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रोजगार सहायक ने नियमों को ठेगा दिखाकर बनाया जॉब कार्ड

सीधी। फर्जीवाडे की भी आति होती है लेकिन लालच की कोई आति नहीं होती और उसी लालच में आकर रोजगार सहायक रजनीश द्विवेदी ने नियम कायदों को ठेंगा दिखाते हुए फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। इसके कई नमूने अभी तक सामने आ चुके हैं और एक नया नमूना भी सामने आया है जिसमें रोजगार सहायक ने जॉब कार्ड में जिसे कि एक पहचान पत्र के रूप में भी मान्यता दी गई है उसमें भी फर्जीवाड़ा किया ताकि उसकी काली करतूतो पर पर्दा पड़ा रहे लेकिन अफसोस कि ऐसा हो ना सका। देखिए कि किस तरह के जॉब कार्ड रजनीश द्विवेदी ने बनाए हैं-

महावीर पिता महावीर

कुसुमकली पत्नी कुसुमकली

त्रिलोक सिंह पिता त्रिलोक सिंह

दिलनाज और दिलनाज

अर्पिता कुमारी पुत्री अर्पिता

कृतिका पुत्री कृतिका

सीमा पुत्री सीमा

निर्मला पुत्री निर्मला

सुनीता पुत्री सुनीता

शालिनी और शालिनी

अजेश कुमार पिता अजेश

देवी प्रसाद पिता देवी

जानवी और जानवी

शमा और शमा

अमन सिंह पिता अमन

विजय कुमार पिता विजय

विवेक कुमार पिता विवेक

खेलावन पिता खेलावन

संतोषी और संतोष

रमेश कुमार पिता रमेश

शिवानी और शिवानी

प्रीती और प्रीती

पूनम और पूनम

रोशनी और रोशनी

अर्चना और अर्चना

आंचल और आंचल

रेशमी और रेशमी

ललुआ पिता ललुआ

विमल पिता विमल

किरण और किरण

सत्यम पिता सत्यम

विपिन पिता विपिन

यह तो महज कुछ एक सैंपल है बाकी सैकड़ो की तादात में रोजगार सहायक रजनीश द्विवेदी द्वारा ऐसे जॉब कार्ड बनाए गए हैं जिम पिता या पति के नाम की जगह भी हितग्राही का ही नाम लिखा हुआ है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि रोजगार सहायक रजनीश द्विवेदी जो खुद कोडार के निवासी है लेकिन उन्हें सैकड़ो हितग्राहियों के जॉब कार्ड में पिता या पति के नाम की जगह हितग्राही का ही नाम क्यों लिखना पड़ा। यह एक गंभीर षड्यंत्र और धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है।

 

 

 

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