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ग्वालियर गेट के शाही तालाब में पानी रहता है सालभर भर

जर्नल ब्यूरो चीफ, नोएडा, प्रेस रिपोर्टर राजीव कुमार सिंह सिकरवार आगरा उत्तर प्रदेश जर्नल रिच भारत हिंदी दैनिक समाचार पत्र जबलपुर मध्य प्रदेश 🙏 🇮🇳 ✍️

विभाग ने बांधों के गेटों की बर्बादी का आकलन तक नहींकिया* – सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की टीम ने गाजियाबाद सीकरी का अध्ययन किया।

आगरा का नागरिक समाज

ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट-आगरा इसकी जगह है-जागो आगरा

(आगरा के नागरिक समाज द्वारा शुरू किया गया आंदोलन)

पता- 16/16, लक्ष्मी भवन, मोती लाल नेहरू रोड, सस्ते आजम खां, आगरा-282003।

ईमेल- amritavidhya.agra@gmail.com मोबाइल-+919837820921.

दिनांक- 9-3-26.

त्रायमोरी बाँध जल भंडार को सामायिक की आवश्यकता है।

*–सिंचाई विभाग ने बांधों के गेटों की स्लाइड का अनुमान अभी तक नहीं बनाया*

सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की टीम ने अध्यापन सीकरी का अध्यन किया।

पानी की बागानों से सागर जिले का सबसे अधिक प्रभावित प्राचीन महत्ता और विरासत क्षेत्र की समस्या से झील में अकबर काल त्राता मोरी बांध अब भी उपयोगी है,बशारत बांध को पुन: जलसंचय उपयुक्त बनाया जा सके।बांध का ऐतिहासिक महत्ता और विरासत क्षेत्र का अपना महत्वपूर्ण स्थान है सागर अब यह सीकरी के जनजीवन की सर्वोच्चता सामायिक वाली की जरूरत है।

यूपी सीलिंग क्षमता विभाग के प्रबंधन वाला यह बांध क्षेत्र का सबसे बड़ा जल संरक्षण का कारण है। पिछले 40 वर्षों से निश्चिंत परियोजना स्थित है। महज़ क्षतिग्रस्त सैलास गेट (सलास गेट) और उनके दस्तावेज़ में सुधार कर इस जलसंचय और प्रबंधन प्रवाह की स्थिति वाले बांध की स्थिति में जा सकते हैं।

जिले के सबसे बड़े बांधों में जल संरक्षण और बाद में किसानों की आवश्यकता के अनुसार मांग करने के लिए केवल अजान बोध के पानी को रोके जाने के लिए केवल न केवल मिट्टी के स्तर से शुरू किया गया, बल्कि राजस्थान की ओर से आने वाली गंदगी भरी विशाल घाटियों का भी विस्तार हुआ। (दादुपुरा), पाटसाल आदि में एक चट्टान से अधिक क्षेत्र का पानी बांध शामिल है, लेकिन बांध के क्षतिग्रस्त होने का कारण पानी नहीं रुकता है।

 

*–कोई डेमोक्रेट प्रस्ताव नहीं*

 

झील मोरी बांध संरक्षण के लिए पानी की झील के दर्शन के लिए भी निश्चिंत प्रयोग किया गया है। 1972 में बाढ़ के दबाव में बांध के नीचे दो मोरियां बांध हो गया था, बाद में सील विभाग ने ठीक सामान के स्थान पर बांध की जल संग्रहण क्षमता को उपेक्षित कर दिया है। सुधार कर पुनरुद्धार: जल संरक्षण संरक्षण के लिए अब तक योजना नहीं बनाई गई है। जब तक कोई प्रस्ताव नहीं है तब तक उसे शासन से वंचित और धन कार्य के लिए फिर से प्रयास का प्रश्न ही सिद्धांत बनाना चाहिए।

*-ग्वालियर गेट के ‘शाही तालाब’ में रहता है पानी सालभर*

फैजाबाद सीकरी में स्थित गेट के पास भी ‘शाही तालाब’ के रूप में पहचान वाली एक महत्वपूर्ण जलसंरचना है। मुजफ्फरनगर सीकरी की पहाड़ियों के दक्षिणी घाट और बड़े जलग्रह मैदानी क्षेत्र में भी प्रचुर मात्रा में पानी मौजूद है। तालाब के नजदीक के किसान इस पानी का उपयोग सीना के लिए करते हैं। यह बात अलग है कि झील के किनारे तालाब का जल संचय क्षेत्र छोटा है।

 

*–स्थानीय जलग्राही क्षेत्र से अति है प्रचुर जलराशि*

 

अचल और भीषण जलकिल्लत को दृष्टिगत त्राहिमोरी बांध को पुनः प्राप्त करना: विश्राम करना सामायिक की आवश्यकता नहीं है। ज्वालामुखी क्षेत्र में गोदाम रिचार्ज नहीं होता है।

 

–टी टी जेड के लिए महत्वपूर्ण

 

राजस्थान की ओर से बांध के सूखे होने से ग्यान ताज ट्रिपेजियम जोन के पर्यावरण को नष्ट करने वाली भारी भूमि से प्रचुरता करने वाली हवाएं और अधिक घातक हो जाती हैं। इन समुच्चय (जैसे PM10, PM2.5) में से कई फेफड़ों में गहराई तक संभावित स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे शामिल हैं और रंगीन आधार हैं।

 

*–नागरिकचाहता है बंदा बंधन हो*

 

यहां के निवासी और बड़े किसान श्री मराठा पराशर ने बताया कि शहर का सबसे बड़ा जल भंडार स्थित है। अत्यंत सहज है। वर्षा के दौरान यदि पानी का प्रबंधन किया जाए तो हिरण मीनार तक पहुंचने की क्षमता का विस्तार किया जाता है।

उदयपुर सीकरी चार भाग के निवासी पत्रकार महावीर वर्मा ने कहा है कि राजस्थान के अजान बांध से पानी छोड़ा जाना बंद कर दिया जाने के बावजूद, डुप्लिकेट काल में तीर्थयात्रा मोरी बांध को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय जलग्राही क्षेत्र से भरपूर जलराशि उपलब्ध है। उनका कहना है कि तेहरा मोरी बांध पर एक बार जलसंचय उपयुक्त हो जाए तो उपलब्ध ताजा वर्षा जल न केवल जलाशयों को रिचार्ज करेगा, बल्कि यह खारी नदी को भी शुरुआत थमाने के बाद पर्यावरण जलराशि से प्रचुरता देगा। किसानों को मदद मिलती है और तालाबों के पास तालाबों को भरा जाता है। उके ने कहा कि बांध को बर्बाद करने की वजह से नदी बनी रहने वाली वर्तमान शून्य स्थिति को देखते हुए आगरा नहर की एफ एस झील का पानी डूब गया है।

 

युधिस के समय मुज़ाहिरा सीकरी थी पानी की गारंटी

 

‘साइकिक’ (साइकिक) का अर्थ है पानी से गहरा क्षेत्र। भारतीय वैज्ञानिक सर्वेक्षक (ए असोसिएट) द्वारा 1999-2000 में सुल्तानपुर सीकरी के किले के पास स्थित ‘बीर छबीली टीला’ (बीर छबीली टीला) के साख पार्क की गहराई में प्रमुख दस्तावेज हैं।

जब सहदेव ने अपनी सेना के साथ इंद्रप्रस्थ से दक्षिण दिशा की ओर विजय प्राप्त की, तब मार्ग में उन्होंने मत्स्य देश (विराटनगर/जयपुर क्षेत्र) और शूरसेन (मथुरा क्षेत्र) के राजाओं को परास्त किया था। फ़तेहपुर सीकरी ने अब तक अधिकांश प्राकृतिक जल स्रोत खो दिए हैं, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण 20वीं सदी के 70वें दशक तक की मूल्यवान रही मोरी बाँध जल संरचना है। सीकरी के रिज (पहाड़ी) के उत्तरी तट के स्थानीय जलधाराओं, दक्षिणी घाट के भैसा मोरी रीच वाले प्रवाह को बनाने और राजधानी जूना के अजान बांध के ‘बृजेंद्र मोरी’ केरी नदी के रूप में जाना जाता है। मोरी बाँध के लिए महत्वपूर्ण जल संरचना है।

 

–अकबर का आरंभ जलसंचय से हुआ

 

प्राकृतिक रूप से सीमित जल संरक्षण के उपयोग के लिए रही इस जल संरचना को मुगल सम्राट अकबर के शासन काल में विशाल झील और नियामक के रूप में विकसित किया गया था। इसका निर्माण कृत्रिम झील (ड्रॉपी’ या ‘सीकरी झील’ भी कहा जाता था) लगभग 32 किमी (20 मील) झील में झीलें हुई थीं।

उत्तर में रसूलपुर (रसूलपुर) और दक्षिण में सीकरी की पहाड़ी (सीकरी रिज) के समुद्री तट पर प्राकृतिक खोह स्थित है। इसका विस्तार आगरा-भरतपुर रोड के उत्तर तक था, जहां तेरा मोरी (13 द्वारों वाला बांध) तक था।

यह विशाल डूब क्षेत्र न केवल शहर के लिए पानी का मुख्य स्रोत था, बल्कि इस किले की उत्तरी दिशा के लिए एक प्राकृतिक रक्षा कवच का काम भी किया गया था, संभात: इसी के लिए मीरापुर सीकरी किले की ओर की झील का किला नहीं बनाया गया था।

–अब सोमाली का दौर

वर्तमान में इस आदेश में पूरी तरह से सुख भुगतान किया गया है सैलियस गेट खराब होने के कारण अब बांध में पानी नहीं रुका है। नामांकन में न्यूनतम राजकुमारों द्वारा एक प्रश्न पूछा गया है कि भारत सरकार ने क्या बताया है कि त्राहिमाम मोरी बांध की काल या सुरक्षा के लिए यूपी शासन द्वारा उपलब्ध धन करवाये जाने का क्रम क्या है। सिचाई विभाग तृतीय मंडल, सीना कार्य (तृतीय मंडल आश्रम आश्रम) के औद्योगिक नहर खंड के अंतर्गत आता है। और उनके द्वारा दिए गए प्लान में बार की मांग करने के बावजूद बांध के सुलूस गेट (स्लूस गेट) गीतो को पिछले पांच दशक से कोई भी योजना नहीं मिली है, फलसफर सीकरी के लिए उपयोगी साबित हो सकने वाला यह संस्था पूरी तरह से निप्रयोज्य है।

सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की टीम में -अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना, राजेंद्र शुक्ला और कैमरामैन असलम त्यागी शामिल थे। 🌹🌹🌹🌹🙏🇮🇳✍️🚩🚩🚩

श्री अनिल शर्मा

सेद्री

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