्रेणी में आता है।
🚑 बच्चे की सकुशल बरामदगी और मेडिकल जांच
शिशु को बरामद करने के बाद तुरंत में मेडिकल जांच (Pediatric Trauma Screening & Safety Check) करायी गयी। डॉक्टरों ने राहतभरी रिपोर्ट देते हुए बताया—
“शिशु पूरी तरह सुरक्षित है। कोई गंभीर शारीरिक क्षति नहीं मिली है। मानसिक ट्रॉमा की जांच जारी है क्योंकि बच्चा अभी अबोध है।”
पुलिस कमान का वक्तव्य
घटना पर DCP नगर ने कहा—
“यह अपराध अंधे लालच, देह–तस्करी कनेक्ट–लाइन और पारिवारिक नियंत्रण–अहम का मिश्रित स्वरूप था। हमने सौदा होने से पहले आरोपियों को गिरफ्तार कर शिशु की जान बचा ली। अपराधियों तक साक्ष्य चाहे जहाँ तक जाए, कानून अपना काम करेगा। आगे भी ऐसी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।”
समाज में आक्रोश और सुरक्षा की मांग
इस वारदात ने प्रदेश भर के मंदिरों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों, भीड़–भाड़ वाले आस्था केंद्रों और सेवा शिविरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों, महिला स्वयं सहायता समूह SHG Kanpur Unit; किसान ट्रांसपोर्ट यूनियन Panki Auto Sanghuttan Association; और मंदिर सुरक्षा नागरिक फोरम Temple Safety Citizen Board ने एकसाथ मांग रखी है कि :
- मंदिर में CCTV कवरेज 360 डिग्री (
360° CCTV Coverage) - महिला और बाल सुरक्षा गार्ड (
Female & Child Safety Marshals) - भिक्षावृत्ति परिवारों के लिए सेफ ज़ोन (
Safe Zone Shelter Protocol) - दीर्घकालिक चाइल्ड ट्रैकर सिस्टम (
Smart Child Tracker Tagging) - डिजिटल भुगतान की निगरानी (
Online Payment Watch Grid) - निःसंतान दंपति रजिस्ट्री जांच (Adoption Legality Confirmation)
जैसे कदम अनिवार्य किये जाएं, ताकि मासूमों की नींद कभी सियाह सौदे में न बदले।
✍ समाचार रिपोर्ट
✍🏼 रिपोर्ट : एलिक सिंह
संपादक — Vande Bharat Live TV
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समापन पंक्ति:
“ममता की गोद छिनी ज़रूर थी, पर पुलिस की फ़ुर्ती ने दुनिया जेल में, और मासूम को माँ की बाँहों में लौटा दिया!” 🚨🙏🔥












