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मंत्री के जिले में अवैध शराब का जाल? पार्षद पर आरोप, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

सूत्रों का दावा – लंबे समय से चल रहा अवैध कारोबार, जिम्मेदारों की चुप्पी से बढ़ी चिंता


बलौदाबाजार।
जिले में इन दिनों अवैध शराब के कारोबार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के अनुसार, यह अवैध गतिविधि कथित तौर पर लंबे समय से जारी है और अब यह मुद्दा जनचर्चा का विषय बन गया है। खास बात यह है कि यह पूरा मामला उस जिले में सामने आ रहा है, जो प्रदेश के कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा के प्रभार क्षेत्र में आता है, जिससे प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर सवाल और भी गहरे हो गए हैं।
सूत्रों का दावा है कि एक भाजपा पार्षद, गौतम चौहान, पर इस अवैध शराब कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही चर्चाओं और स्थानीय स्तर पर उठ रही आवाजों ने मामले को गंभीर बना दिया है।
बताया जा रहा है कि जिले के कई हिस्सों में अवैध शराब की बिक्री और सप्लाई का नेटवर्क सक्रिय है, जो लंबे समय से बिना किसी बड़े अवरोध के संचालित हो रहा है। यदि यह सच है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर प्रशासन और संबंधित विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी, या फिर इस पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
इस पूरे प्रकरण में आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह विगत लंबे समय से चल रहा है। इसके बावजूद यदि जिम्मेदार विभाग अनजान बना हुआ है, तो यह या तो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है या फिर व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है।
विडंबना यह है कि जिन पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे सार्वजनिक रूप से सेवा कार्यों, सामाजिक कार्यक्रमों और जनहित के मुद्दों में सक्रिय नजर आते हैं। ऐसे में “एक तरफ सेवा और दूसरी तरफ अवैध कार्यों में संलिप्तता” जैसी स्थिति जनता के बीच चर्चा और संदेह का विषय बन गई है।
जिले के बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके। साथ ही यह भी आवश्यक है कि बेबुनियाद आरोपों की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि समय रहते इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह न केवल कानून व्यवस्था बल्कि जनता के विश्वास पर भी असर डाल सकता है।

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