
कटनी, रीठी।। GANESH UPADHYAY VANDE BHARAT LIVE TV NEWS KATNI MP. 
एक ओर केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा व्यवस्था मुहैया कराने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर विद्यालयों में बच्चों को बैठने तक की जगह नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के दावे बोने साबित हो रहे हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं कटनी जिले के रीठी विकास खंड मुख्यालय में संचालित शासकीय कन्या हाई स्कूल के। यहां अध्ययनरत छात्राओं का कहना है कि हम फर्स पर बैठकर पढ़ते हैं, कभी-कभी तो एक-दूसरे से बिलकुल सटकर क्लास करनी पड़ती है। बताया गया कि रीठी का कन्या हाई स्कूल महज तीन कमरों व एक स्टाफ रूम में चल रहा है। क्लास रूम इतने छोटे हैं कि कुर्सी-बैंच भी पूरी नहीं आ पाती है। नतीजन प्रदेश सरकार की भविष्य रुपी छात्राएं जमीन पर बैठती हैं, दीवारों से सटीं खड़ी रहती हैं या फिर एक-दूसरे से सटकर खड़े होकर पढ़ाई करना मजबूरी बन गया है। विद्यालय में अध्ययनरत 206 छात्राओं को बैठने के लिए मजह 3 ही कमरें हैं। 
वर्षों से बनी समस्या, अतिरिक्त कक्ष अधूरा
बताया गया कि स्कूल में अतिरिक्त कक्ष का निर्माण 2018-19 में शुरू हुआ था, जो आज भी अधूरा ही पड़ा है। यह कहना ग़लत नहीं होगा कि उक्त अतिरिक्त कक्ष विभाग की लापरवाही का शिकार होकर रह गया है। जबकि सरिया और सीमेंट पड़े सड़ रहे हैं। बार-बार लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराने के बावजूद जिला शिक्षा विभाग के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। 
बाउंड्री वॉल भी अधूरी, छात्राओं की सुरक्षा दांव पर
मुख्यालय के इस स्कूल की बाउंड्री वॉल भी वर्षों से अधूरी पड़ी है। बाहर से कोई भी अंदर झांक सकता है, आ-जा सकता है। छात्राएं और शिक्षक हर समय डरे रहते हैं। बाउंड्री वॉल का पूरा निर्माण कार्य न होने से सामाजिक तत्वों का भी खतरा बना रहता है। बच्चियों की सुरक्षा की दृष्टि से ग्राम पंचायत द्वारा बनाई गई बाउंड्री वॉल का पूरी बनेगी कोई इस बात का जबाब देने कोई धनीधोरी नहीं है। लोगों का कहना है कि जब विकास खंड मुख्यालय के ही विद्यालय में यह स्थिति है तो ग्रामीण अंचलों की कल्पना क्या कर सकते हैं।
अभिभावकों में पनप रहा आक्रोश
एक अभिभावक ने कहा कि बेटियां पढ़ने जाती हैं या त्रासदी झेलने सरकार बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा देती है। लेकिन रीठी के कन्या हाई स्कूल में तो बेटियों को बैठने तक की जगह नहीं है। यह सरासर अन्याय है। छात्राएं अब सिर्फ एक सवाल पूंछ रही हैं कि कब तक इतनी छोटी जगह पर पढ़ाई करने के लिए मजबूर रहेंगे।
पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी नहीं
देखा गया कि बाउंड्री वॉल अधूरी होने के कारण विद्यालय के परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी नहीं है। शाम ढलते ही पूरे परिसर में एकदम अंधेरा हो जाता है और फिर बाउंड्री के आभाव में सामाजिक तत्व विद्यालय परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। अंधेरे का फायदा असामाजिक तत्वों द्वारा उठाया जाता है। लोगों ने विद्यालय परिसर में रात्रि के समय प्रकाश व्यवस्था की भी मांग की है।
बीईओ ने फोन रिसीव करना नहीं समझा उचित
देखा गया कि विद्यालय परिसर की भूमि भी समतल नहीं है, जिसके चलते छात्राओं को खेल-कूद में भी भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मजाक बनी शिक्षा व्यवस्था को लेकर जब रीठी बीईओ प्रवीण तिवारी से दूरभाष पर चर्चा करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव करना भी उचित नहीं समझा। विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान देना मुनासिब ही नहीं समझ रहे हैं।









