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कोचियाओं के हौसले बुलंद, आबकारी विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में

जनता आतंकित — अधिकारी जानते हुए भी अनदेखी के आरोप*

आभास शर्मा
बलौदाबाजार

*अवैध शराब का साम्राज्य फैलता जा रहा, आबकारी अधिकारी जालेश सिंह मौन*

*कोचियाओं के हौसले बुलंद, जनता आतंकित — अधिकारी जानते हुए भी अनदेखी के आरोप*

जिले में अवैध शराब का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में खुलेआम कच्ची व देशी शराब की बिक्री से आमजन में भय और आक्रोश का माहौल बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि इस अवैध धंधे की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे कोचियाओं के हौसले और बुलंद हो गए हैं।
स्थानीय सूत्रों एवं नागरिकों के अनुसार, अवैध शराब बिक्री का यह नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी आबकारी अधिकारी श्री जैलेश सिंह को भी कई बार दी गई, बावजूद इसके ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि शराब माफिया बेखौफ होकर अपने कारोबार को फैला रहे हैं।
कथित रूप से सक्रिय बताए जा रहे कोचियाओं के नाम
स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, निम्न व्यक्तियों के नाम बार-बार सामने आ रहे हैं—
1) *देवभूषण निर्मलकर – श्री सीमेंट क्षेत्र के आसपास कथित गतिविधियाँ*
2) *गोविंद गृतलहरे – खपराडीह क्षेत्र*
3) *लाला बंजारे*
4) *ब्रह्मा नामक व्यक्ति(कोचिया)*
(उपरोक्त सभी नामों पर लगे आरोप स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक जाँच के बाद ही संभव है।)
सामाजिक ताना-बाना प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब की आसान उपलब्धता से युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है, घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाएँ और अपराधों में इज़ाफा हो रहा है। महिलाएँ और बुज़ुर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई इलाकों में विरोध करने वालों को धमकाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं, जिससे आतंक का माहौल बन रहा है।
*प्रशासनिक उदासीनता या मिलीभगत?*
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिकायतें, सूचनाएँ और चर्चाएँ आम हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं? क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत? आमजन का विश्वास डगमगा रहा है और वे जवाब चाहते हैं।
जनता की मांग
अवैध शराब कारोबार की तत्काल उच्चस्तरीय जाँच
संदिग्ध इलाकों में लगातार छापेमारी
*दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई*
आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग इस गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह अवैध कारोबार जिले की कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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