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छत्तीसगढ प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिर और शक्तिपीठ

मां महामाया रतनपुर 52 शक्तिपीठों मे से एक है।।

वंदेभारतलाइवटीव न्युज, बुधवार 18 मार्च 2026

सभी श्रद्धालु भक्तजनों को चैत्र वासंतीय नवरात्रि , हिंदू नववर्ष, गुड़ी पड़वा, श्रीराम नवमी की हार्दिक बधाई, शुभकामनाऐं ।।।
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====-: श्रद्धालु भक्तजनों, कल गुरूवार 19 मार्च से चैत्र वासंतीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है।।चैत्र वासंतीय नवरात्र के शुभ अवसर पर छत्तीसगढ के देवी मंदिरों भी नवरात्र सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। नवरात्र के दौरान मंदिरों मे विशेष आरती पूजन के साथ साथ मनोकामना ज्योति कलश भी प्रज्वलित कियें जायेंगे। चैत्र नवरात्र के दौरान डोंगरगढ़ में दस एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव भी दिया जा रहा है।। आईये छत्तीसगढ प्रदेश के कुछ प्रमुख देवी मंदिरों और शक्तिपीठों के विषय में जानते हैं-: रतनपुर मां महामया मंदिर हर दिन 24 घंटे दर्शन की सुविधा। नवरात्र दूर्गा सप्तमी पर पूरी रात मंदिर का पट खुला रहेगा। देवी भागवत दुर्गा सप्तशती पाठ शतचंडी यज्ञ जसगीत आदि होंगे। इस बार मंदिर मे 25 हजार मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किये जायेंगे। रतनपुर मां महामया मंदिर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे-स्टेशन लगभग 25 किमी• की दूरी पर बिलासपुर है। बस टैक्सी ऑटो से भी जाया जा सकता है।।बिलासपुर सड़क मार्ग और रेलमार्ग से देश के लगभग सभी बड़े रेलवे-स्टेशन जुड़े हुए हैं। मां महामाया मंदिर रतनपुर 52 शक्तिपीठों मे से एक है। बिलासपुर जिले के अंतर्गत रतनपुर महामाया देवी मंदिर महाकाली महालक्ष्मी महा सरस्वती को समर्पित है। देवी महामाया को कोसलेशवरी देवी के रूप मे भी जाना जाता है, जो कि पुराने दक्षिण कोसल क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी भी हैं।
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मां बम्लेश्वरी देवी डोंगरगढ़ पहाड़ के ऊपर आठ हजार और नीचे मंदिर मे 901 मनोकामना आस्था के दीप प्रज्वलित किए जा रहे हैं। मंदिर में चांदी का दरवाजा लगा हुआ है। मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ पहुंचने के लिए रायपुर से सौ किमी• नागपुर से 190 किमी, की दूरी पर यह मंदिर है।।यह मंदिर मुंबई हावड़ा रेलमार्ग के तहत आता है। डोंगरगढ़ के लिए सीधे बस सेवा भी है। छग के डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित देवी बम्लेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर आस्था विश्वास का केंद्र है। बड़ी बम्लेश्वरी के समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध है। बम्लेश्वरी को वैभवशाली कामाख्या नगरी के रूप मे भी पहचाना जाता है। देवी बम्लेश्वरी को मध्यप्रदेश के उज्जयिनी के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी कहते हैं।।इसे मां दुर्गा का स्वरूप भी माना जाता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए यहां पैदल सीढ़ियों के अलावा रोपवे की भी सुविधा है। ऊपर पहाड़ पर पेयजल की सुविधा विश्रामालय की सुविधा, भोजनालय और धार्मिक सामग्री खरीदने की सुविधा भी है।
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मां दंतेशवरी मंदिर मे पांच हजार मनोकामना ज्योत प्रज्वलित किए जायेगे। ऑनलाइन दर्शन ज्योति कलश के पर्ची कटवाने की भी सुविधा। सुबह और शाम आरती का लाइव प्रसारण दंतेशवरी कॉरीडोर मे देख सकेगे। दंतेशवरी मंदिर जगदलपुर तहसील से करीब 80 किमी की दूरी पर है। रायपुर से 350 किमी दूर है।।रायपुर शहर से सड़क मार्ग से करीब 7-8 घंटे की यात्रा है। बस सुविधा भी है। देश के 52 शक्तिपीठों मे से एक दंतेशवरी मंदिर भी है। ऐसा माना जाता है कि यहां पर देवी का दांत गिरा था। यह मंदिर दंतेवाड़ा मे स्थित है। दंतेशवरी देवी की मूर्ति काले पत्थर से बनी हुई है। मंदिर को चार भागों में विभाजित किया गया है। मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने एक गरूड़ स्तंभ है। मंदिर एक विशाल प्रांगण मे स्थित है जो कि विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। यहां धर्मशाला हॉल मे ठहरने की सुविधा है। महिलाएं सलवार और साड़ी पहनकर ही गर्भगृह तक जा सकती हैं।
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मां महामाया मंदिर अंबिकापुर मे चार हज़ार ज्योति कलश प्रज्वलित किए जायेंगे। सरगुजा राजपरिवार इस मंदिर की व्यवस्था को संभालते हैं। आरती फेसबुक यूट्यूब पर लाइव देखी जा सकती है। माता के दर्शन सुबह चार बजे से रात के आठ बजे तक कर सकते है। दुर्ग अंबिकापुर ट्रेन की सुविधा है।।अंबिकापुर तक सीधे बस से भी पहुंचा जा सकता है। अंबिकापुर रेलवे-स्टेशन से टैक्सी बस ऑटो की सुविधा। अंबिकापुर शहर का नाम ही महामाया देवी के नाम पर है।।माना जाता है कि महामाया देवी का सिर रतनपुर मे और धड़ अंबिकापुर मे स्थित है।।माता की मूर्ति छिन्न मस्तिष्का है। महामाया के बगल मे विंध्यवासिनी विराजी हुई हैं। पहले महामाया को समलाया कहा जाता था समलाया मंदिर मे विराजी मां समलाया को छोटी समलाया कहते थे। बाद मे समलाया मंदिर मे छोटी समलाया को स्थापित किया गया तबसे महामाया कहा जाने लगा है।
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मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर चंद्रपुर सक्ती मे स्थित है। इस बार यहां पर 14 हजार ज्योति कलश प्रज्वलित किए जायेंगे। नवरात्र सप्तमी के बाद से सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। पास मे ही नाथलदाई मंदिर दर्शन का भी महत्व है।।चंद्रहासिनी मंदिर धार्मिक आस्था प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। निजी वाहन या टैक्सी से यहां जाना बेहतर है। चांपा तक ट्रेन और फिर बस की सुविधा है। रायपुर से सड़क मार्ग से करीब 225 किमी बिलासपुर से 150 किमी जांजगीर से करीब 110 किमी रायगढ से 32 किमी और सारंगढ से 29 किमी की दूरी पर है।।छग के सक्ती जिले के चंद्रपुर की छोटी पहाड़ी के ऊपर देवी मां विराजी हैं। ऐसी मान्यता है कि देवी सती का दाढ़ चंद्रपुर मे गिरा था। यहां पर पौराणिक और धार्मिक कथाओं की झांकियां करीब 100 फीट विशालकाय महादेव पार्वती की मूर्ती आदि मनमोह लेती है। भक्तगणो के ठहरने के लिए चंद्रहासिनी मंदिर धर्मशाला है।
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महामाया मंदिर रायपुर मे चैत्र नवरात्र मे 11 हजार ज्योति कलश प्रज्वलित किए जायेगे। नौ दिनों तक विशेष श्रृंगार किया जायेगा। यहां पर मिलावट के कारण घी का दिया प्रज्वलित नही किया जाता। महामाया मंदिर पहुंचने के लिए रायपुर से ट्रेन और बस दोनो सुविधा है। यहां से ऑटो टैक्सी से पुरानी बस्ती स्थित मंदिर तक जाया जा सकता है। महामाया मंदिर का गर्भगृह और गुंबद का निर्माण श्रीयंत्र के रूप मे किया गया है। मंदिर मे मां महालक्ष्मी महामाया मां समलेशवरी तीनो देवियों की पूजा एकसाथ की जाती है।।
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सर्वमंगला देवी मंदिर कोरबा मे आठ हजार ज्योति कलश प्रज्वलित किए जायेंगे। नवरात्र मे सप्तमी के बाद से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। यहां पहुंचने के लिए ट्रेन सुविधा है।।मंदिर तक जाने के लिए टैक्सी ऑटो भी है। । यह मंदिर कोरेश के जमींदार परिवार के द्वारा बनवाया गया था।।त्रिलोकीनाथ मंदिर, काली मंदिर, और ज्योति कलश भवन से घिरा हुआ है। वहां एक गुफा भी है जो कि नदी के नीचे जाती है और दूसरी ओर निकलती है।
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अंगारमोती माता मंदिर मे इस बार 4500 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए जायेंगे। यहां पर निशुल्क भोजन भंडारे की सूविधा मंदिर ट्रस्ट की ओर से नवरात्र के नौ दिनों तक।। रायपुर से धमतरी तक बस सुविधा, यहां से गंगरेल बांध, अंगार मोती मंदिर जाने के लिए टैक्सी ऑटो भी उपलब्ध रहते हैं। गंगरेल बांध मे 52 गांव डूबने के बाद मां अंगार मोती की स्थापना की गई थी। माता के चरण पादुका मंदिर मे अभी विराजमान है। भक्तगणों के ठहरने के लिए धर्मशाला वीआईपी के लिए अलग से रूम की व्यवस्था।
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मां चंडीदेवी मंदिर महासमुंद मे लगभग 6,000 ज्योति कलश प्रज्वलित किए जायेंगे। मंदिर परिसर मे नवरात्र के नौ दिनों तक भजन कीर्तन का आयोजन। बागबहरा तक बस सुविधा , यहां से टैक्सी ऑटो से भी पहुंचा जा सकता है। खुद के वाहन या टैक्स से जाना बेहतर रहता है। छग के महासमुंद जिले के बागबहरा घूंचापाली मे देवी मां चंडी का मंदिर है। मान्यता है कि लगभग 150 वर्ष पूर्व यह तंत्र मंत्र की साधना स्थल रहा करता था। यहा पर पहले महिलाओं का जाना मना था। प्राकृतिक रूप से माता चंडी के स्वरूप मे शिला ने आकार लिया । वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-पाठ शुरू हुई। जिसके बाद से महिलाओं का चंडी माता पूजा पर प्रतिबंध खत्म हुआ। भक्तजनों के लिए यहां पेयजल निशुल्क भोजन ठहरने की सुविधा । यहां पर सुबह शाम आरती के समय कई बार भालूओं के भी दर्शन हो जाते हैं।
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छग के राजनांदगांव स्थित पाताल भैरवी मंदिर मे भी नवरात्र के दौरान मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं। यहां पर घी ज्योत प्रज्वलित करने पर रोक है।।शरद पूर्णिमा के दिन प्रसाद के रूप मे जड़ी बूटी वाली खीर भक्तजनों को दी जायेगी। रेलवे और बस के द्वारा राजनांदगांव जुड़ा हुआ है।।मंदिर राजनांदगांव रेलवे-स्टेशन से करीब 3-4 किमी की दूरी पर है। यहां से ऑटो के द्वारा बर्फानी आश्रम पहुंचा जा सकता है। बर्फानी आश्रम धाम राजनांदगांव शहर में है। मंदिर के शीर्ष पर एक बड़ा सा शिवलिंग देखा जा सकता है। शिवलिंग के सामने एक बड़ी सी सी नंदी की प्रतिमा भी है।।यह मंदिर तीन स्तरों मे बनाया जाता है।।नीचे पाताल भैरवी मंदिर है दूसरे मे नवदुर्गा/ त्रिपुर सुंदरी और ऊपरी हिस्से मे भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिमा है। भक्तजनों के लिए यहां निशुल्क ठहरने, प्रसाद की सुविधा। मंदिर मे चंबीस घंटे दर्शन की सुविधा। ।।।

अनंतपद्मनाभ

D Anant Padamnabh, village- kanhari, Bpo-Gorakhpur, Teh-Pendra Road,Gaurella, Distt- gpm , Chhattisgarh, 495117,
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