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सारा विकास कागजों और सरकारी फाइलों तक ही सिमट कर रह गया है – धनंजय कुमार

सारा विकास कागजों और सरकारी फाइलों तक ही सिमट कर रह गया है – धनंजय कुमार

आरा। सरकारी जमीनों की सुरक्षा और संरक्षण में बिहार सरकार फेलीयर साबित हो रही है।उक्त बातें धनंजय कुमार सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष, युवा राजद सह जिला पार्षद आरा सदर ने प्रेस ब्यान जारी कर कहा। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के अधिकारी और पुलिस सरकारी जमीनों की सुरक्षा करनें और संरक्षण करने के स्थान पर मिलीभगत करके अवैध ढंग से उन पर कब्जा करवा रहें हैं।सरकारी जमीनों के अलावे सरकारी भवनों के रख-रखाव और संरक्षण में भी बिहार सरकार फेल हो गयी है।अवैध ढंग से अतिक्रमण कियें लोगों पर किसी तरह की कार्यवाई नहीं की जा रही है उल्टें अतिक्रमणकारियों को ही संरक्षित एवम प्रोत्साहित किया जा रहा है।
प्रखंड के अंचलाधिकारी और स्थानीय थानों से मिलीभगत करके बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों को दखल करनें और अतिक्रमण करनें का खेल व्यापक पैमानें पर चल रहा है।जिलें के वरीय अधिकारी इस विषय पर संज्ञान लेने के स्थान पर कानों में तेल डाल कर सो रहें हैं।सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि बहुत सारे मामलों में जिला के विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारियों के अतिक्रमण हटानें संबंधी आदेशों को भी अंचलाधिकारियों और थानाध्यक्षों के द्वारा धत्ता बताते हुये सरकारी जमीनों पर कब्जा करवाया जा रहा है।जिसका नतीजा है कि बहुत सारी सरकारी जमीनों के साथ ही विभिन्न विभागों के सरकारी भवन भी अतिक्रमित कर लिये गयें हैं।मौजूदा वस्तुस्थिति यह है कि यह कहनें में कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि थानाध्यक्षों के द्वारा सरकारी जमीनों को औने-पौनें दामों पर बेचा जा रहा है।इनके आदेश‌ और सहयोग से जिसे जहां मन हो आवश्यकतानुसार सरकारी जमीनों की घेराबंदी करा सकता है ।
सरकारी सेवा में रहते हुये सरकारी जमीनों को सुरक्षित रखनें की जिम्मेवारी इन लोगों के द्वारा बखुबी निभाई जा रही है। हालात ऐसे हैं कि कुछ समय के बाद विकास के लियें आवश्यक भवनों, सड़कों, विद्यालयों एवम स्वास्थ्य केंद्रों इत्यादि के निर्माण के लिये सरकारी जमीनें नहीं मिल पायेगीं।थानों के द्वारा अवैध दखलकारों और अतिक्रमणकारियों को संरक्षित एवम प्रोत्साहित किया जा रहा है।शनिवारी बैठकों में नीजी जमीनों के दखल -कब्जा से संबंधित आवेदनों के आलोक में पुलिस तत्काल उगाही की नियत से संबंधित पक्ष के पास पहूंचती है और नजराना के आधार पर ही तय करती है कि किस पक्ष को मदद किया जाये किस पक्ष को नहीं किया जाये । परंतु सरकारी जमीनों और भवनों के मामलों में संबंधित विभागों के वरीय अधिकारियों द्वारा बार-बार निदेश दिये जानें के पश्चात भी पुलिस झांकने तक नहीं जाती है उल्टे कब्जाधारियों और अतिक्रमणकारियों से मोटी रकम ले कर सो जाती है।इससे यह भी साबित होता है कि पुरा सिस्टम ही फेल हो गया है।जब अंचलाधिकारियों एवम थानाध्यक्षों के द्वारा जिला के वरीय पदाधिकारियों की बातों को लगातार अनसुना कर‌ दिया जा रहा है तब आम जनता की बातों को इनके द्वारा कितना सुना जाता होगा यह समझनें का विषय है।
सुसाशन बाबु के राज में अब सरकारी जमीने भी बिकनें लगीं‌, सरकारी भवनों का आवंटन भी निजी हाथों को प्राप्त होनें लगा है, इसे ही न्याय के साथ विकास कहतें हैं।इनका सारा विकास कागजों और सरकारी फाइलों तक सिमट कर रह गया है।चाहे वह नल-जल की योजना हो चाहे नली-गली की योजना हो, चाहे शिक्षा एवम स्वास्थ्य से संबंधित योजनायें हों, चाहे जमीन का सर्वे‌ ही हो।ऐसे ढोंगीं -विकास पुरूष को आगामी चुनाव में सबक सिखानें की आवश्यक्ता है।

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