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**मनरेगा का काम जारी, लेकिन मजदूरी गायब ₹1,250.84 करोड़ लंबित; महाराष्ट्र के हजारों मजदूर संकट में**

जामखेड | प्रतिनिधि

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में काम पूरा करने के बावजूद मजदूरों और कर्मचारियों को महीनों से मजदूरी नहीं मिली है। काम चालू होने के बावजूद भुगतान रुक जाने से ग्रामीण इलाकों में भारी आक्रोश फैल गया है और मजदूरों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि “क्या मनरेगा योजना बंद हो गई है?”

सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी और कार्य लागत के ₹1,250.84 करोड़ रुपये अब तक लंबित हैं। इस भारी बकाया राशि का सीधा असर राज्य के हजारों मजदूर परिवारों पर पड़ा है। कई मजदूरों के बैंक खातों में महीनों से एक भी रुपया जमा नहीं हुआ है, जिससे उनके सामने रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

मनरेगा के तहत 100 दिनों के भीतर पूरे किए गए कार्यों के साथ-साथ स्वीकृत आगे के कार्यों की मजदूरी का भुगतान न होना केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक विफलता माना जा रहा है। सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिए जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है और योजना पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है।

इस मुद्दे पर भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद, महाराष्ट्र राज्य के सचिव एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता रविकुमार शिंदे ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने कहा, “जब योजना चालू है तो मजदूरों की मजदूरी रोकना अत्यंत गंभीर मामला है। मजदूर मेहनत करता है, लेकिन समय पर मेहनताना नहीं मिलता। इसका नतीजा यह है कि कई परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। यह सरकार की लापरवाही और प्रशासनिक निष्क्रियता का स्पष्ट उदाहरण है।”

मनरेगा कानून के अनुसार समय पर मजदूरी देना लाभार्थियों का कानूनी अधिकार है, लेकिन वास्तविकता में इस अधिकार का लगातार उल्लंघन हो रहा है। शिंदे ने मांग की है कि सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर ₹1,250.84 करोड़ की लंबित मजदूरी का तत्काल भुगतान करे और भुगतान में बार-बार देरी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

यदि शीघ्र मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया, तो ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर असंतोष और आंदोलन भड़कने की पूरी आशंका है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी, ऐसा कड़ा चेतावनी भी उन्होंने दी है।

— रविकुमार शिंदे

राज्य सचिव, भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद, महाराष्ट्र

सूचना अधिकार कार्यकर्ता, जामखेड तालुका

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