
पानी को लेकर शहर वाशी परेशान वीआईपी लोगों व सरकारी विभागों में हो रही टेंकरो से सप्लाई,जनता हो रही है परेशान

संवाददाता कोजराज परिहार
जैसलमेर शहर में पिछले 1 सप्ताह से भयंकर पेयजल संकट छाया हुआ है। शहर में पानी को लेकर त्राहिमाम मचा हुआ है लेकिन जिम्मेवार लोग वीआईपी लोगो व सरकारी विभागों का हलक तर करने में लगे हुए हैं। वीआईपी लोगो व कई सरकारी विभागों में टेंकरो से पानी की सप्लाई की जा रही है लेकिन आमजन पानी के लिए तरस रहे है। लोगो को 7 से 8 सौ रुपये में टेंकर खरीदना पड़ रहा है। पूर्व में शहर में टेंकर सप्लाई के लिए टेंडर हो रखे थे लेकिन 2 पिछले महीने से भी ज्यादा समय से टेंडर खत्म हो रखा है। आमजन जब भी जलदाय विभाग के अधिकारियों को टेंकर के लिए फोन करते हैं तो एक ही जवाब मिलता है टेंडर पूरा हो गया है। जब हमारी टीम फिल्टर हाउस पहुंची तो मौके पर 6-7 टेंकर भरने के लिए खड़े थे। जब हकीकात की गई तो जानकारी मिली कि ये टेंकर वीआईपी लोगो व चंद सरकारी विभागों के लिए भरे जा रहे है। ऐसे में सवाल उठता है कि पूर्व में हुए टेंडर का भुगतान तो नगर परिषद करती थी,लेकिन अब इन टेंकरो का भुगतान कौन करता है? कार्यवाहक सहायक अभियंता हरीश जीनगर ने बताया कि टेक्निकल खामी के चलते कई दिनों से शहर की सप्लाई बाधित है। वीआईपी लोगो के घर टेंकर भेजने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ चुनिंदा सरकारी विभागों में टेंकर भेजे जा रहे है।
हरीश जीनगर,कार्यवाहक सहायक अभियंता, phed
पर जब हमारी टीम फिल्टर हाउस पहुंची तो जनहित के मुद्दे को लेकर पार्षद लीलाधर दैया अपना विरोध जताते हुए अधिकारियों से उलझते दिखे। उन्होंने बताया कि जलदाय विभाग के अभियंता एक जनप्रतिनिधि का फोन नहीं उठाते तो आमजन इनसे क्या उम्मीद करें? शहर में कई दिनों से पानी के लिए त्राहिमाम मचा हुआ है। में जब टेंकर सप्लाई देखने आया तो देखा कि नर्सिंग कॉलेज, सर्किट हाउस, अस्पताल तथा कोर्ट में पानी भेजा जा रहा है तथा वीआईपी लोगो के घर जा रहा है। लेकिन आम जनता है टेंकर नहीं भेजा जा रहा है। इसका मतलब यहां बहुत बड़ा गड़बड़ झाला हो रहा है। अगर ये ऐसे ही चलता रहा तो जैसलमेर की जनता को बहुत बड़ा आंदोलन व धरना प्रदर्शन करना पड़ेगा।










