

अंबेडकरनगर से चौंकाने वाला खुलासा: 1 महीने में 70 से अधिक लड़कियां गायब, अपहरण और मतांतरण की साज़िश का अंदेशा
अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर ज़िले से एक ऐसी सनसनीखेज़ खबर सामने आई है जिसने पूरे क्षेत्र की नींद उड़ा दी है। बीते एक महीने के भीतर यहाँ से 70 से अधिक लड़कियां रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई हैं। इनमें से 56 मामलों में पुलिस ने बाकायदा अपहरण की एफआईआर दर्ज की है, जबकि 15 से अधिक लड़कियां ऐसी हैं जिनके परिवारवालों ने लोकलाज और सामाजिक बदनामी के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराई। गायब होने वाली ज्यादातर लड़कियां अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से कमजोर तबके से ताल्लुक रखती हैं, जिससे इस पूरे मामले को सामाजिक दृष्टि से और भी संवेदनशील माना जा रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि लड़कियों को प्रलोभन देकर, प्रेम जाल में फंसाकर और कभी-कभी मोबाइल फोन व पैसों के लालच के जरिए बहला-फुसलाकर घरों से भगाया गया है। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि कई मामलों में जिन युवकों के नाम सामने आए हैं, वे मुस्लिम समुदाय से जुड़े हैं और इस वजह से बड़े पैमाने पर मतांतरण और लव जिहाद की आशंका गहराने लगी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सिर्फ अगस्त माह में अकबरपुर कोतवाली में 11, मालीपुर में 9, जलालपुर में 8, अहिरौली में 7, बसखारी में 6, जैतपुर में 5, जबकि महरुआ और सम्मनपुर थानों में तीन-तीन, इब्राहिमपुर और भीटी थानों में दो-दो अपहरण के मुकदमे दर्ज किए गए हैं। यह आँकड़े दिखाते हैं कि लगभग हर थाने के दायरे में लड़कियों के गायब होने की घटनाएं हो रही हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कुछ लड़कियां पड़ोसी जनपदों या महानगरों तक ले जाई गई हो सकती हैं और इनके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है, जो पहले आर्थिक प्रलोभन और फिर प्रेम प्रसंग के नाम पर फंसाकर लड़कियों को गायब करता है। हिंदू संगठनों ने इस मामले को बेहद गंभीर बताया है और कहा है कि इतनी बड़ी संख्या में लड़कियों का एक साथ गायब होना किसी सुनियोजित षड्यंत्र से कम नहीं है। संगठनों ने आरोप लगाया है कि गरीब और कमजोर वर्ग की बेटियों को टारगेट कर उन्हें धर्मांतरण की ओर धकेला जा रहा है और प्रशासन अब तक प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हुआ है। ग्रामीण इलाकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि पुलिस पर दबाव होने के बावजूद कई मामलों में गिरफ्तारी नहीं हो रही और परिवारों को रिपोर्ट वापस लेने के लिए दबाव तक बनाया जा रहा है। यह भी सामने आया है कि कई किशोरियों को पहले सोशल मीडिया के जरिए संपर्क किया गया और फिर उन्हें मोबाइल रिचार्ज या उपहार का लालच देकर झांसा दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले तो उन्होंने इसे सामान्य किशोरावस्था की गलतियों के रूप में देखा, लेकिन जब एक के बाद एक दर्जनों मामले सामने आने लगे तो पूरा इलाका सकते में आ गया। जिले भर में माताओं और बहनों की सुरक्षा को लेकर भय का माहौल है और गाँव-गाँव में लोग अपनी बेटियों को अकेले बाहर भेजने से कतराने लगे हैं। समाज के प्रबुद्धजनों का मानना है कि इस तरह के मामलों से न केवल सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही और अपराधियों के बढ़ते हौसले ने माहौल को और भी खराब कर दिया है। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की जांच की जा रही है और गायब लड़कियों को बरामद करने के लिए टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। हालांकि, अब तक हुई बरामदगी और गिरफ्तारी के आंकड़े संतोषजनक नहीं कहे जा सकते। इसी वजह से हिंदू संगठनों ने ज़िला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है और कहा है कि अगर प्रशासन तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाता तो वे बड़े आंदोलन का रुख करेंगे। अंबेडकरनगर का यह मामला अब प्रदेश स्तर पर गूंजने लगा है और सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक जिले से इतनी बड़ी संख्या में लड़कियां कैसे गायब हो सकती हैं और अपराधियों के हौसले क्यों इतने बुलंद हैं।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़, समृद्ध भारत समाचार पत्र
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