
🚨 वंदे भारत लाइव टीवी — एक्सक्लूसिव स्पेशल रिपोर्ट 🚨

देहरादून/ऋषिकेश/कोटद्वार/टिहरी — वंदे भारत लाइव टीवी विशेष रिपोर्ट
उत्तराखंड में हजारों परिवारों के सपने तब बिखर गए जब द लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी (LUCC) लाखों-करोड़ों रुपये लेकर अचानक बंद हो गई। बेटियों की शादी, बुढ़ापे का सहारा, जमीन खरीदने का सपना और परिवार की तरक्की—हर उम्मीद एक ही रात में खत्म हो गई। अब CBI जांच शुरू होने से पीड़ितों में फिर से उम्मीद की किरण जगी है कि उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी गाढ़ी कमाई वापस होगी।
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🎙️ देखा-देखी गाढ़ी कमाई लगा दी — और ठगे गए
उत्तराखंड में ऐसे हजारों लोग हैं, जिन्होंने किसी जान पहचान वाले के भरोसे, एजेंटों के झांसे, फर्जी सेमिनारों और दिखावटी सिस्टम पर भरोसा कर निवेश किया।
किसी ने बेटी की शादी के लिए पैसे जोड़े थे, किसी ने बुढ़ापे के लिए सुरक्षा, तो किसी ने बच्चों के भविष्य के लिए बचत की थी। लेकिन जब कंपनी रातों-रात बंद हुई, तो इन परिवारों के सपने भी टूट गए।
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🟥 केस–1: मदन लाल — पड़ोसियों के कहने पर जुड़े, खुद एजेंट बने और 4 लाख खो दिए
ऋषिकेश निवासी मदन लाल ने बताया कि उन्होंने पड़ोसियों की देखा-देखी पहले निवेश किया और फिर दिनभर मेहनत कर दूसरों को भी जोड़ते गए।
👉 4 लाख रुपये निवेश
👉 एजेंट बनकर कमीशन भी उसी में जमा करा दिया
आखिर में न पैसे बचे, न उम्मीद—सिर्फ पछतावा।
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🟥 केस–2: रश्मि — अभिनेता आलोक नाथ और श्रेयस तलपड़े के सेमिनार देखकर भरोसा किया
रश्मि (ऋषिकेश) ने 2018 में जुड़कर 24 लाख रुपये जमा कर दिए।
सोसायटी के बड़े-बड़े सेमिनारों में मशहूर अभिनेता आते थे—इससे विश्वास और मजबूत हुआ।
अब वे सवाल कर रही हैं—
“जब कार्यालय खुलेआम चल रहे थे, सरकार और LIU विभाग क्या कर रहा था?”
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🟥 केस–3: तृप्ति नेगी — पिता की मदद करने निकली थीं, 8.47 लाख गंवा दिए
कोटद्वार की तृप्ति नेगी, जिनके पिता किसान व मां आशा कार्यकर्ता हैं, ने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए एजेंट का काम शुरू किया था।
👉 8.47 लाख रुपये निवेश
👉 कमीशन भी कंपनी में फिक्स कर दिया
अब शादी और परिवार की उम्मीदों पर लगा ताला—और पूरी जमा पूंजी डूब गई।
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🟥 केस–4: रंजना — एजेंट बनीं, 25 लाख रुपये फिक्स कराए, कंपनी बंद हो गई
ऋषिकेश की रंजना ने बताया कि वे लोगों से पैसे लेकर कंपनी में जमा कराती थीं।
👉 25 लाख रुपये जमा
👉 अपना कमीशन भी फिक्स कर दिया
आज लोग उनसे पैसे मांग रहे हैं, और सोसायटी उनका कोई जवाब नहीं दे रही।
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🟥 केस–5: देवराज — नौकरी छोड़कर एजेंट बने, पिता-पत्नी के नाम भी निवेश किया, 12 लाख डूबे
टिहरी निवासी देवराज को कंपनी ने दिखावटी कागजों से इतना भरोसा दिलाया कि उन्होंने प्राइवेट नौकरी छोड़ दी।
👉 पिता, पत्नी और खुद के नाम पर 12 लाख रुपये
👉 कई और लोगों को भी जोड़ दिया
अब नौकरी गई, पैसे गए—सपने भी बिखर गए।
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🟥 केस–6: महिलाओं पर सबसे बड़ा संकट—तनाव, हताशा, टूटन
सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष ने कहा कि पीड़ितों में सबसे ज्यादा महिलाएं हैं।
कई महिलाएं मानसिक तनाव से गुजरीं, कुछ ने आत्मघाती कदम तक उठाने का मन बना लिया था।
उन्होंने कहा—“हमने उन्हें सँभाला, नहीं तो स्थिति और भयावह हो सकती थी।”
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🟥 केस–7: मनीषा सजवाण — कुल 1.37 करोड़ रुपये जमा किए, अब टूट चुकी हैं
मूल रूप से टिहरी की मनीषा सजवाण, जो अब ऋषिकेश में रहती हैं, ने बताया—
👉 पहले मां ने निवेश किया
👉 फिर वे जुड़ीं
👉 बाद में एजेंट बन गईं
👉 कुल निवेश: 1 करोड़ 37 लाख रुपये
उनका सपना था कि इस पैसे से बिज़नेस शुरू करेंगी, शादी के बाद नई जिंदगी बनाएंगी।
अब वे BDC मेंबर हैं, लेकिन ये आर्थिक सदमा आज भी पीछा नहीं छोड़ता।
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⚫ लोग कहते हैं — “सपने, जिंदगी और मेहनत सब डूब गया”
हर परिवार की कहानी दर्दनाक है।
पीढ़ियों की जमा पूंजी खत्म हो गई।
कई परिवार कर्ज में डूब गए।
कई लोग मानसिक रूप से टूट गए।
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💥 अब CBI जांच से लौटा भरोसा
LUCC घोटाले की CBI जांच शुरू होने के बाद पीड़ितों को उम्मीद है कि—
✔ उनका पैसा वापस मिलेगा
✔ बड़े आरोपी पकड़े जाएंगे
✔ फर्जीवाड़े का सच सामने आएगा
✔ सरकार उन्हें न्याय दिलाएगी
CBI टीम ने दस्तावेज़ जुटाने, खातों की जांच, संदिग्ध लेनदेन और एजेंटों की भूमिका पर काम शुरू कर दिया है।
अब सभी की नजरें इस जांच पर टिकी हैं।
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📺 वंदे भारत लाइव टीवी का सवाल —
👉 क्या पीड़ितों को न्याय मिलेगा?
👉 कब तक लौटेगी उनकी गाढ़ी कमाई?
👉 क्या अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी?