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Khargone (West Nimar)

बड़ी खबर | करही में पटवारी लोकायुक्त के जाल में, किसानों की फसलों की सुरक्षा पर सवाल!

29 Oct 2026, 03:22 PM • Vande Bharat Live TV News
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बड़ी खबर | करही में पटवारी लोकायुक्त के जाल में, किसानों की फसलों की सुरक्षा पर सवाल! - खरगोन (पश्चिम निमाड़), मध्य प्रदेश

बड़ी खबर | करही में पटवारी लोकायुक्त के जाल में, किसानों की फसलों की सुरक्षा पर सवाल! किसान दिन-रात मेहनत करता है, अपनी पूंजी लगाता है और खून-पसीना बहाकर खेतों में फसल तैयार करता है।

लेकिन जब उसी किसान की खड़ी फसल पर बुलडोजर और जेसीबी चलने लगे, तो आखिर उसकी मेहनत की भरपाई कौन करेगा? खरगोन जिले की महेश्वर तहसील के करही से एक तरफ लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां एक पटवारी को कथित तौर पर 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

वहीं दूसरी तरफ, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और किसानों की फसलों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर राजस्व विभाग की जिम्मेदारी किसानों के अधिकारों की रक्षा करना है या उन्हें अपनी ही जमीन पर नुकसान का सामना करना पड़ेगा?

आइए, जानते हैं पूरी खबर। 🔴 लोकायुक्त की कार्रवाई
खरगोन जिले के करही क्षेत्र में 28 अक्टूबर 2026 को लोकायुक्त इंदौर की टीम ने पटवारी सुनील पटेल के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई की।

लोकायुक्त कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता कपिल राठौर ने आरोप लगाया था कि कृषि भूमि के बटांकन और नामांतरण के कार्य के बदले उनसे 4 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत का सत्यापन करने के बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई की।

जारी जानकारी के मुताबिक, पटवारी को करही के नेहरू मार्केट में विपुल टायर के पास शिकायतकर्ता से कथित रिश्वत राशि लेते हुए पकड़ा गया। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जानकारी दी गई है।

यह कार्रवाई एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आम नागरिकों को अपने वैध राजस्व कार्य करवाने के लिए किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, मामले में अंतिम दोष सिद्ध होने का निर्णय सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन होगा।

🔴 किसानों की खड़ी फसल पर जेसीबी चलाने का मामला
अब बात करते हैं किसानों के उस दर्द की, जिसकी आवाज अक्सर सरकारी दफ्तरों तक पहुंचने के बाद भी जवाब का इंतजार करती रहती है। खरगोन जिले के नागझिरी क्षेत्र में रास्ते को लेकर चल रहे भूमि विवाद में किसान की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है।

संबंधित किसान का आरोप है कि खेत में रास्ता खोलने के लिए जेसीबी और ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया गया, जिससे फसल और खेत की मेड़ को नुकसान पहुंचा। किसान के अनुसार, मौके पर विधिवत सीमांकन और पंचनामा नहीं बनाया गया तथा प्रभावित किसान को कार्रवाई की पूरी जानकारी भी नहीं दी गई।

इस मामले में किसान ने फसल के नुकसान का आकलन कराकर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग उठाई है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी रास्ते को लेकर विवाद है, तो क्या उस विवाद का समाधान किसान की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाकर किया जाना चाहिए?

क्या प्रभावित किसान की शिकायत सुने बिना और नुकसान का आकलन किए बिना मामले को उचित तरीके से सुलझाया जा सकता है? इन सवालों का जवाब संबंधित राजस्व अधिकारियों और प्रशासन को देना चाहिए।

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जमीन की खरीद-बिक्री और रास्तों से जुड़े विवादों में यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में नियमों को दरकिनार किया जाता है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जमीन संबंधी प्रत्येक विवाद का निपटारा राजस्व अभिलेखों, लागू नियमों और निष्पक्ष प्रक्रिया के आधार पर हो।

किसी किसान की मेहनत से तैयार फसल को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए। 🔴 प्रशासन से सीधे सवाल
अब सवाल खरगोन जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से हैं।

पहला सवाल—यदि किसी खेत में रास्ता खोला जाता है, तो क्या संबंधित रिकॉर्ड, सीमांकन और लागू कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था? दूसरा सवाल—यदि किसान की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है, तो उसका आकलन कौन करेगा और किसान को मुआवजा कब मिलेगा?

तीसरा सवाल—यदि किसान की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती, तो उसकी जवाबदेही किस अधिकारी की होगी? और चौथा सवाल—यदि राजस्व कार्यों में रिश्वत मांगने की शिकायतें सामने आती हैं, तो आम किसान भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी शिकायत कहां और कैसे दर्ज कराए?

इन सवालों पर प्रशासन का जवाब और निष्पक्ष जांच जरूरी है। याद रखिए, किसान की फसल केवल खेत में खड़ी फसल नहीं होती।

उसमें किसान की मेहनत, लागत, परिवार की उम्मीद और पूरे साल की आजीविका जुड़ी होती है। किसी भी भूमि विवाद का समाधान कानून के अनुसार होना चाहिए।

यदि किसान की फसल को नुकसान पहुंचा है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और नियमानुसार मुआवजा मिलना चाहिए। करही में लोकायुक्त की कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

वहीं, किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने जैसे मामलों में भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। हमारा सवाल किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि व्यवस्था से जवाब मांगना है।

किसान को न्याय कब मिलेगा? राजस्व विभाग जवाबदेह कब बनेगा?

इसी सवाल के साथ, कैमरे की नजर और जनता की आवाज बनकर हम उठाते रहेंगे जनहित के मुद्दे।

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