225 कलाकार, 3 मंच और जीवंत ऐतिहासिक प्रस्तुति में दिखा प्राचीन भारत का स्वर्णिम वैभव, ‘सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव’ का भव्य आगाज
चन्दौली वाराणसी में शुक्रवार को सांस्कृतिक वैभव और ऐतिहासिक गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब तीन दिवसीय ‘सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन का उद्घाटन Yogi Adityanath और Mohan Yadav ने संयुक्त रूप से किया।
बीएलडब्ल्यू (बनारस लोकोमोटिव वर्क्स) स्थित सूर्य सरोवर मैदान में आयोजित इस महोत्सव ने काशी को मानो प्राचीन भारत के स्वर्णिम युग में पहुंचा दिया।3 मंच, 225 कलाकार और जीवंत इतिहास
महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ में 225 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया। तीन भव्य मंचों पर एक साथ विभिन्न दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राजतिलक, युद्ध कौशल, न्यायप्रियता और प्रजा सेवा तक की गाथा को जीवंत किया गया।
मंचन में 18 घोड़े, हाथी, रथ, ऊंट और पालकी जैसे वास्तविक तत्वों का उपयोग किया गया, जिससे पूरा दृश्य अत्यंत सजीव और रोमांचकारी बन गया।
महाकाल की भस्म आरती से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और महाकाल की भस्म आरती की झलक के साथ हुई। दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरा परिसर “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा।योगी आदित्यनाथ का संबोधन
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक राजा नहीं, बल्कि न्याय, धर्म और लोककल्याण के प्रतीक थे।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और इतिहास से जोड़ने का कार्य करते हैं। साथ ही उन्होंने “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की अवधारणा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।मोहन यादव ने बताया—विक्रमादित्य प्रेरणा के स्रोत
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के महान शासकों में से एक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवित है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारें मिलकर पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही हैं।
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भेंट
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी” भेंट की। यह विशेष घड़ी बाद में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित की जाएगी।हाई-टेक मंचन और भव्य तकनीक
कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक का भी शानदार उपयोग किया गया।
हाई-टेक लाइटिंग
डिजिटल साउंड इफेक्ट
LED बैकड्रॉप
स्मोक और स्पेशल इफेक्ट्स
इन सबने मिलकर आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया।
हजारों दर्शकों की उमड़ी भीड़
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस आयोजन का आनंद लिया। कई दर्शकों ने इसे “लाइव इतिहास की किताब” जैसा अनुभव बताया।संस्कृति से जुड़ने का संदेश
यह महोत्सव केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, न्याय व्यवस्था और आदर्श शासन प्रणाली को समझाने का एक प्रयास है।
सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि—
👉 न्याय सर्वोपरि है
👉 शासक का कर्तव्य प्रजा की सेवा करना है
👉 ज्ञान और विद्वता का सम्मान 

आवश्यक







