
पाडली में आचार्य श्री सुधीन्द्र सागर महाराज संघ सानिध्य
पाडली में आचार्य श्री सुधीन्द्र सागर महाराज संघ सानिध्य में अभिषेक धर्म प्रेमी एवं शिष्टाचारी अनिल जैन के द्वारा शान्तिधारा पश्चात शांति विधान हुआ | विधान क्षुल्लक अकम्प सागर महाराज की प्रेरणा से मयंक भैया ने संपन्न किया | समाज सेवी अनिल जैन जी , मोहन जैन व भूपेंद्र जैन पाडली ने बताया कि आचार्य श्री ने संबोधन कहा कि जन्म के बाद मां लंगोटी पहनाती है उसमें जेब नहीं होती | यह इस बात का प्रतीक है कि तुम क्या लेकर आये कुछ भी नहीं | अंतिम विदाई में कफ़न डालते जेब नहीं होती यह भी इस बात का प्रतीक है कि क्या लेकर जायेगा कुछ भी नहीं | फिर भी इंसान जीवन भर जोड़ जोड़ कर रखता है | उसको नहीं छोड़ना चाहते हुए भी सब कुछ छूट कर यही जाता है और इसको जुटाने में जो कर्म बांध लिए वो साथ में जाते है | अगले जन्म में भोगने के लिए तीन अवस्था होती है । पहली विषय भोगों में रहना इनके साधन जुटाना जिससे संसार में दुख भोगने मिलता है | दूसरी विषय भोगों से विरक्त होकर धर्म ध्यान करना शुभपयोग यह वीआईपी व्यस्था है जिससे संसार में सुख भोगने को मिलता है | तीसरी इससे भी ऊपर शुद्ध उपयोग सिद्ध होने का पुरुषार्थ सिर्फ अपनी आत्मदृष्टि यह वीअ व्यस्था है मोक्ष मिलता है ।



