
स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त- शिवानी जैन एडवोकेट
आंल ह्यूमन सेव एंड फॉरेंसिक फाउंडेशन डिस्टिक वूमेन चीफ शिवानी जैन एडवोकेट ने कहा कि अंग्रेज सरकार ने सेंट्रल असेंबली में दो दमनकारी बिल पास कराने की कोशिश कर रही थी। पहला बिल था ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ और दूसरा ‘ट्रेड डिस्प्यूट बिल’। पब्लिक सेफ्टी बिल को असेंबली में पास हो चुका था, वहीं दूसरे बिल पर चर्चा हो रही थी। इस बिल के तहत मजदूरों की हर तरह की हड़ताल पर पाबंदी लगाने का प्रावधान था। वहीं पब्लिक सेफ्टी बिल के तहत सकार को बिना केस चलाए ही किसी को भी गिरफ्तार करने का हक मिल रहा था। इसी दौरान भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त असेंबली पहुंचे और उन्होंने बिल के विरोध में दो बम फेंके। दोनों लोगों ने इस बात का खास ख्याल रखा कि बम से किसी को कोई नुकसान न हो। दोनों ने आजादी के नारे लगाते हुए गिरफ्तारी दी।
थिंक मानवाधिकार संगठन एडवाइजरी बोर्ड मेंबर एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार डॉ कंचन जैन ने कहा कि बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह के इस कदम से देश में अंग्रेजों के खिलाफ माहौल बना। युवाओं में आजादी की गूंज पनपी। बटुकेश्वर को उम्रकैद हुई लेकिन भगत सिंह को लाहौर हत्याकांड के मामले में फांसी दे दी गई। अंग्रेजों ने बटुकेश्वर दत्त के जीवन को मुश्किल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
मां सरस्वती शिक्षा समिति के प्रबंधक डॉ एच सी विपिन कुमार जैन, संरक्षक आलोक मित्तल एडवोकेट, ज्ञानेंद्र चौधरी एडवोकेट, डॉ आरके शर्मा, निदेशक डॉक्टर नरेंद्र चौधरी, शार्क फाउंडेशन की तहसील प्रभारी डॉ एच सी अंजू लता जैन, बीना एडवोकेट आदि ने कहा कि 1965 में बटुकेश्वर दत्त अपने जीवन की आखिरी सांस गिन रहे थे, इस दौरान भगत सिंह की मां विद्यावती देवी उनसे मिलने आई थीं। तब बिस्तर पर लेटे बटुकेश्वर ने अपनी अंतिम इच्छा बताते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि उनका अंतिम संस्कार पंजाब के उसी गांव में किया जाए, जहां उनके साथी भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव की समाधि है।
शिवानी जैन एडवोकेट
डिस्ट्रिक्ट वूमेन चीफ







