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2 साल से जर्जर सड़क ने बढ़ाई मुसीबत: 15 गांवों के हजारों ग्रामीण परेशान, रिसदा में क्लिंकर गिरने से हादसे

सीधे प्रभावित गांव इस मार्ग की बदहाली से प्रभावित होने वाले प्रमुख गांवों में कोकड़ी, रिसदा, ढाबाडीह, सेमहराडीह, पड़कीडीह, चडी, करही, सुहेला, हथबंद, नवापारा, बिटकुली, केसली, सितापार सहित अन्य गांव शामिल हैं।


बलौदा बाजार। जिले के ग्रामीण इलाकों में सड़क की दुर्दशा अब आम जनजीवन के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। बलौदा बाजार से सिमगा को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग पिछले दो वर्षों से नवीनीकरण की बाट जोह रहा है, लेकिन आज तक कार्य शुरू नहीं हो सका। इस लापरवाही का खामियाजा करीब 15 गांवों के हजारों ग्रामीणों को रोजाना भुगतना पड़ रहा है।
रविवार सुबह करीब 7 बजे ग्राम रिसदा में हालात उस वक्त और भयावह हो गए जब सीमेंट निर्माण में उपयोग होने वाले क्लिंकर का चूरा सड़क पर फैल गया। सड़क पहले से ही गड्ढों और धूल से भरी हुई थी, ऐसे में क्लिंकर गिरने से कई लोग फिसलकर गिर पड़े, तो कई वाहन चालक अनियंत्रित हो गए। गनीमत रही कि इस घटना में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन यह घटना प्रशासन की अनदेखी की पोल खोलने के लिए काफी है।
सड़क या हादसों का जाल?
बलौदा बाजार-सिमगा मार्ग की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों से बचने के प्रयास में वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़क और भी जर्जर होती जा रही है।
कच्चे माल का गिरना बना मुसीबत
इस मार्ग से गुजरने वाले भारी वाहन—जो क्लिंकर, कोयला, जिप्सम और रेत जैसे कच्चे माल का परिवहन करते हैं—अक्सर सड़क पर सामग्री गिरा देते हैं। यह सामग्री छोटे-छोटे कणों में बदलकर धूल का रूप ले लेती है, जिससे पूरे क्षेत्र में डस्ट प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे न केवल राहगीरों को परेशानी हो रही है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
धूल और गड्ढों के बीच जीने को मजबूर ग्रामीण
सड़क की खराब स्थिति के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग, किसान—सभी इस बदहाल मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। सड़क पार करना तक जोखिम भरा हो गया है।
स्वीकृति के बाद भी काम शुरू नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग के नवीनीकरण के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है, इसके बावजूद कार्य शुरू नहीं किया गया है। यह सवाल अब हर किसी के मन में है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि दो साल बाद भी निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।
बारिश से पहले बढ़ी चिंता
अब जबकि मानसून आने में महज दो महीने का समय बचा है, ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। अगर बारिश शुरू हो गई, तो सड़क की हालत और बदतर हो जाएगी और नवीनीकरण कार्य फिर टल सकता है। यह मुद्दा अब आम जनचर्चा का विषय बन गया है।
वीआईपी भी गुजरते हैं, फिर भी अनदेखी क्यों?
हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से उद्योगों के बड़े अधिकारी, जनप्रतिनिधि—विधायक, सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी गुजरते हैं, इसके बावजूद सड़क की हालत में सुधार नहीं हो पा रहा है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द से जल्द सड़क का नवीनीकरण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।
सीधे प्रभावित गांव
इस मार्ग की बदहाली से प्रभावित होने वाले प्रमुख गांवों में कोकड़ी, रिसदा, ढाबाडीह, सेमहराडीह, पड़कीडीह, चडी, करही, सुहेला, हथबंद, नवापारा, बिटकुली, केसली, सितापार सहित अन्य गांव शामिल हैं।
बलौदा बाजार-सिमगा मार्ग की जर्जर स्थिति अब केवल एक सड़क की समस्या नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की रोजमर्रा की पीड़ा बन चुकी है। प्रशासन की सुस्ती और लापरवाही के चलते हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक होता है।

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