
झालावाड़ | 27 जनवरी 2026।
कुछ संकल्प शोर नहीं करते, वे चुपचाप इतिहास रचते हैं। ऐसा ही एक संकल्प 27 जनवरी 2025 को लिया था झालावाड़ के कवि एवं संवेदनशील साहित्यकार शैलेंद्र जैन ‘गुनगुना’ ने, जब वे शहीद निर्भय सिंह स्मारक के पास से गुज़रे और उसकी बदहाली देखकर उनका मन भीतर तक आहत हो गया।
धूल से ढका शहीद का नाम, मुरझाए फूल और उपेक्षा की खामोशी… यह दृश्य उनके लिए असहनीय था। उसी पल उन्होंने मन ही मन प्रण लिया—
“जिस शहीद ने देश को अपना आज दिया, उसके स्मारक को मैं रोज़ संवारूंगा।”
यह कोई एक दिन का भाव नहीं था, यह एक जीवन-संकल्प था। बीते एक पूरे वर्ष से कवि शैलेंद्र जैन गुनगुना बिना रुके, बिना थके, बिना प्रचार के, हर दिन शहीद निर्भय सिंह स्मारक की सफाई कर रहे हैं। झाड़ू उनके हाथ में है, लेकिन भावना में श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रप्रेम है।
उनकी यह सेवा किसी मंच की मोहताज नहीं रही। राह से गुजरने वाले नागरिक रुकते हैं, नमन करते हैं और मन ही मन पूछते हैं—
क्या हम अपने शहीदों के लिए इतना भी नहीं कर सकते?
कवि गुनगुना का यह मौन कर्म आज झालावाड़ के लिए एक जीवंत संदेश बन चुका है कि देशभक्ति भाषणों में नहीं, रोज़ के छोटे-छोटे कर्मों में बसती है।
शहीद निर्भय सिंह को यह सच्ची श्रद्धांजलि केवल फूलों से नहीं, बल्कि निरंतर सेवा से अर्पित की जा रही है।




