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बस्ती कांड: पत्रकार हमले की साजिश का ‘सस्पेंडेड’ मास्टरमाइंड बेनकाब!

खाकी की जांच में 'भोलू' का खेल खत्म: CDR ने खोली जरायम की दुनिया की परतें।

अजीत मिश्रा (खोजी)

🚨बस्ती: पत्रकार हमले में सस्पेंड सफाई कर्मी भोलू का ‘खलनायक’ चेहरा उजागर, CDR ने खोली साजिश की परतें🚨

⭐सफेदपोश गुंडागर्दी: सस्पेंड सफाईकर्मी ने रची थी पत्रकार को ‘मिटाने’ की साजिश।

⭐बहरूपिया शेषराम: फर्जी झंडी और रसूख की आड़ में चल रहा था पत्रकार पर हमले का प्लान।

⭐लालगंज पुलिस को चुनौती: CDR में नाम आया, पर क्या सलाखों के पीछे जाएगा भोलू?

बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

लालगंज (बस्ती)। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हुए कायराना हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सफेदपोश चेहरों के पीछे छिपे अपराधी बेनकाब होने लगे हैं। पत्रकार को जान से मारने की नीयत से किए गए हमले में अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस की सीडीआर (CDR) रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस पूरे कांड की स्क्रिप्ट लिखने में सस्पेंड सफाई कर्मी भोलू उर्फ शेषराम का मुख्य हाथ था।

💫कॉल डिटेल ने खोला राज: फरार अपराधी से जुड़ा था संपर्क

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि वारदात के वक्त और उससे पहले, मुख्य आरोपी रमेश चौधरी और भोलू उर्फ शेषराम के बीच लगातार बातचीत हो रही थी। भोलू न केवल हमलावरों के संपर्क में था, बल्कि वह पर्दे के पीछे रहकर पूरी साजिश को खाद-पानी दे रहा था। सीडीआर के पुख्ता प्रमाणों ने भोलू के उस ‘बहरूपिया’ चेहरे को बेनकाब कर दिया है, जो खुद को समाजसेवक बताता फिरता था।

💫सस्पेंड होकर भी ‘सत्ता’ का रसूख, फर्जी झंडी और गुंडागर्दी

भोलू उर्फ शेषराम का इतिहास जालसाजी और रसूख के दुरुपयोग से भरा है। विभागीय कार्रवाई के तहत सस्पेंड होने के बावजूद उसकी दबंगई में कोई कमी नहीं आई।

⭐फर्जी पहचान: खुद को प्रधान और रसूखदार बताकर वह लोगों पर धौंस जमाता था।

⭐राजनीतिक चोला: भाजपा के बड़े नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर और अपनी गाड़ी पर अवैध रूप से राजनीतिक झंडी लगाकर वह सरकारी तंत्र को ठेंगा दिखा रहा था।

⭐अपराध का संरक्षण: सरकारी सेवा से निलंबित होने के बाद उसने अपराध को ही अपना मुख्य पेशा बना लिया और क्षेत्र में गुंडागर्दी को बढ़ावा देने लगा।

💫वारदात: मरा समझकर छोड़ गए थे हमलावर

गौरतलब है कि आरोपी रमेश चौधरी ने अपने भाइयों और भांजे के साथ मिलकर पत्रकार पर जानलेवा हमला किया था। हमलावरों ने उन्हें इतनी बेरहमी से पीटा था कि वे उन्हें मरा हुआ समझकर झाड़ियों में फेंक कर भाग गए थे। इस हमले का एकमात्र उद्देश्य पत्रकार की उस निर्भीक आवाज को दबाना था, जो इन ‘सफेदपोश’ अपराधियों के काले कारनामों को उजागर कर रही थी।

💫पुलिस की सुस्ती और बढ़ता जनाक्रोश

घटना के कई दिन बीत जाने और मुकदमा पंजीकृत होने के बावजूद मुख्य आरोपी रमेश चौधरी अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। लालगंज थाना क्षेत्र में अपराधियों के बढ़ते हौसलों ने आम जनता और पत्रकार संगठनों में भारी रोष पैदा कर दिया है।

सवाल यह उठता है कि आखिर एक सस्पेंड सफाई कर्मी को किसका संरक्षण प्राप्त है? कैसे वह पुलिस की नाक के नीचे सरकारी तंत्र और राजनीति का डर दिखाकर खुलेआम घूम रहा है?

💫पत्रकार संगठनों ने भरी हुंकार

पत्रकार संगठनों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भोलू उर्फ शेषराम और फरार रमेश चौधरी की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। सीडीआर रिपोर्ट आने के बाद अब पुलिस पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह ‘पर्दे के पीछे’ के इस मास्टरमाइंड को सलाखों के पीछे भेजे।

क्या लालगंज पुलिस इन रसूखदार अपराधियों के गढ़ को ध्वस्त कर पाएगी, या रसूख की चमक जांच की आंच को धीमा कर देगी? यह आने वाला वक्त बताएगा।

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