
सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664*पुलिस केवल अपराधियों के खिलाफ सख्त नहीं होती, बल्कि आम जनमानस की भावनाओं की रक्षक भी होती है। इसका जीवंत उदाहरण आज सागर के सीसीटीवी कंट्रोल रूम में देखने को मिला। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर लोकेश कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में सीसीटीवी कंट्रोल रूम सागर की टीम ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए एक बुजुर्ग महिला की गुम हुई मिक्सी को 5 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ढूंढ निकाला। एक बुजुर्ग माताजी बदहवास और भावुक स्थिति में सीसीटीवी कंट्रोल रूम पहुँचीं। उन्होंने बताया कि वे अपनी मिक्सी सुधरवाकर ऑटो से घर लौट रही थीं, लेकिन उतरते समय जल्दबाजी में मिक्सी ऑटो में ही छूट गई। वह बार-बार रुआंसी होकर बस एक ही बात कह रही थीं,बेटा, मेरी मिक्सी दिलवा दो, घर जाकर क्या जवाब दूंगी। बुजुर्ग महिला की बेबसी देख कंट्रोल रूम में तैनात महिला प्रधान आरक्षक रेखा रजक ने तुरंत कमान संभाली। उन्होंने बुजुर्ग मां को ढांढस बंधाया और कंट्रोल रूम की विशाल स्क्रीन पर सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया। चुनौती: शहर के व्यस्ततम मार्गों पर उस विशेष ऑटो की पहचान करना।लगातार 5 घंटे तक दर्जनों कैमरों के फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। अंततः धैर्य और तकनीकी सूझबूझ से उस ऑटो को ट्रेस कर लिया गया और चालक से संपर्क कर मिक्सी बरामद की गई। जब पुलिस ने बुजुर्ग माताजी को उनकी अमानत सुरक्षित सौंपी, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने गदगद होकर पुलिसकर्मियों के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। हालांकि मिक्सी की कीमत आर्थिक रूप से कम हो सकती है, लेकिन एक बुजुर्ग के लिए वह उसकी जिम्मेदारी और स्वाभिमान का प्रतीक थी। हमारी प्राथमिकता केवल बड़े अपराध रोकना नहीं, बल्कि हर उस नागरिक की मदद करना है जो अपनी समस्या लेकर हमारे पास आता है। बुजुर्ग मां के चेहरे की वह मुस्कान ही हमारी ड्यूटी का सबसे बड़ा पुरस्कार है।वरिष्ठ अधिकारियों ने महिला प्रधान आरक्षक रेखा रजक और पूरी टीम की इस मानवीय पहल की सराहना की है। सागर पुलिस का यह कार्य ‘देशभक्ति-जनसेवा’ के मूल मंत्र को चरितार्थ करता है। बुजुर्ग महिला की छोटी सी परेशानी को पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी समझा,सीसीटीवी कैमरों के नेटवर्क का सही इस्तेमाल कर 5 घंटे में मिली सफलता।



