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कप्तानगंज में ‘खाकी’ के साये में ‘नशे’ की खेती: क्या पुलिस की जेबें गरम कर रहे हैं गांजा माफिया?

वर्दी की सरपरस्ती में बर्बाद होती युवा पीढ़ी: कप्तानगंज पुलिस और नशे के सौदागरों की 'यारी' उजागर!

अजीत मिश्रा (खोजी)

🚨कप्तानगंज में ‘वर्दी’ के साये में महक रहा गांजा, नशे की मंडी बना थाना क्षेत्र🚨

🔥नशे का ‘सेफ जोन’ बना कप्तानगंज: खजुहा मोड़ से बरदही तक गांजा माफियाओं का राज, पुलिस मौन!

🔥योगी सरकार के ‘नशा मुक्त अभियान’ को कप्तानगंज पुलिस का ठेंगा, ठिकानों की जानकारी फिर भी कार्रवाई शून्य!

🔥कप्तानगंज पुलिस का ‘महीना’ फिक्स या सिस्टम फेल? महराजगंज बरदही में वर्षों से फल-फूल रहा गांजे का काला कारोबार!

🔥जिम्मेदारों की आँखों पर ‘कमीशन’ की पट्टी: कप्तानगंज के खजुहा मोड़ पर सरेआम बिक रहा जहर!

उत्तर प्रदेश।

बस्ती (कप्तानगंज): उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ ‘नशा मुक्त प्रदेश’ का अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के कप्तानगंज थाने की पुलिस इस मंशा पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। कप्तानगंज थाना क्षेत्र इन दिनों नशे के सौदागरों के लिए ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित ठिकाना) बन गया है। सूत्रों और स्थानीय लोगों की मानें तो पुलिस की कथित मिलीभगत और ‘महीने’ के खेल ने युवाओं की रगों में जहर घोलने का रास्ता साफ कर दिया है।

💫चिह्नित हैं ठिकाने, फिर भी पुलिस की आंखें बंद

हैरानी की बात यह है कि नशे के ठिकाने किसी से छिपे नहीं हैं। खजुहा मोड़ जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बेखौफ गांजे की पुड़िया बिक रही हैं। महराजगंज बरदही बाजार के पास ‘गोलू’ नामक व्यक्ति का नेटवर्क पिछले कई वर्षों से फल-फूल रहा है। चर्चा है कि इस नेटवर्क की जड़ें इतनी गहरी हैं कि स्थानीय पुलिस इन पर हाथ डालने के बजाय अपना हाथ ‘गर्म’ करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रही है।

💫बर्बाद होती पीढ़ी, मोटी होती जेबें

कप्तानगंज बाजार अब नशेड़ियों के लिए सबसे सुरक्षित अड्डा बन चुका है। स्कूल-कॉलेज जाने वाली नई पौध इस दलदल में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में गांजा माफियाओं का इतना आतंक है कि कोई खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं करता और जो जिम्मेदार अधिकारी हैं, वे एसी कमरों में बैठकर शायद ‘हिस्से’ का इंतजार कर रहे हैं।

💫सरकार की साख पर बट्टा

मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति को कप्तानगंज पुलिस ठेंगा दिखा रही है। जिस पुलिस पर अपराध रोकने की जिम्मेदारी है, वही नशा कारोबारियों की ‘सहयोगी’ और ‘संरक्षक’ बनकर उभरी है। पुलिस की इस मनमानी और संवेदनहीनता को लेकर पूरी जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

“नशे के इस कारोबार ने कप्तानगंज की फिजा बिगाड़ दी है। अगर समय रहते इन सफेदपोश सौदागरों और उनके खाकी मददगारों पर लगाम नहीं कसी गई, तो आने वाली पीढ़ी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।” — जनता की आवाज

अब देखना यह है कि बस्ती के आला अधिकारी इस ‘मिलीभगत’ के खेल को खत्म करते हैं या फिर कप्तानगंज पुलिस इसी तरह नशे के सौदागरों के साथ मिलकर प्रदेश सरकार की साख पर बट्टा लगाती रहेगी।

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