
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, बुधवार 18 मार्च 2026
===-: भारत सरकार 01 अप्रैल 2026 से देश में नया इन्कम टैक्स प्रणाली लागू करने जा रही है। इन्कम टैक्स का यह नया सिस्टम 1961 की जगह लेगा। प्राप्त जानकारी अनुसार इन्कम टैक्स नियम 2026 के ड्राफ्ट के अनुसार मिडिल क्लास टैक्स पेयर्स निजी संस्थानों के कर्मचारियों और बड़े उद्योग घरानों के लिए टैक्स कैलकुलेशन के तरीके पूरी तरह से बदल जायेंगे।।नये ड्राफ्ट नियमों को 22 फरवरी 2026 तक आम जनता के सुजावों के लिए रखा गया था। इन नये टैक्स नियमों का उद्देश्य वेतन के साथ मिलने वाली सुविधाओं जैसे कि कंपनी का मकान, कार गिफ्टस की वैल्यू तय करने के लिए एक फिक्स तरीका बनाना है, जिससे टैक्स असेसमेंट कैलकुलेशन मे पारदर्शिता बनी रहे। प्राप्त जानकारी अनुसार इन्कम टैक्स नियम 2026 आधिकारिक रूप से 01 अप्रैल 2026 से लागू किया जायेगा। इसका तात्पर्य है कि यह नियम वित्त वर्ष 2026-27 की आमदनी और असेसमेंट वर्ष 2027-28 के टैक्स रिटर्न पर लागू होंगे। नया कानून FY2026-27 से प्रभावशाली होगा। सेवानिवृत फंड मे 7•5लाख से अधिक योगदान पर टैक्स। पीएफ एनपीएस सुपर एनयूएशन फंड मे वर्ष भर में 7•5 लाख रूपय से अधिक जमा होने पर टैक्स देय होगा। ड्राफ्ट रूल्स मे एक विशेष फार्मूला दिया गया है, जिससे 7•5 लाख रूपय की सीमा से ऊपर वाले कॉन्ट्रीबयुशन और उस पर मिलने वाले रिटर्न को टैक्सेबल माना जायेगा। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलने वाले एकोमोडेशन यानी घर की टैक्स वैल्यू अब शहर की आबादी के आधार पर तय किया जायेगा। 40लाख से अधिक आबादी – वेतन का 10% भाग टैक्सेबल वैल्यू माना जायेगा। 15से 40 लाख की आबादी – वेतन का 7•5 हिस्सा टैक्सेबल माना जायेगा। अन्य शहर – वेतन का 5% भाग , यदि कर्मचारी स्वयं कुछ किराया चुका रहा है तो इसे टैक्स वैल्यू मे से घटा दिया जायेगा। यदि कंपनी खुद घर किराए पर लेकर कर्मचारी को देती है तो इसके लिए अलग नियम लागू होगा। आफिस की गाड़ी पर्सनल और आधिकारिक दोनो कार्यो के लिए उपयोग करने पर फिक्स मंथली टैक्स वैल्यू तय की गई है। 1•6 लीटर इंजन तक- 5,000 रूपय प्रतिमाह। 1•6 लीटर से बड़े इंजन-7,000 रूपय प्रतिमाह। वाहन चालक की सुविधा- 3,000रूपय प्रतिमाह अतिरिक्त। त्योहारों पर गिफ्टस की लिमिट- 15,000 रूपय। आफिस मे 200रूपय तक खाना टैक्स मुक्त। एम्पलायर से लिए गए लोन पर टैक्स। यदि कंपनी बिना ब्याज या कम ब्याज पर लोन देती है तो उस फायदे पर टैक्स लगेगा। टैक्स का कैलकुलेशन एसबीआई ब्याज दर के आधार पर तय होगा। दो लाख रूपय तक लोन या गंभीर बीमारी के इलाज के लिए गए लोन पर कोई टैक्स नही। यदि कोई ऐसा काम करता है जिस पर टैक्स नही लगता है तो उससे जुड़े हुए खर्चों को क्लेम करने का नया फार्मूला भी आया है।।निवेश की एवरेज सालाना वैल्यू का 1% हिस्सा खर्च के रूप मे माना जायेगा। परंतु यह राशि क्लेम किए गए कुल खर्च से अधिक नही हो सकती है। विदेशी डिजिटल बिजनेस पर दो करोड़ रुपए की लिमिट।






