

मौजा जिगना एवं खैटी के रैयतों के साथ मुआवजा भुगतान हेतु, जिला प्रशासन द्वारा की गई समन्वय बैठक
भारतमाला परियोजना (वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे) के अंतर्गत अधिग्रहित भूमि के मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। 27 जनवरी 2026 को आयोजित इस बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी, भभुआ, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी कैमूर और अंचलाधिकारी चाँद ने मौजा जिगना एवं खैटी के रैयतों (किसानों) के साथ सीधे संवाद किया।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने रैयतों से सीधा संवाद स्थापित कर मुआवजा भुगतान की वर्तमान स्थिति और आ रही तकनीकी बाधाओं पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में कई रैयतों ने अपनी समस्याओं को साझा किया, जिस पर अनुमंडल पदाधिकारी ने आश्वासन दिया कि त्रुटिपूर्ण दस्तावेजों और पारिवारिक विवादों के मामलों को नियमानुसार कैंप लगाकर सुलझाया जाएगा।
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने कहा कि जिन रैयतों के कागजात पूर्ण हैं, उनके मुआवजे की राशि का भुगतान तत्काल सुनिश्चित किया जाएगा।
बैठक के दौरान रैयतों द्वारा उठाई गई आपत्तियों और तकनीकी समस्याओं को सुना गया। अंचलाधिकारी, चाँद को निर्देशित किया गया कि वंशावली और खाता सत्यापन जैसे कार्यों में किसानों को अनावश्यक परेशानी न हो।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भारतमाला परियोजना एक राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है और इसमें रैयतों का हित सर्वोपरि है। भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जा रही है।
प्रशासन ने मौजा जिगना के सभी संबंधित रैयतों से अपील की है कि वे अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और भूमि से संबंधित अद्यतन कागजात संबंधित अंचल कार्यालय या भू-अर्जन कार्यालय में जमा करें, ताकि भुगतान की प्रक्रिया में कोई विलंब न हो।
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ सभी पात्र किसानों को उनका उचित मुआवजा समय पर मिल जाए। अनुमंडल पदाधिकारी भभुआ ने रैयतों को आश्वस्त किया कि किसी भी विसंगति की स्थिति में वे सीधे कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
( कैमुर से अफसार आलम की रीपोर्ट)




