


🚨🔥 “देवबंद के लालवाला में जमीन विवाद ने लिया हिंसक मोड़: हिस्ट्रीशीटर समेत दो गिरफ्तार, जातीय तनाव फैलाने की साजिश का खुलासा!” 🔥🚨
सहारनपुर। जनपद के थाना देवबंद क्षेत्र के ग्राम लालवाला में जमीन कब्जे को लेकर उपजा विवाद अब गंभीर कानून-व्यवस्था का मामला बन गया है। पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, विवादित भूमि को लेकर सुनियोजित तरीके से जातीय तनाव फैलाने, भीड़ को भड़काने, पुलिस पर हमला करने और बलपूर्वक कब्जा करने की कोशिश के आरोप में पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर शेर सिंह उर्फ शेरू समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूरे मामले ने गांव में तनाव का माहौल पैदा कर दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस और पीएसी बल तैनात कर दिया है।
पुलिस के अनुसार, दिनांक 09 मई 2026 को वादी रविन्द्र सिंह पुत्र रमेश राणा निवासी ग्राम लालवाला द्वारा थाना देवबंद में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि करीब 15 वर्ष पूर्व खरीदी गई जमीन, जिस पर वह लगातार कब्जे में था और आबादी व घेर बना चुका था, उस जमीन की बढ़ती कीमत और आबादी क्षेत्र में आने के कारण कुछ लोगों की नीयत खराब हो गई। आरोप है कि गांव के रामचंद्र, हिस्ट्रीशीटर शेर सिंह उर्फ शेरा पुत्र कबूला तथा अन्य लोगों ने विवादित जमीन पर कब्जा करने के लिए जातीय माहौल बनाने की रणनीति तैयार की।
पुलिस जांच में सामने आया कि नरेश पुत्र रामसिंह के नाम चकबंदी रिकॉर्ड में भूमि अंकित होने का फायदा उठाकर पूरे विवाद को जातीय रंग देने की कोशिश की गई। आरोप है कि रामचंद्र और उसके साथियों ने गांव के सुमित पुत्र कंवर सिंह, आशीष पुत्र सतेंद्र तथा अन्य लोगों के साथ मिलकर माहौल भड़काने का प्रयास किया। रविदास जयंती के मौके पर रविन्द्र के घर के सामने संत रविदास और डॉ. भीमराव अंबेडकर के संयुक्त बोर्ड लगाए गए ताकि विवाद को सामाजिक और जातीय स्वरूप देकर जमीन पर दबाव बनाया जा सके।
प्रेस नोट के अनुसार, 05 मई 2026 को महाराणा प्रताप जयंती के अवसर का फायदा उठाकर रामचंद्र ने लाउडस्पीकर से गांव के लोगों को मंदिर पर इकट्ठा होने का ऐलान किया और यह अफवाह फैलाई कि रविन्द्र जमीन जोत रहा है। सूचना मिलने पर डायल-112 और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाल लिया। इसके बाद 07 मई और फिर 08 मई को भी माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। 08 मई को सुबह करीब 10:30 बजे अफवाह फैलाई गई कि विवादित जमीन पर महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थापित की जा रही है। इसके बाद भीड़ को भड़काकर रविन्द्र के घर पर हंगामा किया गया। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस को जांच में यह बात झूठी मिली।
इसके बावजूद 09 मई 2026 को हालात और बिगड़ गए जब आरोप है कि रामचंद्र, हिस्ट्रीशीटर शेर सिंह उर्फ शेरा और करीब 40-50 महिला-पुरुष ट्रैक्टरों के साथ रविन्द्र के घर पहुंचे। आरोपियों के हाथों में ईंट, पत्थर, लाठी, डंडे, सरिया और धारदार हथियार थे। पुलिस के अनुसार, उपद्रवियों ने घर पर हमला और पथराव किया तथा वहां सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर भी हमला करने और ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। पुलिस बल ने स्थिति संभालते हुए भीड़ को खदेड़ा, लेकिन अधिकांश आरोपी मौके से फरार हो गए।
वादी रविन्द्र राणा की तहरीर के आधार पर थाना देवबंद में मु0अ0सं0 329/26 धारा 191(2), 109(1), 115(2), 352, 351(3), 333, 324(2), 3(5) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, ऑडियो क्लिप्स, सीडीआर और गवाहों के बयान जुटाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि हो रही है।
जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है कि गाटा संख्या 4267 एवं पुराने गाटा 2344/2 की विवादित भूमि पर लंबे समय से रविन्द्र सिंह का कब्जा है और वहां आबादी व निर्माण कार्य मौजूद है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए भूमि पर बलपूर्वक कब्जे का प्रयास किया गया।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 13 मई 2026 को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में पहला नाम हिस्ट्रीशीटर शेर सिंह उर्फ शेरू पुत्र कबूला उर्फ कबूल सिंह निवासी ग्राम लालवाला थाना देवबंद का है, जबकि दूसरा आरोपी अक्षय पुत्र ऋषिपाल निवासी ग्राम लालवाला है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार शेर सिंह उर्फ शेरू का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ देवबंद थाने में कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें आर्म्स एक्ट, मारपीट, अवैध शराब, फायरिंग और अन्य अपराध शामिल हैं। वर्ष 2024 में उस पर आर्म्स एक्ट और बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। इससे पहले 2016 में मारपीट और घर में घुसकर हमला करने का केस भी दर्ज हुआ था। इसके अलावा 2004 से लेकर 2026 तक उस पर अवैध शराब और अन्य आपराधिक मामलों में कई मुकदमे चल रहे हैं।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि गांव में शांति व्यवस्था पूरी तरह कायम है और किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में लगातार पुलिस गश्त और निगरानी जारी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जमीन विवादों को जातीय और सामुदायिक रंग देकर माहौल खराब करने की कोशिश आखिर कब तक होती रहेगी। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है।
✍ रिपोर्ट: एलिक सिंह
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🖋 संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़












